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सामूहिक विवाह समारोह में बाल विवाहः महिला आयोग ने लिया संज्ञान, डीएम को लिखा पत्र
Tue, 12 Nov 2019 05:09 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 12 Nov 2019 05:09 PM IST
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आगरा में विगत देवोत्थान के मौके पर जीआईसी मैदान में हुए सामूहिक विवाह समारोह में हुए बाल विवाह पर महिला आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग की सदस्य निर्मला दीक्षित ने डीएम को पत्र जारी कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं साथ ही इस तरह की पुनरावृत्ति न हो इसलिए बाल विवाह रोकने के लिए टॉस्क फोर्स गठित करने के आदेश दिए हैं।
गौरतलब है कि विगत आठ नवंबर को जीआईसी मैदान में विश्व सेवा चेरिटेबल फाउंडेशन द्वारा सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया गया था। जिसमें कुछ नाबालिगों का भी विवाह कराया गया।
चाइल्ड लाइन और महफूज सुरक्षित बचपन की संयुक्त टीम ने दस्तावेजों की पड़ताल में चार लड़कियां 18 वर्ष से कम और दो युवकों की उम्र 21 वर्ष से कम पाई। दो लड़कियों की उम्र संदिग्ध पाई गई जिनकी उम्र के दस्तावेज नहीं थे। एक में उम्र के लिए नोटरी और दूसरे में वर्ष 2015 का राशन कार्ड लगाया गया था।
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गौरतलब है कि विगत आठ नवंबर को जीआईसी मैदान में विश्व सेवा चेरिटेबल फाउंडेशन द्वारा सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया गया था। जिसमें कुछ नाबालिगों का भी विवाह कराया गया।
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चाइल्ड लाइन और महफूज सुरक्षित बचपन की संयुक्त टीम ने दस्तावेजों की पड़ताल में चार लड़कियां 18 वर्ष से कम और दो युवकों की उम्र 21 वर्ष से कम पाई। दो लड़कियों की उम्र संदिग्ध पाई गई जिनकी उम्र के दस्तावेज नहीं थे। एक में उम्र के लिए नोटरी और दूसरे में वर्ष 2015 का राशन कार्ड लगाया गया था।
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उम्र के लिए केवल आधार कार्ड, राशन कार्ड और नोटरी थे जबकि इनमें से किसी भी दस्तावेज को उम्र की पहचान के लिए मान्यता नहीं दी गई है। आधार कार्ड में अंकित जन्मतिथि के अनुसार भी ये नाबालिग हैं।
चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट एवं महफूज सुरक्षित बचपन संस्था के समन्वयक नरेश पारस ने इस संबंध में राज्य महिला आयोग की सदस्य निर्मला दीक्षित से मुलाकात कर सामूहिक विवाह में हुए बाल विवाह की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनपद में बड़े पैमान पर बाल विवाह होते हैं।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक आज भी जिले में 21 फीसदी बाल विवाह होते हैं। इनकी रोकथाम बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए टॉस्क फोर्स का होना बहुत जरूरी है।
चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट एवं महफूज सुरक्षित बचपन संस्था के समन्वयक नरेश पारस ने इस संबंध में राज्य महिला आयोग की सदस्य निर्मला दीक्षित से मुलाकात कर सामूहिक विवाह में हुए बाल विवाह की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनपद में बड़े पैमान पर बाल विवाह होते हैं।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक आज भी जिले में 21 फीसदी बाल विवाह होते हैं। इनकी रोकथाम बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए टॉस्क फोर्स का होना बहुत जरूरी है।
महिला आयोग की सदस्य निर्मला दीक्षित ने इसका संज्ञान लेते हुए डीएम को पत्र जारी कर सामूहिक विवाह समारोह में हुए बाल विवाह के मामले में चाइल्ड मैरिज, जेजे और पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई के निर्देश जारी किए। साथ ही आदेश जारी किए कोई भी सरकारी अथवा गैर सरकारी संस्था सामूहिक विवाह कराती है तो उससे पूर्व वर-वधू की उम्र संबंधी दस्तावेज जिला मुख्यालय में उपलब्ध कराएं।
उसके बाद ही सामूहिक विवाह के आयोजन की अनुमति मिलेगी। बाल विवाह रोकने के लिए टॉस्क फोर्स के गठन के भी आदेश दिए हैं। इसके लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी हो भी उन्होंने पत्र दिया है।
उसके बाद ही सामूहिक विवाह के आयोजन की अनुमति मिलेगी। बाल विवाह रोकने के लिए टॉस्क फोर्स के गठन के भी आदेश दिए हैं। इसके लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी हो भी उन्होंने पत्र दिया है।