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UP: दादा-पिता के कारोबार को युवाओं ने बनाया ब्रांड, अब देशभर में पहचान; युवा उद्यमियों की सफलता की कहानी
Wed, 17 Jun 2026 11:19 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 17 Jun 2026 11:19 AM IST
सार
आगरा के युवा उद्यमियों ने पारंपरिक पारिवारिक कारोबार को आधुनिक तकनीक, पैकेजिंग और मार्केटिंग के जरिए नई पहचान दिलाई है। फूड एक्सपो में ऐसे कई युवा व्यवसायियों ने अपनी सफलता की कहानी साझा की, जिनके ब्रांड अब दिल्ली-एनसीआर और अन्य राज्यों तक पहुंच चुके हैं।
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फूड एक्सपो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
ताजनगरी की चौहद्दी तक सीमित रहे बरसों पुराने पारंपरिक व्यापार को अब युवा पीढ़ी के उद्यमी आधुनिकता के पंख लगा रहे हैं। शहर में आयोजित फूड एक्सपो में युवा उद्यमियों ने अपने पुराने पारिवारिक ब्रांड और नए विजन के साथ सफलता की अनूठी कहानी बयां की है।
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जिन व्यवसायों को पिछली पीढ़ियों ने वर्षों तक देसी और सीमित अंदाज में चलाया, आज के युवाओं ने तकनीक, बेहतर पैकेजिंग और आक्रामक मार्केटिंग के दम पर उन्हें कॉर्पोरेट लुक दे दिया है। नतीजा यह है कि आगरा के फूड प्रोसेसिंग उद्योग की धाक अब सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार दिल्ली-एनसीआर और आसपास के कई राज्यों तक हो चुका है। पारंपरिक स्वाद को बिना बदले, आधुनिक दौर की मांग के अनुसार पेश करने की युवाओं की इस सोच ने न केवल पुराने ब्रांड्स को संजीवनी दी है, बल्कि देश भर में आगरा के हुनर का लोहा भी मनवाया है।
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रॉल्स रॉयस जितना बड़ा ब्रांड बनाने का सपना डबल त्रिशूल नाम से आटा, मैदा, सूजी, दलिया जैसे खाद्य उत्पादों की दिल्ली-एनसीआर तक बिक्री करने वाले आशीष गर्ग ने आईआईटी कानपुर से बीटेक के बाद जापान तक में नौकरी की। रॉल्स रॉयस जैसी कंपनी में भी रहे लेकिन मन में 45 साल पुराने पिता सतीश चंद्र के शुरू किए कारोबार को फैलाने का रहा। नतीजा, नौकरी छोड़कर वापस लौटे और मोतीगंज की थोक गल्ला मंडी पर लगी चक्की का आटा बेचने से अब प्रदेश स्तर पर कारोबार कर रहे हैं।
खानदानी मसाला कारोबार को फैलाया
शिल्पा मसाला के नाम से कारोबार कर रहे सिद्धार्थ अग्रवाल ने दादा श्रीभगवान अग्रवाल के वर्षों पहले रावतपाड़ा में शुरू किए खड़े मसाले के कारोबार को आधुनिक बनाया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद दूसरों की नौकरी करने की बजाय अपने बरसों पुराने कारोबार को विस्तार देने का प्लान बनाया। बिना मानवीय दखल के मशीनों की मदद से मवर्षों की पिसाई पैकिंग कर आसपास के राज्यों में भी सप्लाई चेन का नेटवर्क खड़ा कर दिया।
शिल्पा मसाला के नाम से कारोबार कर रहे सिद्धार्थ अग्रवाल ने दादा श्रीभगवान अग्रवाल के वर्षों पहले रावतपाड़ा में शुरू किए खड़े मसाले के कारोबार को आधुनिक बनाया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद दूसरों की नौकरी करने की बजाय अपने बरसों पुराने कारोबार को विस्तार देने का प्लान बनाया। बिना मानवीय दखल के मशीनों की मदद से मवर्षों की पिसाई पैकिंग कर आसपास के राज्यों में भी सप्लाई चेन का नेटवर्क खड़ा कर दिया।