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कोरोना काल में भी नहीं डिगी आस्था
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जैन मुनि जैन मुनि विशोक महाराज
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। कोरोना काल में परिस्थितियां जरूर बदली हैं, लेकिन जैन समाज के लोगों का श्रद्धाभाव नहीं कम हुआ। संक्रमण के खतरे के चलते धार्मिक आयोजन नहीं हो रहे हैं, लेकिन समाज के लोग नियम, व्रत आदि भक्ति भक्तिभाव पूर्वक कर रहे हैं। चार्तुमास में मैनपुरी पहुंचे आचार्य विशोक सागर जी महाराज मौन व्रत के चलते समाज के लोगों को लिखकर प्रवचन दे रहे हैं।
सामाजिक दूरी के चलते जैन अनुयायी आचार्य के दर्शन नहीं पा रहे हैं, लेकिन उनके विचारों को जीवन में शामिल कर रहे हैं। चार्तुमास के लिए आचार्य विशोक सागर जी महाराज 28 जून को मैनपुरी आए थे। लॉकडाउन के चलते वह करहल रोड स्थित बड़ा जैन मंदिर के संत निवास में ही रुक गए। 23 अगस्त को उन्होंने मौन व्रत ले लिया। मौन व्रत के चलते आचार्य चार्तुमास में प्रवचन नहीं कर रहे हैं।
कोरोना काल में सामाजिक दूरी और सरकार की गाइडलाइन के चलते आचार्य विशोक महाराज के समाज के लोग दर्शन नहीं कर पा रहे हैं। संत निवास में समाज के लोग पहुंच नहीं पा रहे हैं। आचार्य की आहार क्रिया के दौरान ही उनके दर्शन हो जाते हैं। कोरोना काल में भी जैन समाज की आस्था डिगी नहीं है।
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अरुण जैन, छपट्टी
चार्तुमास में दश लक्षण पर्व जैन समाज के लिए महत्वपूर्ण है। 12 साल बाद चार्तुमास करने के लिए आचार्य पहुंचे हैं। आचार्य आमने सामने प्रवचन तो नहीं दे रहे, लेकिन वह समाज के लोगों को धर्म के प्रति आस्थावान बनाने के लिए लिखकर प्रवचन दे रहे हैं। परिस्थितियां बदली हैं, लेकिन श्रद्धाभाव वही है।
प्रमोद जैन, करहल रोड
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सामाजिक दूरी के चलते जैन अनुयायी आचार्य के दर्शन नहीं पा रहे हैं, लेकिन उनके विचारों को जीवन में शामिल कर रहे हैं। चार्तुमास के लिए आचार्य विशोक सागर जी महाराज 28 जून को मैनपुरी आए थे। लॉकडाउन के चलते वह करहल रोड स्थित बड़ा जैन मंदिर के संत निवास में ही रुक गए। 23 अगस्त को उन्होंने मौन व्रत ले लिया। मौन व्रत के चलते आचार्य चार्तुमास में प्रवचन नहीं कर रहे हैं।
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कोरोना काल में सामाजिक दूरी और सरकार की गाइडलाइन के चलते आचार्य विशोक महाराज के समाज के लोग दर्शन नहीं कर पा रहे हैं। संत निवास में समाज के लोग पहुंच नहीं पा रहे हैं। आचार्य की आहार क्रिया के दौरान ही उनके दर्शन हो जाते हैं। कोरोना काल में भी जैन समाज की आस्था डिगी नहीं है।
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अरुण जैन, छपट्टी
चार्तुमास में दश लक्षण पर्व जैन समाज के लिए महत्वपूर्ण है। 12 साल बाद चार्तुमास करने के लिए आचार्य पहुंचे हैं। आचार्य आमने सामने प्रवचन तो नहीं दे रहे, लेकिन वह समाज के लोगों को धर्म के प्रति आस्थावान बनाने के लिए लिखकर प्रवचन दे रहे हैं। परिस्थितियां बदली हैं, लेकिन श्रद्धाभाव वही है।
प्रमोद जैन, करहल रोड