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वर्ल्ड हैंडलूम डे विशेष : वैश्विक संकट की मार से जूझ रहा सीकरी का मुगलकालीन दरी उद्योग

Fri, 07 Aug 2026 12:32 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2026 12:32 AM IST
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World Handloom Day Special: Sikri's Mughal-era durrie industry grappling with the impact of the global crisis.
फतेहपुर सीकरी में करघा पर दरी बनते बुनकर
फतेहपुर सीकरी। विश्व हैंडलूम दिवस पर देशभर में पारंपरिक हथकरघा उद्योग की चर्चा हो रही है, लेकिन मुगलकालीन नगरी फतेहपुर सीकरी का करीब एक सदी पुराना दरी उद्योग आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। कभी देश-विदेश में अपनी पहचान रखने वाला यह उद्योग अब सिमटकर करीब 20 प्रतिशत रह गया है। निर्यात में गिरावट, मशीन निर्मित उत्पादों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कच्चे माल की बढ़ती लागत और सरकारी योजनाओं का सीमित लाभ मिलने से हजारों बुनकरों और छोटे उद्यमियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
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करीब 100 वर्ष पहले सीकरी में सूत की फर्श दरी बनाने का काम शुरू हुआ था। समय के साथ यह उद्योग चिंदी दरी से आगे बढ़कर सन (जूट) आधारित उत्पादों, बेडशीट, कुशन, बास्केट, बैग, सोफा कवर और अन्य सजावटी वस्तुओं के निर्माण तक पहुंचा। कोरोना महामारी के बाद रूस-यूक्रेन युद्ध और फिर पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव का असर निर्यात आधारित इस उद्योग पर पड़ा। वैश्विक स्तर पर परिवहन लागत बढ़ने, विदेशी ऑर्डर घटने और बाजार में अनिश्चितता के चलते छोटे उद्यमियों ने काम बंद करना शुरू कर दिया।
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महिलाएं भी जुड़ी थीं

दरी उद्योग केवल बुनकरों तक सीमित नहीं है। इस कार्य में बड़ी संख्या में महिलाएं भी जुड़ी हैं। कच्चे माल की कटिंग, धागों की तैयारी, सफाई, फिनिशिंग और पैकिंग जैसे कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उद्योग में आई मंदी का सीधा असर इन महिलाओं की आय पर भी पड़ा है।
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हैंडलूम केवल उत्पाद नहीं, कारीगरों की कला

पांच पीढ़ियों से दरी उद्योग से जुड़े गौरव मित्तल कहते हैं कि हैंडलूम केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि हजारों कारीगरों की कला और मेहनत का प्रतीक है। उनका कहना है कि विदेशों से आज भी हैंडलूम उत्पादों के ही ऑर्डर आते हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम कीमतों में वृद्धि के कारण निर्यात का भाड़ा कई गुना बढ़ गया है। इससे विदेशी खरीदार कम हो गए हैं। उन्होंने सरकार से कच्चे माल पर रियायत, निर्यात प्रोत्साहन और जरूरतमंद बुनकरों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की मांग की।


प्रशिक्षण मिला, लेकिन काम नहीं

हैंडलूम प्रोडक्शन कोऑपरेटिव सोसाइटी के अध्यक्ष हाजी बदरूद्दीन कुरैशी ने बताया कि विभाग की ओर से अनेक बुनकरों को डिजाइन, बुनाई और रंगाई का प्रशिक्षण दिया गया है, लेकिन वर्तमान में काम की भारी कमी के कारण प्रशिक्षित कारीगर भी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
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