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UP: जिला अस्पताल से जिस महिला ने चुराया था बच्चा, उसे 7 साल की सजा; 20 हजार का जुर्माना भी देना पड़ेगा

Sat, 07 Jun 2025 01:32 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 07 Jun 2025 01:32 PM IST
सार

मैनपुरी के जिला अस्पताल में  8 सितंबर 2019 को एक बच्चे का अपहरण कर लिया गया था। इस मामले की दोषी महिला को सात साल की सजा सुनाई गई है। 
 

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woman stole child from district hospital was sentenced to seven years' imprisonment
महिला सांकेतिक - फोटो : ai

विस्तार

मैनपुरी जिला अस्पताल के पोषण वार्ड से 8 सितंबर 2019 को एक साल के बच्चे का अपहरण करने वाली महिला को जिला जज पंकज कुमार अग्रवाल की कोर्ट से सात साल कैद की सजा सुनाई गई है। साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस जुर्माना राशि में से 25 फीसदी धनराशि मुकदमा वादी को अदा किए जाने का भी आदेश कोर्ट ने पारित किया है। इधर, महिला के पुरुष साथी का आज तक सुराग नहीं लगा है। उसके खिलाफ स्थायी वारंट जारी करते हुए भगोड़ा करार दिया गया है।
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थाना घिरोर क्षेत्र के नगला रगी निवासी संदीप यादव का एक वर्ष के पुत्र आशीष को खुजली की समस्या हो गई थी। 6 सितंबर 2019 की दोपहर उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल के पोषण वार्ड में भर्ती कराया गया था। वहां उसका उपचार चल रहा था। बच्चे की देखभाल के लिए मौजूद दादी विमला देवी की 8 सितंबर की सुबह पांच बजे करीब आंख लग गई थी। इसी बीच बच्चा चोरी कर लिया गया। विमला देवी की आंख खुली तो आशीष को बेड पर नहीं पाया। वह बदहवास होकर बच्चे को आसपास के वार्ड में ढूंढने लगीं।

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सीएमएस ने तत्कालीन एसपी अजय शंकर राय को बच्चा चोरी होने की जानकारी दी। पुलिस अधीक्षक ने तुरंत ही जिलेभर में अलर्ट घोषित कर दिया। तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश सिंह को बच्चा बरामदगी के ऑपरेशन की कमान सौंपी गई। बच्चे की खोजबीन के लिए शहर में 20 से अधिक पुलिस टीमों को लगाया गया था। करीब डेढ़ घंटे बाद पीआरवी ने करहल चौराहे के पास से बच्चा सहित महिला को गिरफ्तार किया। महिला की पहचान मंजू उर्फ उषा उर्फ प्रियंका पत्नी बबलू उर्फ शैलेंद्र जाटव निवासी अग्रवाल मोहल्ला, शहर कोतवाली के तौर पर हुई थी।

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महिला ने पुलिस को बताया था कि उसे रवि नाम के व्यक्ति ने बच्चा चोरी करने के बाद सौंपा था। बच्चे को बेचकर आर्थिक लाभ कमाने का उद्देश्य था। पुलिस ने रवि की काफी तलाश की। मगर, वह कभी हाथ नहीं लगा। इधर, मंजू को पुलिस ने जेल भेज दिया था। बच्चे की दादी विमला देवी ने केस दर्ज कराया था। जिला जज की कोर्ट में अभियोजन की ओर से पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने साक्ष्य व गवाहों को पेश किया। बच्चा चोरी के समय का सीसीटीवी फुटेज मुख्य साक्ष्य रहा। कोर्ट ने साक्ष्यों व गवाही के आधार पर मंजू को दोषी करार देते हुए सात साल कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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