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World Heritage Week: बाबर के मकबरे चौबुर्जी के गेट पर लटका दिया ताला
Fri, 20 Nov 2020 11:35 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 20 Nov 2020 11:35 AM IST
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बाबर के मकबरे चौबुर्जी के गेट
- फोटो : अमर उजाला
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हिंदुस्तान में मुगल राज की नींव रखने वाले बादशाह जहीरुद्दीन बाबर के मकबरे चौबुर्जी के गेट पर ताला लगा दिया है। सैलानी इसके अंदर प्रवेश नहीं कर सकते हैं। इसके आसपास कब्जे हो गए हैं।
बाबर ने यहां बगीचा लगवाया था, बाग-ए-जार अफशान। यह मुगल काल का पहला उद्यान था। जो अब नहीं बचा है। कहने के लिए यह संरक्षित स्मारक है लेकिन संरक्षण जैसा कोई काम यहां नहीं हो रहा है।
इतिहासकार राज किशोर शर्मा राजे ने बताया कि चौबुर्जी नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इसमें चार बुर्जी है। 1526 में बाबर जब आगरा आया, तो उसने आराम बाग ( अब रामबाग) और चार बाग (चौबुर्जी) बनवाए थे। चौबुर्जी को 1528 में तैयार कराया था। 1530 में जब उसकी मृत्यु हो गई तो शव को यहीं दफनाया गया।
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ये भी पढ़ें- World Heritage Week: 20 साल में लाडली बेगम के मकबरे का मिट गया वजूद
छह महीने बाद शव को काबुल ले जाकर वहां दफनाया गया। चौबुर्जी के पीछे की तरफ हमाम हुआ करता था, संरक्षण के अभाव इसके अब अवशेष ही बचे हैं। पानी के चार टैंक भी हैं, जिनमें मुगल काल में सुगंधित पानी भरा रहता था। अब बारिश का पानी है, जो गंदा और बदबूदार है।
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बाबर ने यहां बगीचा लगवाया था, बाग-ए-जार अफशान। यह मुगल काल का पहला उद्यान था। जो अब नहीं बचा है। कहने के लिए यह संरक्षित स्मारक है लेकिन संरक्षण जैसा कोई काम यहां नहीं हो रहा है।
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इतिहासकार राज किशोर शर्मा राजे ने बताया कि चौबुर्जी नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इसमें चार बुर्जी है। 1526 में बाबर जब आगरा आया, तो उसने आराम बाग ( अब रामबाग) और चार बाग (चौबुर्जी) बनवाए थे। चौबुर्जी को 1528 में तैयार कराया था। 1530 में जब उसकी मृत्यु हो गई तो शव को यहीं दफनाया गया।
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छह महीने बाद शव को काबुल ले जाकर वहां दफनाया गया। चौबुर्जी के पीछे की तरफ हमाम हुआ करता था, संरक्षण के अभाव इसके अब अवशेष ही बचे हैं। पानी के चार टैंक भी हैं, जिनमें मुगल काल में सुगंधित पानी भरा रहता था। अब बारिश का पानी है, जो गंदा और बदबूदार है।