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कासगंज बवालः घर में खुशी आने से पहले मिला जिंदगी भर का ये गम
फहीम खान/अनन्त जैन, अमर उजाला कासगंज
Updated Mon, 29 Jan 2018 03:03 PM IST
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अकरम की एक आंख की रोशनी चली गई।
- फोटो : अमर उजाला
‘ए काश मेरी मुल्क की ऐसी फिजां बने, मंदिर जले तो रंज मुसलमान को भी हो। पामाल हो न जाए ये मस्जिद की आबरू, ये फिक्र मंदिरों के निगहबान को भी हो।’ काश! ये पंक्तियां उन चंद लोगों को भी समझ में आती, जिन्होंने कासगंज की फिजां में जहर घोल दिया।
कासगंज का दंगा लखीमपुर खीरी के अकरम को जिंदगी भर का ‘दाग’ दे गया। कानों में गूंजतीं नन्ही किलकारियों को सुनने अलीगढ़ आ रहे अकरम से दंगाइयों ने उनकी एक आंख ही छीन ली।
नन्हीं परी को गोद में लेते ही अकरम अपने दर्द को भुला बैठे और उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। बेटी को देखकर अकरम ने कहा ‘मेरी जानशीन अल्लाह की रहमत और तेरे नसीब से मैं जिंदा हूं।’ एक ही सही लेकिन मैं तुझे देख सकता हूं।
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कासगंज का दंगा लखीमपुर खीरी के अकरम को जिंदगी भर का ‘दाग’ दे गया। कानों में गूंजतीं नन्ही किलकारियों को सुनने अलीगढ़ आ रहे अकरम से दंगाइयों ने उनकी एक आंख ही छीन ली।
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नन्हीं परी को गोद में लेते ही अकरम अपने दर्द को भुला बैठे और उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। बेटी को देखकर अकरम ने कहा ‘मेरी जानशीन अल्लाह की रहमत और तेरे नसीब से मैं जिंदा हूं।’ एक ही सही लेकिन मैं तुझे देख सकता हूं।
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अकरम की पत्नी और उसकी बच्ची
- फोटो : अमर उजाला
लखीमपुर खीरी से अलीगढ़ अपनी बेगम अनम का प्रसव कराने आ रहे अकरम दंगे का शिकार हो गए। दंगे में उन्हें अपनी एक आंख तक गंवानी पड़ी। रविवार को उनकी पत्नी अनम ने एक नन्ही परी को जन्म दिया।
एक ओर परिवार में नन्ही परी के आने की खुशियां थी तो अकरम की एक आंख जाने का गम। अकरम के बहनोई मोहम्मद मंसूर अहमद ने बताया कि बताया कि वह उनकी बेटी को दिखाने मेडिकल कालेज में अकरम के पास ले गए।
नन्ही परी को देखते ही अकरम अपने सारे दर्द भुला बैठे और उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। मोहम्मद मंसूर अहमद ने बताया कि यह बहुत दुख की बात है कि कुछ न समझ लोगों की सजा पूरे मुल्क और समाज को भुगतनी पड़ती है।
एक ओर परिवार में नन्ही परी के आने की खुशियां थी तो अकरम की एक आंख जाने का गम। अकरम के बहनोई मोहम्मद मंसूर अहमद ने बताया कि बताया कि वह उनकी बेटी को दिखाने मेडिकल कालेज में अकरम के पास ले गए।
नन्ही परी को देखते ही अकरम अपने सारे दर्द भुला बैठे और उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। मोहम्मद मंसूर अहमद ने बताया कि यह बहुत दुख की बात है कि कुछ न समझ लोगों की सजा पूरे मुल्क और समाज को भुगतनी पड़ती है।
उपद्रवियों ने घेर लिया
लखीमपुर खीरी के महाराज नगर खीरी रोड निवासी अकरम अपनी नौकरानी बुशरा के साथ शनिवार को बदायूं से कासगंज होते हुए अलीगढ़ जा रहे थे। कासगंज की सीमाएं सील होने के कारण उन्हें पुलिस ने गंगीरी होते ही अलीगढ़ जाने की सलाह दी। वह माल गोदाम रोड पर पहुंचे ही थी कि उन्हें उपद्रवियों ने घेर लिया और कार से खींचने की कोशिश की।
उनके ऊपर नुकीली चीज से आंख पर हमला किया। लहूलुहान हालत में अकरम जिला अस्पताल पहुंचे तो उन्हें अलीगढ़ जाने के लिए कहा गया। इस पर उन्होंने पुलिस से मदद मांगी लेकिन कासगंज पुलिस ने हाथ खडे़ कर दिए।
अकरम ने परिवारीजनों को जानकारी दी। इस पर परेशान परिवारीजनों ने अलीगढ़ एसपी से बात की। इस पर अलीगढ़ एसपी ने कासगंज एसपी से बात की।
इसके बाद कासगंज पुलिस ने सरकारी एंबुलेंस से अकरम को अलीगढ़ भिजवाया। अकरम की हालत इतनी खराब हो चुकी थी लेकिन उनकी पूरी आंख को निकालना पड़ा। वह अलीगढ़ के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कालेज में भर्ती हैं।
उनके ऊपर नुकीली चीज से आंख पर हमला किया। लहूलुहान हालत में अकरम जिला अस्पताल पहुंचे तो उन्हें अलीगढ़ जाने के लिए कहा गया। इस पर उन्होंने पुलिस से मदद मांगी लेकिन कासगंज पुलिस ने हाथ खडे़ कर दिए।
अकरम ने परिवारीजनों को जानकारी दी। इस पर परेशान परिवारीजनों ने अलीगढ़ एसपी से बात की। इस पर अलीगढ़ एसपी ने कासगंज एसपी से बात की।
इसके बाद कासगंज पुलिस ने सरकारी एंबुलेंस से अकरम को अलीगढ़ भिजवाया। अकरम की हालत इतनी खराब हो चुकी थी लेकिन उनकी पूरी आंख को निकालना पड़ा। वह अलीगढ़ के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कालेज में भर्ती हैं।