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मथुरा में फेल हुआ योगी का बंदरों से दोस्ती का फार्मूला, सीएम के जाने के बाद 800 लोगों पर हमला

Sun, 09 Sep 2018 01:18 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Updated Sun, 09 Sep 2018 01:18 AM IST
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Yogi's friendship with monkeys formula failed in Mutiara
योगी आदित्यनाथ

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा वृंदावन में दिया गया बंदरों से दोस्ती का फार्मूला पूरी तरह से फ्लॉप हो गया। मुख्यमंत्री के कहे अनुसार बंदरों को खिला पिलाकर दोस्ती करने वाले लोग ही उनका शिकार हो रहे हैं। कोल्ड ड्रिंक पिला दी, दूध दे दिया, फल परोसे। इनकी पसंदीदा फ्रूटी भी थमा दी लेकिन यह बाज नहीं आए।  

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मथुरा जनपद में करीब एक लाख बंदर हैं। क्योंकि 2013 में जब वृंदावन में गणना कराई गई थी तब वहां ही 42000 का आंकड़ा आया था। उसके बाद कोई गणना तो हुई नहीं लेकिन वन विभाग का कहना है कि इनकी संख्या तेजी के साथ बढ़ रही है। मथुरा के लोग अगर इस समय किसी बड़ी समस्या से परेशान हैं तो वह बंदर ही हैं। मई 2018 में 658, जून में 700, जुलाई में 875 और अगस्त माह में अकेले वृंदावन में 1000 लोगों को बंदरों ने काटा है। क्योंकि 31 अगस्त को वृंदावन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बंदरों से दोस्ती करने का फार्मूला लोगों को दिया था जिस पर तमाम ने अमल भी किया।
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लेकिन जिला अस्पताल और सौ शैया अस्पताल वृंदावन से मिले आंकड़ों के मुताबिक इस फार्मूले का कोई असर हुआ नहीं। एक सितंबर से आठ सितंबर तक 800 लोगों पर बंदर हमला कर चुके हैं, जबकि 73 लोगों का सामान छीन लिया, जिसमें मोबाइल, चश्मा और पर्स है। पहले बंदर फ्रूटी लेने के बाद सामान लौटा दिया करते थे मगर अब वह भी नहीं लौटा रहे।  
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31 अगस्त को यह फार्मूला दिया था योगी ने 
आप लोग एक बंदर को मेरी गोदी में बैठे हुए फोटो सोशल मीडिया पर देखते होंगे। यह फोटो गोरखपुर में हमारे आश्रम की थी। एक बंदर मेरे आसपास घूमता रहता था। मैंने उस बंदर को हर रोज कुछ खिलाना शुरू किया तो वह मेरा दोस्त बन गया। जब में आफिस में बैठकर काम करता था तो वह मेरी गोद में आकर बैठ जाता था। जानवरों को भी प्यार चाहिए वह भी आपके दोस्त बन जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बंदरों को शांत करने के लिए हनुमान चालीसा करने को भी कहा था। तमाम लोग उनकी बात मानकर बंदरों से दोस्ती करने निकले थे लेकिन घायल हो गए।   

केस वन: गंगापुर सिटी राजस्थान निवासी विपिन कुमार भगवान के दर्शनों को आए थे। बंदरों ने उनका चश्मा उतार लिया। विपिन कुमार ने बंदर से दोस्ती करने के लिए फ्रूटी पिलाई और फल भी दिए लेकिन बंदर ने उनका चश्मा वापस नहीं किया। 

केस दो: अठखंभा निवासी मुकेश अग्रवाल का भी चश्मा बंदरों ने उतार लिया था। क्योंकि बंदर फ्रूटी बहुत पसंद करते हैं लिहाजा बंदर को तत्काल फ्रूटी दे दी लेकिन उसने चश्मा फिर भी तोड़ दिया था। मुकेश का कहना है कि चाहे हनुमान चालीसा पढ़ो या फल दे दो बंदर तो बंदर ही रहेगा।    

केस तीन: विपिन कुमार का कहना है कि उनकी छत पर बंदर आकर सारा सामान तहस नहस कर देते थे। मुख्यमंत्री की बात मानकर बंदरों से दोस्ती करने के लिए खिलाना पिलाना शुरू किया मगर बंदर फिर भी छत पर सूख रहे कपड़े लेकर चले गए। 


केस चार: सुभाष गुप्ता की मानें तो वह पिछले पांच दिनों से बंदरों से दोस्ती करने के लिए उन्हें फल खिला रहे हैं। लेकिन बंदरों ने फिर भी उनके पोते पर हमला कर दिया। अभी तक दो इंजेक्शन वह लगवा चुके हैं। यह बहुत खूंखार बंदर हैं इनसे दोस्ती नहीं हो सकती।

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