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10 रुपये की दवा पर एक हजार की चोट
अमर उजाला,अलीगढ़
Updated Thu, 10 Nov 2016 01:49 AM IST
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क्वार्सी चौराहे पर दवा की दुकान में पांच सौ के नोट लेकर दवा लेने के लिए लगी भीड़।
- फोटो : amar Ujala
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अलीगढ़। भाई साहब...! दस रुपये की दवा के लिए ग्राहक 500 या 1000 रुपये का नोट ला रहे हैं । बैंक भी बंद है। एटीएम भी काम नहीं कर रहे...। फुटकर मार्केट में भी खुले पैसे नहीं हैं...। खुले पैसे कहां से दूं...? क्वार्सी चौराहा स्थित चेतन मेडिकल स्टोर के स्वामी डॉ. वीपी गुप्ता ने कुछ इस तरह से अपनी पीड़ा व्यक्त की।
पूरे दिन मरीज, तीमारदार और मेडिकल स्टोर संचालकों में अफरातफरी मची रही। नर्सिंग होम स्वामियों ने भी इन नोटों से मुंह फेर लिया है। भले ही मरीज लौट जाएं। एक नामचीन नर्सिंग होम पर पूछा तो जवाब मिला कि जल्द दिखाने का नंबर तो लग जाएगा, लेकिन आना तो सौ-सौ के नोट ही लाना।
मेरी पत्नी शशि आठ माह की गर्भवती है। उसकी दवा लेने आया हूं, लेकिन मेडिकल वाले पांच सौ का नोट ले नहीं रहे। मैं एडीए मार्केट से लेकर क्वार्सी तक मेडिकल स्टोरों पर घूम चुका हूं।
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-सुभाष ग्राहक, एडीए कालोनी
पांच सौ व एक हजार रुपये का नोट बंद होने से खुले पैसे की समस्या हो गई है। कई ग्राहक लौटाने पड़ गए। बैंक भी बंद हैं। ऐसे में दिक्कतें और बढ़ गई हैं।
-राकेश, विकास मेडिसिन सेंटर क्वार्सी
मैं हार्ट का मरीज हूं और दवाओं पर ही जिंदा हूं। मेडिकल स्टोर वाले कह रहे हैं कि पूरे हजार रुपये की दवा लो, या फिर खुले पैसे दो। खुले कहां से लाऊंगा। मजबूरन पैसे दुकानदार पर ही अगली बार की दवा के लिए जमा कर दिए हैं।
-इरशाद अली, ग्राहक कौड़ियागंज
मेरा भाई डेंगू से पीड़ित है और अस्पताल में भर्ती है। डाक्टर ने बाहर की दवा लिखी है। उसे लेने के लिए भटक रहा हूं। मेरे पास एक हजार रुपये का नोट है। मेडिकल स्टोर स्वामी तो नोट भी स्वीकार करने से इंकार कर रहे हैं। -अजीत चौहान, ग्राहक निवासी क्वार्सी
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पूरे दिन मरीज, तीमारदार और मेडिकल स्टोर संचालकों में अफरातफरी मची रही। नर्सिंग होम स्वामियों ने भी इन नोटों से मुंह फेर लिया है। भले ही मरीज लौट जाएं। एक नामचीन नर्सिंग होम पर पूछा तो जवाब मिला कि जल्द दिखाने का नंबर तो लग जाएगा, लेकिन आना तो सौ-सौ के नोट ही लाना।
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मेरी पत्नी शशि आठ माह की गर्भवती है। उसकी दवा लेने आया हूं, लेकिन मेडिकल वाले पांच सौ का नोट ले नहीं रहे। मैं एडीए मार्केट से लेकर क्वार्सी तक मेडिकल स्टोरों पर घूम चुका हूं।
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-सुभाष ग्राहक, एडीए कालोनी
पांच सौ व एक हजार रुपये का नोट बंद होने से खुले पैसे की समस्या हो गई है। कई ग्राहक लौटाने पड़ गए। बैंक भी बंद हैं। ऐसे में दिक्कतें और बढ़ गई हैं।
-राकेश, विकास मेडिसिन सेंटर क्वार्सी
मैं हार्ट का मरीज हूं और दवाओं पर ही जिंदा हूं। मेडिकल स्टोर वाले कह रहे हैं कि पूरे हजार रुपये की दवा लो, या फिर खुले पैसे दो। खुले कहां से लाऊंगा। मजबूरन पैसे दुकानदार पर ही अगली बार की दवा के लिए जमा कर दिए हैं।
-इरशाद अली, ग्राहक कौड़ियागंज
मेरा भाई डेंगू से पीड़ित है और अस्पताल में भर्ती है। डाक्टर ने बाहर की दवा लिखी है। उसे लेने के लिए भटक रहा हूं। मेरे पास एक हजार रुपये का नोट है। मेडिकल स्टोर स्वामी तो नोट भी स्वीकार करने से इंकार कर रहे हैं। -अजीत चौहान, ग्राहक निवासी क्वार्सी