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टैटू का शौक युवाओं पर पड़ रहा भारी: इस खतरनाक बीमारी में जकड़ रहे; यौन संबंध पर भी असर, होश उड़ाने वाले आंकड़े
Sun, 28 Jul 2024 07:11 AM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Sun, 28 Jul 2024 07:11 AM IST
सार
राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम की ओपीडी में मरीज बढ़ रहे है। इनमें संक्रमित रक्त, असुरक्षित यौन संबंधों वाले मरीजों की संख्या सबसे अधिक है।
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टैटू
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
टैटू बनवाने में लापरवाही से युवा हेपेटाइटिस बी-सी की चपेट में आ रहे हैं। संक्रमित सुई के इस्तेमाल से बीमारी लग गई। एसएन मेडिकल कॉलेज में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीएचसीपी) में जांच करने पर मर्ज की पुष्टि हो रही है। इनका उपचार भी हो रहा है।
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उत्तर प्रदेश के आगरा में एनवीएचसीपी के नोडल अधिकारी डॉ. सूर्यकमल वर्मा ने बताया कि जनवरी 2023 से जून 2024 तक 26526 लोगों की जांच में 1636 मरीजों में हेपेटाइटिस बी की पुष्टि हुई। 24237 नमूनों की जांच में हेपेटाइटिस सी के 934 मरीज मिले। इनमें 40 फीसदी में बीमारी की वजह असुरक्षित यौन संबंध रही। संक्रमित सुई से 16 फीसदी को बीमारी लगी। इसमें टैटू बनवाने, नशे के इंजेक्शन लगवाने वाले मरीज रहे।
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संक्रमित रक्त चढ़ने से भी मरीज बन रहे हैं। असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई और रक्त से 70 फीसदी को हेपेटाइटिस बी हुआ। मरीजों में 25-40 उम्र के 60 फीसदी हैं। हेपेटाइटिस सी का लगभग उम्रभर इलाज चलता है। हेपेटाइटिस बी में 84 दिन और लिवर में संक्रमण होने पर 164 दिन उपचार चलने पर मरीज ठीक हो जाते हैं। हेपेटाइटिस ए और ई दूषित भोजन और पानी से होता है, ये गंभीर नहीं होता है।
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एसएन में जांच-इलाज निशुल्क, निजी अस्पताल में महंगा
हेपेटाइटिस दिवस के उपलक्ष्य में एसएन कॉलेज में शिविर लगाकर लोगों को हेपेटाइटिस बी और सी के बारे में जागरूक किया। माइक्रोबायलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर गोयल ने कहा कि प्रमाणित बैंक से ही रक्त लें, इस्तेमाल सुई दोबारा उपयोग न करें और सुरक्षित तरीके से यौन संबंध बनाएं।
वायरोलॉजी लैब की प्रभारी डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि दुनिया में हर 30 सेकंड में इलाज न कराने और बीच में छोड़ने पर एक संक्रमित की मौत हो रही है। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने एसएन में जांच और इलाज निशुल्क है। शिविर में डॉ. टीपी सिंह, डॉ. विकास गुप्ता, डॉ. प्रभात अग्रवाल, डॉ. रेनू अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
ये हैं लक्षण:
- आंखों और त्वचा का रंग पीला होना, पेशाब पीला आना।
- पेट फूलना, खून की उल्टी होना, मल का काला होना।
- खून की कमी, वजन कम होना और भूख कम लगना।
- उल्टी और पेट में दर्द होना, बुखार आना।