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Muharram 2024: मुहर्रम पर शिया औरतें उतार देंगी सुहाग की निशानियां, दो महीने आठ दिन तक चलता है मातम
Mon, 08 Jul 2024 02:50 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 08 Jul 2024 02:50 PM IST
सार
Muharram 2024: इस्लाम धर्म में मुहर्रम का महीना मुसलमानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। खासकर शिया मुस्लिम समुदाय इसे गम के महीने के तौर पर मनाता है। यही वजह है कि मुहर्रम का चांद दिखाई देते ही सभी शिया समुदाय के लोग गम में डूब जाते हैं। शिया महिलाएं और लड़कियां चांद निकलने के साथ ही अपने हाथों की चूड़ियों को तोड़ देती हैं। इतना ही नहीं वे सभी श्रृंगार की चीजों से भी पूरे 2 महीने 8 दिन के लिए दूरी बना लेती हैं।
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मुहर्रम 2024
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा में मोहर्रम का चांद नजर आने के बाद रविवार की शाम को शिया इमामबाड़ों में अलम सजाकर फर्श-ए-अजा बिछा दिए गए। इसके साथ ही मजलिसों का सिलसिला भी शुरू हो गया। शिया समुदाय के लोगों ने रंग-बिरंगे कपड़े त्यागकर काले लिबास धारण कर लिए। महिलाओं ने भी काले लिबास पहनने के साथ जेवरात उतारकर रख दिए।
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हजरत इमाम हुसैन और उनके परिजन की कुर्बानियों का जिक्र मजलिसों में मौलानाओं ने शुरू कर दिया। अंजुमन-ए-पंजेतनी के अमीर अहमद एडवोकेट ने बताया कि शिया समुदाय में मुहर्रम का मातम दो माह 8 दिन तक चलता है। इस दौरान निकाह और अन्य खुशी के आयोजन नहीं होंगे। सभी इमामबाड़ों में मुस्लिम विद्वान कर्बला की जंग और हजरत इमाम हुसैन की याद में अपनी तकरीर करेंगे।
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दूसरी ओर, कटरा दबकैय्यान स्थित फूलों के ताजिया के इमामबाड़े में फातिहा पढ़ी गई। मुहर्रम की सातवीं तारीख को यहां ऐतिहासिक फूलों का ताजिया रखा जाएगा। तीन दिन तक इसकी जियारत करनेके लिए दूरदराज से लोग पहुंचेंगे।
हिंदुस्तानी बिरादरी के सदर डॉ. सिराज कुरैशी नेबताया कि मंटोला सहित अन्य स्थानों पर भी मजलिसों का आयोजन किया जाएगा। इनमें मौैलाना कर्बला की जंग पर रोशनी डालेंगे। मुहर्रम की पांचवीं तारीख से घरों में भी ताजिये रखे जाते हैं। इसके लिए ताजिये बनाने का काम चल रहा है। कई लोग ताबूत की जियारत भी करते हैं। डाॅ. कुरैशी ने प्रशासन से मांग की है कि न्यू आगरा, पचकुइयां और सराय ख्वाजा कर्बलाओं में व्यवस्थाएं कराए जाने की मांग की है।