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द्वापर कालीन है योगेश्वर मंदिर, पांच हजार वर्ष पूर्व की गई थी स्थापना
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ासगंज सोरों का योगेश्वर महादेव मंदिर
- फोटो : KASGANJ
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सोरों। तीर्थनगरी का योगेश्वर मंदिर विशेष महत्व का मंदिर है। योगेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना द्वापर कालीन समय में की गई। इस मंदिर में शिवभक्ति के कार्यक्रम सावन मास में आयोजित किए जाते हैं।
योगेश्वर मंदिर का निर्माण राजा सोमदत्त सोलंकी ने कराया। जब राज सोलंकी ने तीर्थनगरी को अपनी राजधानी बनाया था। करीब 5 हजार वर्ष पूर्व सोरों में किला बनाया गया। किले के चारों दिशाओं के प्रवेश द्वारों पर शिवलिंग की स्थापना की गई। पश्चिम दिशा में योगेश्वर महादेव मंदिर स्थापित किया गया। जबकि दक्षिण दिशा में रुपेश्वर महादेव मंदिर, उत्तर दिशा में दूधेश्वर महादेव मंदिर, पूर्व दिशा में बटुकनाथ सिद्धपीठ की स्थापना की। शिवभक्त इस मंदिर का विशेष महत्व मानते हैं। जो भक्त मनोकामनाएं लेकर मंदिर पहुंचते हैं उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
मंदिर में निरंतर रुद्राभिषेक की पूजा सावन मास में होती है। सावन मास के अंतिम सोमवार को भव्य फूल बंगला, झांकियां सजाई जाती हैं। मंदिर के सेवायत पंडित धनश्याम शास्त्री ने बताया कि यह मंदिर पांच हजार वर्ष पुराना है। प्राचीन समय से जलाभिषेक होने के कारण मूर्तियों का क्षरण भी हो चुका है। पुरातत्व विभाग की टीम भी पूर्व के समय में प्राचीन मूर्तियों का सर्वेक्षण कर चुकी है।
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योगेश्वर मंदिर का निर्माण राजा सोमदत्त सोलंकी ने कराया। जब राज सोलंकी ने तीर्थनगरी को अपनी राजधानी बनाया था। करीब 5 हजार वर्ष पूर्व सोरों में किला बनाया गया। किले के चारों दिशाओं के प्रवेश द्वारों पर शिवलिंग की स्थापना की गई। पश्चिम दिशा में योगेश्वर महादेव मंदिर स्थापित किया गया। जबकि दक्षिण दिशा में रुपेश्वर महादेव मंदिर, उत्तर दिशा में दूधेश्वर महादेव मंदिर, पूर्व दिशा में बटुकनाथ सिद्धपीठ की स्थापना की। शिवभक्त इस मंदिर का विशेष महत्व मानते हैं। जो भक्त मनोकामनाएं लेकर मंदिर पहुंचते हैं उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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मंदिर में निरंतर रुद्राभिषेक की पूजा सावन मास में होती है। सावन मास के अंतिम सोमवार को भव्य फूल बंगला, झांकियां सजाई जाती हैं। मंदिर के सेवायत पंडित धनश्याम शास्त्री ने बताया कि यह मंदिर पांच हजार वर्ष पुराना है। प्राचीन समय से जलाभिषेक होने के कारण मूर्तियों का क्षरण भी हो चुका है। पुरातत्व विभाग की टीम भी पूर्व के समय में प्राचीन मूर्तियों का सर्वेक्षण कर चुकी है।
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