{"_id":"5b3da5f34f1c1bad288b4b9f","slug":"work-not-done-on-many-schemes-in-the-agra","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सियासत के साथ योगीजी इस ओर भी दीजिए ध्यान, ये योजनाएं अब भी अधूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सियासत के साथ योगीजी इस ओर भी दीजिए ध्यान, ये योजनाएं अब भी अधूरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Updated Thu, 05 Jul 2018 10:30 AM IST
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सीएम योगी
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई बार आगरा आएं हैं। बड़े-बड़े वादे भी किए हैं, लेकिन शहर की सूरत नहीं बदली है।
कई योजनाएं अधर में हैं तो कुछ ऐसी हैं, जो अभी तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाई हैं। योगी आदित्यनाथ आज फिर शहर में हैं।सियासत की बात होगी, लेकिन जरूरत यह है कि सियासत के साथ शहर की सुध लें योगीजी।
गंगाजल परियोजना
शहर की प्यास बुझाने के लिए गंगाजल की परियोजना 2007 से चल रही है। करीब 2000 करोड़ रुपये खर्च भी हो चुके हैं, लेकिन अभी तक पानी नहीं मिला है। योगी जब-जब आगरा आए उन्होंने कहा कि पानी की समस्या नहीं होने देंगे। गंगाजल कम पड़ा तो चंबल से पानी लाएंगे, लेकिन अभी तक गंगाजल भी नहीं मिल सका है।
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कई योजनाएं अधर में हैं तो कुछ ऐसी हैं, जो अभी तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाई हैं। योगी आदित्यनाथ आज फिर शहर में हैं।सियासत की बात होगी, लेकिन जरूरत यह है कि सियासत के साथ शहर की सुध लें योगीजी।
गंगाजल परियोजना
शहर की प्यास बुझाने के लिए गंगाजल की परियोजना 2007 से चल रही है। करीब 2000 करोड़ रुपये खर्च भी हो चुके हैं, लेकिन अभी तक पानी नहीं मिला है। योगी जब-जब आगरा आए उन्होंने कहा कि पानी की समस्या नहीं होने देंगे। गंगाजल कम पड़ा तो चंबल से पानी लाएंगे, लेकिन अभी तक गंगाजल भी नहीं मिल सका है।
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सिविल एन्क्लेव
शहर में सिविल एन्कलेव के निर्माण के लिए अखिलेश यादव की सरकार में शुरू हुआ था। अखिलेश सरकार में आधा काम हुआ और बंद हो गया। योगी सरकार ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरी कराकर जल्द काम शुरू करने का दावा किया था, लेकिन अभी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। बाउंड्रीवाल तक नहीं बनी है। सिविल एन्क्लेव का काम कब शुरू होगा।
आगरा बैराज
सात मई 2017 को आगरा आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कछपुरा और प्रस्तावित आगरा बैराज स्थल का निरीक्षण किया था।उन्होंने कहा कि तीन महीने के अंदर बैराज निर्माण शुरू हो जाएगा, लेकिन एक वर्ष बीत गया है। अभी तक बैराज की डीपीआर तक स्वीकृत नहीं हो पाई है। केवल कागजी बातेें हो रही हैं और नेता श्रेय लेने में जुटे हैं।
मेट्रो रेल परियोजना
शहर में मेट्रो रेल चलाने की योजना का खाका तो 2007 से खींचा जा रहा है, लेकिन अखिलेश सरकार में इस योजना पर थोड़ा बहुत काम हुआ था। डीपीआर बनी, उसके बाद मामला लटक गया है। योगी सरकार के आने के बाद एक बार फिर प्रक्रिया शुरू हुई। डीपीआर में नए नियमों के तहत संशोधन हुआ, अब डीपीआर केंद्र सरकार के पाले में हैं, लेकिन अभी तक फैसला नहीं हुआ है।
वेस्ट टू एनर्जी प्लांट
आगरा दुनियाभर में खूबसूरत ताजमहल के लिए जाना जाता है, लेकिन गंदगी वजह से शहर की बदनामी होती है। कूड़े के निस्तारण के लिए करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गंदगी साफ नहीं हो पाई। एक कोशिश की जा रही है कि कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट स्थापित हो जाएगा। इस प्लांट के बनने के प्रतिदिन करीब 1500 मीट्रिक टन कूड़ा ठिकाने लग जाएगा। आगरा में प्रतिदिन करीब 800 मीट्रिक टन कूड़ा पैदा होता है। शेष कूड़ा आसपास के शहरों से लिया जाएगा, जिससे उन शहरों कोे भी साफ रखने में मदद मिलेगी, लेकिन यह प्लांट केवल पर्यावरण की एनओसी के लिए अटका है।
शहर में सिविल एन्कलेव के निर्माण के लिए अखिलेश यादव की सरकार में शुरू हुआ था। अखिलेश सरकार में आधा काम हुआ और बंद हो गया। योगी सरकार ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरी कराकर जल्द काम शुरू करने का दावा किया था, लेकिन अभी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। बाउंड्रीवाल तक नहीं बनी है। सिविल एन्क्लेव का काम कब शुरू होगा।
