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कपड़ा उद्योग में जीएसटी बढ़ाने का सरकार का फैसला गलत
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आगरा। सरकार की ओर से एक जनवरी 2022 से जीएसटी बढ़ाने की घोषणा से कपड़ा व्यापारी परेशान हैं। उन्होंने इस फैसले को गलत बताया है। व्यापारियों का मानना है कि रेडीमेड कपड़ों पर जीएसटी बढ़ेगा, तो इसका सीधा असर महंगाई पर होगा। कपड़े महंगे होंगे। जीएसटी पांच प्रतिशत रहनी चाहिए।
गारमेंट इंडस्ट्री के व्यापारियों का मानना है कि जीएसटी बढ़ाने से एक हजार रुपये से कम कीमत वाले कपड़े महंगे हो जाएंगे। इसका ब्रांडेड कंपनियों के साथ गैर ब्रांडेड कंपनियों के कपड़ों पर भी असर दिखेगा। व्यापारी मांग कर रहे हैं कि सरकार को फिलहाल यह फैसला वापस लेना चाहिए।
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कपड़े के थोक व्यापारी जगदीश शोभनानी कहना कि सरकार की नीति पूरी तरह से गलत है। सरकार यह जानती है कि व्यापारियों के पिछले दो साल काफी मुश्किल भरे रहे हैं। पहले पांच प्रतिशत जीएसटी से शुरुआत हुई। अब व्यापारियों पर और बोझ लादा जा रहा है। फैसला वापस होना चाहिए।
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रेडीमेड गारमेंट्स संगठन के सचिव अशोक माहेश्वरी का कहना है कि 12 प्रतिशत जीएसटी होने पर एक हजार रुपये का कपड़ा 1120 रुपये का हो जाएगा। माहेश्वरी कहते हैं कि कोरोना के बाद व्यापार अच्छी तरह से चल सके। सरकार को पहले इस दिशा में सोचना चाहिए। जीएसटी नहीं बढ़ना चाहिए।
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लघु उद्योग भारती के प्रदेश सचिव मनीष अग्रवाल का कहना है कि हम प्रदेश सरकार के जीएसटी काउंसिल के माध्यम से केंद्र सरकार से पुराने मानकों पर ही कपड़ा उद्योग को चलाने की मांग रखेंगे। साथ ही इसके लिए जल्द ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से एक प्रतिनिधिमंडल मुलाकात करेगा। इसके लिए समय लेने की कोशिश की जा रही है।
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गारमेंट इंडस्ट्री के व्यापारियों का मानना है कि जीएसटी बढ़ाने से एक हजार रुपये से कम कीमत वाले कपड़े महंगे हो जाएंगे। इसका ब्रांडेड कंपनियों के साथ गैर ब्रांडेड कंपनियों के कपड़ों पर भी असर दिखेगा। व्यापारी मांग कर रहे हैं कि सरकार को फिलहाल यह फैसला वापस लेना चाहिए।
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कपड़े के थोक व्यापारी जगदीश शोभनानी कहना कि सरकार की नीति पूरी तरह से गलत है। सरकार यह जानती है कि व्यापारियों के पिछले दो साल काफी मुश्किल भरे रहे हैं। पहले पांच प्रतिशत जीएसटी से शुरुआत हुई। अब व्यापारियों पर और बोझ लादा जा रहा है। फैसला वापस होना चाहिए।
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रेडीमेड गारमेंट्स संगठन के सचिव अशोक माहेश्वरी का कहना है कि 12 प्रतिशत जीएसटी होने पर एक हजार रुपये का कपड़ा 1120 रुपये का हो जाएगा। माहेश्वरी कहते हैं कि कोरोना के बाद व्यापार अच्छी तरह से चल सके। सरकार को पहले इस दिशा में सोचना चाहिए। जीएसटी नहीं बढ़ना चाहिए।
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लघु उद्योग भारती के प्रदेश सचिव मनीष अग्रवाल का कहना है कि हम प्रदेश सरकार के जीएसटी काउंसिल के माध्यम से केंद्र सरकार से पुराने मानकों पर ही कपड़ा उद्योग को चलाने की मांग रखेंगे। साथ ही इसके लिए जल्द ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से एक प्रतिनिधिमंडल मुलाकात करेगा। इसके लिए समय लेने की कोशिश की जा रही है।
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