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शहर में संगीत के माध्यम से योग

Sun, 14 Jun 2015 02:24 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा Updated Sun, 14 Jun 2015 02:24 AM IST
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yoga in city

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केशव तलेगांवकर ने बताया कि ‘नाद योग’ के प्रणेता भगवान शिव हैं। इस योग में ओमकार और मंत्रोच्चारण होता है। पहले तीन स्वरों उद्दात, अनुद्दात और स्वरित में वैदिक मंत्र बोले जाते थे। उनका प्रभाव पड़ता था। योग शरीर को स्वस्थ रखने के लिए तो नाद योग मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है। स्वास्थ्य लाभ के साथ वर्तमान पीढ़ी ओमकार और वैदिक मंत्रों का सही उच्चारण करना सीखेगी। उन्होंने बताया कि एक हफ्ते से दर्जन भर बच्चे नाद योग सीख रहे हैं। ओमकार ध्वनि के पांच स्वर अकार, आकार, उकार, ईकार, ओकार का अभ्यास कर रहे हैं।
विश्व योग दिवस पर केशव तलेगांवकर ने शहर में किसी जगह प्रशिक्षणार्थियों के साथ नाद योग के प्रदर्शन की योजना बनाई है। जुलाई में वह स्कूलों में संपर्क करके बच्चों को संगीत के माध्यम से योग सिखाने का प्रयास करेंगे। जिससे इसका प्रचार-प्रसार हो सके। उन्होंने बताया कि नाद का संबंध ध्वनि से है। रक्त प्रवाह पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
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