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फरियादी की करुण पुकार: डीएम साहब...मुझे लौटा दो मेरी 'कायनात', आठ साल जिगर के टुकड़े की तरह पाला है

Tue, 04 Jul 2023 01:54 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Tue, 04 Jul 2023 01:54 PM IST
सार

आगरा में एक महिला फरियादी ने डीएम से बच्ची को वापस दिलाने की गुहार लगाई है। कहा कि डीएम साहब...मुझे लौटा दो मेरी 'कायनात'। मैंने आठ साल तक जिगर के टुकड़े की तरह उसे पाला है। 

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woman pleaded with DM to get her daughter back from eunuch In Agra
आगरा कलेक्ट्रेट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डीएम साहब, मेरी 'कायनात' मुझे लौटा दो। उसके बिना मन नहीं लगता। उसे आठ साल पाला। हैसियत से बड़े स्कूल में दाखिला कराया। मुझसे बाल समिति ने मेरी कायनात छीन ली। 11 महीने से बेटी बालगृह में है। ये कहते हुए मीना सोमवार को आगरा में कलेक्ट्रेट में डीएम नवनीत सिंह चहल के सामने फूट-फूटकर रोई।

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कलेक्ट्रेट में जिसने भी सोमवार को यह नजारा देखा, भावुक हो उठा। टेढ़ी बगिया, नंदलालपुर निवासी मीना ने बताया कि 28 नवंबर 2014 की बात है। सुबह पांच बजे एक किन्नर घर के दरवाजे पर तीन माह की बच्ची छोड़ने लगी। मैंने मना किया तो किन्नर बोली, यह बचेगी नहीं, रखना है तो रखो...वरना फेंक दो। मेरे तीन बच्चे हैं। पति अरमान, देवी जागरण करते हैं। वो बोले ये देवी का रूप है। इसे रख लो। हमने उसका नाम कायनात रखा। आठ साल उसे जिगर के टुकड़े की तरह पाला।
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आगरा कलेक्ट्रेट - फोटो : अमर उजाला

फिर एक दिन 2021 में किन्नर दोबारा आई। बेटी को देख उसकी नीयत खराब हो गई। बेटी को चुरा ले गई। पुलिस में शिकायत की, तो फर्रुखाबाद में किन्नर के घर में अक्तूबर 2021 को बेटी पाई गई। बाल कल्याण समिति ने 22 दिसंबर 2021 को मुझे बेटी सौंप दी। मैं हर 15-15 दिन बाद उसे लेकर समिति को दिखाने जाती थी। किन्नर को यह रास न आया।

उसकी शिकायत पर बाल समिति ने 17 अगस्त 2022 को मेरी बेटी मुझसे यह कहते हुए छीन ली कि तुम उसकी अच्छी शिक्षा व पालन-पोषण नहीं कर सकती। 11 महीने से मेरी बेटी बालगृह में है। वहां वह रो-रोकर परेशान है। इसे मैंने आठ साल पाला, क्या उसे अब मैं नहीं पाल सकती। जिसे मैंने बड़े स्कूल में पढ़ाया, क्या उसे बाल समिति वहां पढ़ा सकती है।

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बच्ची के हित में लेंगे निर्णय

बच्ची की मां मुझसे आकर मिली थी। उन्होंने अपनी बात बताई है। बेटी के जो हित में होगा वह निर्णय लेंगे। जहां बेहतर देखभाल हो, वहां बच्ची रहेगी। मैं डीपीओ व समिति से बात करता हूं। -नवनीत सिंह चहल, जिलाधिकारी

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मनोदशा पर पड़ेगा असर

जेजे एक्ट में पांच साल तक किसी बच्चे को अगर कोई पालता है तो वह उसके पालन का अधिकारी होता है। बालगृह में बच्ची की मनोदशा पर खराब असर पड़ेगा। बच्ची के हित में उसे जिन्होंने पाला है, उन्हें सौंप देना चाहिए। -नरेश पारस, बाल अधिकार कार्यकर्ता

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