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बिछे जो राह में कांटे उठाना हमने सीखा है...
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31एमएनपी-18-होली पब्लिक स्कूल में आयोजित काव्य गोष्ठी में काव्यपाठ करते कवि
- फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। कवि एवं साहित्यकारों के सम्मान एवं स्मरण की शृंखला में होली पब्लिक स्कूल में मंगलवार देरशाम काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। श्याम सुंदर श्याम के जन्म दिवस पर आयोजित काव्य गोष्ठी में अरविंद कुमार पाल ने ‘बिछे जो राह में कांटे उठाना हमने सीखा है, तुम्हारे दर्द से सीना लगाना हमने सीखा है...’ कविता सुनाकर समा बांध दिया।
आयोजक विनोद माहेश्वरी ने बताया श्याम जी श्याम का जन्म मार्च 1916 में हुआ था। उनकी रचनाएं राष्ट्र्रीय चिंताओं और राष्ट्र निर्माण के प्रति समार्पित हैं। गोष्ठी में कृष्ण मिश्र ने ‘नॉय नॉय कर भजाति है खुद पकराई देन, मुंह गुलाल मिडबयबे अघरन को रसलेन।’ धर्मेंद्र सिंह धरम ने ‘आओ आज मिलें सब होली। जाति-पात को मार के गोली।’ अनिलमान मिश्र ने ‘अब भरोसे की नहीं होली की मौज, क्या पता किस हाथ में कैसा गुलाल है।’ सुनाई।
वहीं मनोज कुमार सक्सेना ने ‘कल्लू, धनिया, गिल्लू, पिंकी सब एक दूजे के हम जोली।’ प्रबोध भदौरिया ने ‘गुटबंदी ना आत है न करने की है चाह।’ राजकिशोर प्रजापति ने ‘आज किसानों पर भी देखो कितनी विपदा भारी है, जबकि देश के भोजन की भी इन पर जिम्मेदारी है।’ गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसी क्रम में उपेंद्र भोला ने ‘मिले जो नैन नैनों से मानो सिंगार हो जाए।’ शिवसिंह निसंकोच ने ‘प्रेम के रंग में रंग जाओ तो समझो होली है।’ यश कुमार मिश्रा ने ‘भौजी यौवन पे आय गओ बसंत होरी खेलो न।’ श्रीचंद्र वर्मा ने ‘होली हंसी हंसी जलती।’ आदि कविताएं सुनाईं।
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बिजेंद्र सिंह, ओमप्रकाश वर्मा,, वासुदेव लालबत्ती ने भी काव्यपाठ किया। इससे पूर्व अतिथियों ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का आगाज किया। श्रीचंद्र सरगम, नवाब सिंह राजपूत, बालकराम राठौर, शिशुपाल सिंह चौहान, संजय दुबे, रामप्रकाश पांडेय, रघुनंदन लाल पाठक, राजीव नागर, अभय शर्मा, अनुराग दुबे, ज्ञानेंद्र दीक्षित, उमेशचंद्र दुबे, विद्यासागर शर्मा, आयुष सक्सेना, श्रीकृष्ण मौर्य, विनोद माहेश्वरी, राजेंद्र तिवारी, शिवराम सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।
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आयोजक विनोद माहेश्वरी ने बताया श्याम जी श्याम का जन्म मार्च 1916 में हुआ था। उनकी रचनाएं राष्ट्र्रीय चिंताओं और राष्ट्र निर्माण के प्रति समार्पित हैं। गोष्ठी में कृष्ण मिश्र ने ‘नॉय नॉय कर भजाति है खुद पकराई देन, मुंह गुलाल मिडबयबे अघरन को रसलेन।’ धर्मेंद्र सिंह धरम ने ‘आओ आज मिलें सब होली। जाति-पात को मार के गोली।’ अनिलमान मिश्र ने ‘अब भरोसे की नहीं होली की मौज, क्या पता किस हाथ में कैसा गुलाल है।’ सुनाई।
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वहीं मनोज कुमार सक्सेना ने ‘कल्लू, धनिया, गिल्लू, पिंकी सब एक दूजे के हम जोली।’ प्रबोध भदौरिया ने ‘गुटबंदी ना आत है न करने की है चाह।’ राजकिशोर प्रजापति ने ‘आज किसानों पर भी देखो कितनी विपदा भारी है, जबकि देश के भोजन की भी इन पर जिम्मेदारी है।’ गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसी क्रम में उपेंद्र भोला ने ‘मिले जो नैन नैनों से मानो सिंगार हो जाए।’ शिवसिंह निसंकोच ने ‘प्रेम के रंग में रंग जाओ तो समझो होली है।’ यश कुमार मिश्रा ने ‘भौजी यौवन पे आय गओ बसंत होरी खेलो न।’ श्रीचंद्र वर्मा ने ‘होली हंसी हंसी जलती।’ आदि कविताएं सुनाईं।
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बिजेंद्र सिंह, ओमप्रकाश वर्मा,, वासुदेव लालबत्ती ने भी काव्यपाठ किया। इससे पूर्व अतिथियों ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का आगाज किया। श्रीचंद्र सरगम, नवाब सिंह राजपूत, बालकराम राठौर, शिशुपाल सिंह चौहान, संजय दुबे, रामप्रकाश पांडेय, रघुनंदन लाल पाठक, राजीव नागर, अभय शर्मा, अनुराग दुबे, ज्ञानेंद्र दीक्षित, उमेशचंद्र दुबे, विद्यासागर शर्मा, आयुष सक्सेना, श्रीकृष्ण मौर्य, विनोद माहेश्वरी, राजेंद्र तिवारी, शिवराम सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।