आगरा बैराज
सात मई 2017 को आगरा आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कछपुरा और प्रस्तावित आगरा बैराज स्थल का निरीक्षण किया था।उन्होंने कहा कि तीन महीने के अंदर बैराज निर्माण शुरू हो जाएगा, लेकिन एक वर्ष बीत गया है। अभी तक बैराज की डीपीआर तक स्वीकृत नहीं हो पाई है। केवल कागजी बातेें हो रही हैं और नेता श्रेय लेने में जुटे हैं।
मेट्रो रेल परियोजना
शहर में मेट्रो रेल चलाने की योजना का खाका तो 2007 से खींचा जा रहा है, लेकिन अखिलेश सरकार में इस योजना पर थोड़ा बहुत काम हुआ था। डीपीआर बनी, उसके बाद मामला लटक गया है। योगी सरकार के आने के बाद एक बार फिर प्रक्रिया शुरू हुई। डीपीआर में नए नियमों के तहत संशोधन हुआ, अब डीपीआर केंद्र सरकार के पाले में हैं, लेकिन अभी तक फैसला नहीं हुआ है।
वेस्ट टू एनर्जी प्लांट
आगरा दुनियाभर में खूबसूरत ताजमहल के लिए जाना जाता है, लेकिन गंदगी वजह से शहर की बदनामी होती है। कूड़े के निस्तारण के लिए करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गंदगी साफ नहीं हो पाई। एक कोशिश की जा रही है कि कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट स्थापित हो जाएगा। इस प्लांट के बनने के प्रतिदिन करीब 1500 मीट्रिक टन कूड़ा ठिकाने लग जाएगा। आगरा में प्रतिदिन करीब 800 मीट्रिक टन कूड़ा पैदा होता है। शेष कूड़ा आसपास के शहरों से लिया जाएगा, जिससे उन शहरों कोे भी साफ रखने में मदद मिलेगी, लेकिन यह प्लांट केवल पर्यावरण की एनओसी के लिए अटका है।
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स्मार्ट सिटी योजना
प्रधानमंत्री की स्मार्ट सिटी योजना के तहत आगरा का चयन 2016 में हुआ था, लेकिन दो वर्ष गुजरने के बावजूद अभी तक शहर में कोई बदलाव नहीं हुआ है। योजना में अभी तो टेंडर का दौर चल रहा है। महज एक काम शुरू हुआ है। करीब 272 करोड़ रुपये की योजनाएं भी अधर में है। केवल कागजी खानापूर्ति चल रही है।
इंटरनेशनल स्टेडियम
शहर की जनता की प्रमुख दो मांगे थीं। एक तो इंटरनेशनल एयरपोर्ट और इंटरनेशनल स्टेडियम। इंटरनेशनल एयरपोर्ट तो सिविल एन्क्लेव तक अटक गया और इंटरनेशनल स्टेडियम की ओर किसी का ध्यान नहीं है। स्टेडियम बनें तो न केवल जिले की खेल प्रतिभाओं को मौका मिलेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
हाईकोर्ट की खंडपीठ
आगरा के अधिवक्ता कई वर्षों से खंडपीठ की मांग कर रहे हैं। जस्टिस जसवंत सिंह आयोग की सिफारिश के आधार पर आगरा में खंडपीठ की स्थापना की जानी चाहिए, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों के तरह योगी सरकार भी इस मसले पर खामोश बैठी है।
पर्यटन विकास
शहर के पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बातें बहुत होती हैं, लेकिन अभी तक ऐसी कोई योजना नहीं बनी जो पर्यटकों को शहर में एक रात रुकने के प्रोत्साहित करे। पर्यटक आता है, ताजमहल और किला देखकर लौट जाता है। इससे आगरा कोई लाभ नहीं मिलता है।
प्रधानमंत्री की स्मार्ट सिटी योजना के तहत आगरा का चयन 2016 में हुआ था, लेकिन दो वर्ष गुजरने के बावजूद अभी तक शहर में कोई बदलाव नहीं हुआ है। योजना में अभी तो टेंडर का दौर चल रहा है। महज एक काम शुरू हुआ है। करीब 272 करोड़ रुपये की योजनाएं भी अधर में है। केवल कागजी खानापूर्ति चल रही है।
इंटरनेशनल स्टेडियम
शहर की जनता की प्रमुख दो मांगे थीं। एक तो इंटरनेशनल एयरपोर्ट और इंटरनेशनल स्टेडियम। इंटरनेशनल एयरपोर्ट तो सिविल एन्क्लेव तक अटक गया और इंटरनेशनल स्टेडियम की ओर किसी का ध्यान नहीं है। स्टेडियम बनें तो न केवल जिले की खेल प्रतिभाओं को मौका मिलेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
हाईकोर्ट की खंडपीठ
आगरा के अधिवक्ता कई वर्षों से खंडपीठ की मांग कर रहे हैं। जस्टिस जसवंत सिंह आयोग की सिफारिश के आधार पर आगरा में खंडपीठ की स्थापना की जानी चाहिए, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों के तरह योगी सरकार भी इस मसले पर खामोश बैठी है।
पर्यटन विकास
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