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इंडस्ट्री की उदासीनता से देश को नहीं मिलरहा पेटेंट का लाभ
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न्यूज डेस्क, कौशल कुमार ओझा, अलीगढ़।
इंडस्ट्री की उदासीनता से देश को पेटेंट का लाभ नहीं मिल रहा है। यह कहना है कि एएमयू के बौद्धिक संपदा सेल के कन्वीनर प्रो. वसीम अहमद का। उनका कहना है कि भारत में जो पेटेंट हो रहे हैं, उसे यहां के इंडस्ट्री स्वीकार नहीं कर रहे हैं। पेटेंट को लेकर इंडस्ट्री संवेदनशील नहीं हैं।
आज विश्व बौद्धिक संपदा दिवस है। पेटेंट पर बात लाजिमी है। प्रो. वसीम अहमद का कहना है कि पेटेंट को लेकर और अधिक काम करने होंगे। पेटेंट के बाद 20 वर्ष तक हर साल वार्षिक फीस देना होता है। यह कौन देगा, यह तय होना बेहद जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेटेंट होने पर शुल्क काफी अधिक होता है। उनका कहना है कि यहां के विश्वविद्यालयों में जो अन्वेषण या नई खोज हो रहे हैं, उसका लाभ यहां के लोगों को मिलना चाहिए। यह तभी संभव है जब इंडस्ट्री पेटेंट को स्वीकार कर हाथों-हाथ लें।
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वैज्ञानिक या शैक्षणिक संस्थानों के लिए यह काम आसान नहीं है। पेटेंट सेल के कन्वीनर मो. इमरान का कहना है कि एएमयू में अब तक 45 से अधिक पेटेंट हो चुके हैं। 90 से अधिक पाइप लाइन में हैं। सबसे अधिक पेटेंट जेडएच कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के इलेक्ट्रीकल, इलेक्ट्रोनिक्स एवं मेकेनिकल विभाग के और बायोटेक्नोलॉजी यूनिट आदि के हैं।
मो. इमरान का कहना है कि प्रो. तारिक मंसूर ने कुलपति बनने के बाद पेटेंट को लेकर काफी काम किया है। संस्थान की रैंकिंग में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान होता है। मो. इमरान कहते हैं कि बौद्धिक संपदा को लेकर लोगों को और अधिक जागरूक करने की आवश्यकता है।
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इंडस्ट्री की उदासीनता से देश को पेटेंट का लाभ नहीं मिल रहा है। यह कहना है कि एएमयू के बौद्धिक संपदा सेल के कन्वीनर प्रो. वसीम अहमद का। उनका कहना है कि भारत में जो पेटेंट हो रहे हैं, उसे यहां के इंडस्ट्री स्वीकार नहीं कर रहे हैं। पेटेंट को लेकर इंडस्ट्री संवेदनशील नहीं हैं।
आज विश्व बौद्धिक संपदा दिवस है। पेटेंट पर बात लाजिमी है। प्रो. वसीम अहमद का कहना है कि पेटेंट को लेकर और अधिक काम करने होंगे। पेटेंट के बाद 20 वर्ष तक हर साल वार्षिक फीस देना होता है। यह कौन देगा, यह तय होना बेहद जरूरी है।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेटेंट होने पर शुल्क काफी अधिक होता है। उनका कहना है कि यहां के विश्वविद्यालयों में जो अन्वेषण या नई खोज हो रहे हैं, उसका लाभ यहां के लोगों को मिलना चाहिए। यह तभी संभव है जब इंडस्ट्री पेटेंट को स्वीकार कर हाथों-हाथ लें।
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वैज्ञानिक या शैक्षणिक संस्थानों के लिए यह काम आसान नहीं है। पेटेंट सेल के कन्वीनर मो. इमरान का कहना है कि एएमयू में अब तक 45 से अधिक पेटेंट हो चुके हैं। 90 से अधिक पाइप लाइन में हैं। सबसे अधिक पेटेंट जेडएच कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के इलेक्ट्रीकल, इलेक्ट्रोनिक्स एवं मेकेनिकल विभाग के और बायोटेक्नोलॉजी यूनिट आदि के हैं।
मो. इमरान का कहना है कि प्रो. तारिक मंसूर ने कुलपति बनने के बाद पेटेंट को लेकर काफी काम किया है। संस्थान की रैंकिंग में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान होता है। मो. इमरान कहते हैं कि बौद्धिक संपदा को लेकर लोगों को और अधिक जागरूक करने की आवश्यकता है।