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मथुराः योगी कैबिनेट ने गोवर्धन श्राइन बोर्ड को नहीं दी मंजूरी, अगली सुनवाई में मुख्य सचिव तलब
Sat, 20 Jul 2019 12:11 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 20 Jul 2019 12:11 AM IST
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गोवर्धन स्थित दानघाटी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
गिरिराज परिक्रमा संरक्षण संबंधी याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को अवगत कराया कि राज्य कैबिनेट ने गोवर्धन श्राइन बोर्ड के गठन की अनुमति नहीं दी है।
इसके लिए अब तक गलत शपथ पत्र प्रस्तुत करने पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए प्रमुख सचिव से जवाब तलब किया है। साथ ही अपर मुख्य सचिव पर्यटन को तलब कर लिया है।
शुक्रवार को गोवर्धन से जुड़े गिरिराज परिक्रमा संरक्षण संस्थान की याचिका पर एनजीटी में सुनवाई हुई। न्यायाधीश रघुवेंद्र सिंह राठौर व सत्यवान सिंह गर्ब्याल की पीठ ने सरकार की और से पेश हुए अधिवक्ता से कड़ी नाराजगी जताई जब उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट मीटिंग में श्राइन बोर्ड बनाने संबंधी कानून को पास करने से मना कर दिया है।
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इसके लिए अब तक गलत शपथ पत्र प्रस्तुत करने पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए प्रमुख सचिव से जवाब तलब किया है। साथ ही अपर मुख्य सचिव पर्यटन को तलब कर लिया है।
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शुक्रवार को गोवर्धन से जुड़े गिरिराज परिक्रमा संरक्षण संस्थान की याचिका पर एनजीटी में सुनवाई हुई। न्यायाधीश रघुवेंद्र सिंह राठौर व सत्यवान सिंह गर्ब्याल की पीठ ने सरकार की और से पेश हुए अधिवक्ता से कड़ी नाराजगी जताई जब उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट मीटिंग में श्राइन बोर्ड बनाने संबंधी कानून को पास करने से मना कर दिया है।
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इस पर याचिकाकर्ता आनंद गोपाल दास व सत्यप्रकाश मंगल के अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी ने न्यायालय को अवगत कराया कि 15 जुलाई को ही प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने श्राइन बोर्ड गठन के लिए समय मांगा था और उसी दिन कैबिनेट ने निर्णय भी ले लिया।
न्यायालय को भ्रमित करने के लिए गलत शपथपत्र दिए गए। 2017 में इस तरह का शपथपत्र दाखिल किया गया है। 2018 में भी सरकार के मुख्य सचिव इस बाबत आदेश जारी कर चुके हैं।
सार्थक चतुर्वेदी ने बताया कि इस पर न्यायालय ने अब तक दाखिल शपथपत्रों का हवाला देते हुए अब तक न्यायालय को गुमराह करने के लिए सरकार के मुख्य सचिव से जवाब तलब किया है। अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी को अगली सुनवाई पर हाजिर रहने को कहा है।
न्यायालय को भ्रमित करने के लिए गलत शपथपत्र दिए गए। 2017 में इस तरह का शपथपत्र दाखिल किया गया है। 2018 में भी सरकार के मुख्य सचिव इस बाबत आदेश जारी कर चुके हैं।
सार्थक चतुर्वेदी ने बताया कि इस पर न्यायालय ने अब तक दाखिल शपथपत्रों का हवाला देते हुए अब तक न्यायालय को गुमराह करने के लिए सरकार के मुख्य सचिव से जवाब तलब किया है। अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी को अगली सुनवाई पर हाजिर रहने को कहा है।
वे श्राइन बोर्ड बनाने से जुड़े कानून पर हुई कार्रवाई की लिखित जानकारी के साथ न्यायालय में उपस्थित रहें। सरकार की ओर से अधिवक्ता ने नाराज न्यायालय के समक्ष दलील रखते हुए कहा कि अधिकारी अपना कार्य कर रहे हैं, लेकिन श्राइन बोर्ड से संबंधित कानून पर कैबिनेट द्वारा मंजूरी नहीं दिए जाने पर अधिकारी बाध्य हैं।
इस दौरान न्यायालय ने जिला प्रशासन पर मुड़िया पूर्णिमा मेला की अव्यवस्थाओं के लिए नाराजगी जताई। इसके लिए उचित दंड का आदेश भी पारित किया जाएगा। मेला में न तो पर्याप्त पार्किंग थी, न ही उचित साफ सफाई। अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
इस दौरान न्यायालय ने जिला प्रशासन पर मुड़िया पूर्णिमा मेला की अव्यवस्थाओं के लिए नाराजगी जताई। इसके लिए उचित दंड का आदेश भी पारित किया जाएगा। मेला में न तो पर्याप्त पार्किंग थी, न ही उचित साफ सफाई। अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।