पाताल में पहुंचा पानी : आगरा में एक साल में 40 फीट तक नीचे चला गया भू- जलस्तर
सबमर्सिबल पंप से पानी के जबरदस्त दोहन के चलते ताजनगरी में पानी पाताल में पहुंच गया। पहली बार एक साल के अंदर 40 फीट की चौंकाने वाली गिरावट दर्ज की गई है।
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आगरा में भूगर्भ जल विभाग ने जून में मानसून से पहले पीजोमीटर से भूगर्भ जलस्तर की जांच की तो अप्रत्याशित नतीजे सामने आए। शाहगंज क्षेत्र के अमरपुरा में 40 फीट जलस्तर महज एक साल के अंदर गिर गया, जबकि सैंया और कुकथला क्षेत्र में 30 फीट से ज्यादा जलस्तर नीचे चला गया। फतेहाबाद रोड पर कलाल खेरिया, तोरा क्षेत्र में भी 30 फीट तक की गिरावट भूगर्भ जलस्तर में आई है।
बारिश का पानी सहेजने की जगह बर्बाद करने का दुष्परिणाम सामने है। शहर में 55 फीसदी क्षेत्र में जलकल विभाग की पाइपलाइन नहीं है। ऐसे में 55 फीसदी शहर भूगर्भ जल पर ही निर्भर है। सबमर्सिबल पंप के जरिए भूगर्भ जल निकासी बड़े पैमाने पर हो रही है।
इसका असर भूगर्भ जल स्तर में जबरदस्त गिरावट के रूप में नजर आया। भूगर्भ जल विभाग ने प्री-मानसून 2021 की रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें शहर से लेकर देहात तक भूगर्भ जल स्तर में 40 फीट तक की गिरावट है। शहर में 3 से 10 मीटर यानी 10 फीट से 30 फीट तक अधिकांश जगहों पर भूगर्भ जल नीचे उतरा है।
60 हजार सबमर्सिबल पंपों की री-बोरिंग
एक साल में भूगर्भ जल स्तर पाताल में पहुंचने से सबमर्सिबल पंपों की री-बोरिंग करानी पड़ रही है। अमरपुरा क्षेत्र के नजदीक आजमपाड़ा, बालाजीपुरम, अलबतिया, विनय नगर, श्याम नगर, मारुति एस्टेट, सुभाष नगर, कमला नगर, अमर विहार, फतेहाबाद रोड की कालोनियों, शास्त्रीपुरम में सबमर्सिबल पंप की पुरानी बोरिंग सूख गई।
इस वजह से लोगों को पानी के लिए नई बोरिंग करानी पड़ रही हैं। नई बोरिंग 300 से 350 फीट गहराई में हो रही हैं, जिनके लिए 2 से 3 किलोवाट क्षमता की 12 स्टेज सबमर्सिबल पंप ही कारगर है। ऐसे 60 हजार से ज्यादा सबमर्सिबल पंप मई-जून के महीने में री-बोर कराने पड़े हैं।
इन जगहों पर ज्यादा गिरावट आई
जगह - वर्ष 2020 - वर्ष 2021
अमरपुरा - 31 - 44.39 मीटर
तोरा - 28 - 38.01 मीटर
कमला नगर - 27 - 32.02 मीटर
नगला परसोती - 27 - 31.41 मीटर
नगला हरसुख - 45.8 - 50.7 मीटर
पनौता - 44 - 54.29 मीटर
धौर्रा - 45 - 50.37 मीटर
कुकथला - 5.75 - 15.00 मीटर
खेरागढ़ - 22.48 - 29.77 मीटर
कुकंडई - 28.31 - 32.35 मीटर
ब्लॉक वर्ष - 2020 - वर्ष 2021
अछनेरा - 9.61 - 10.75
जैतपुर कलां - 33.4 - 34.2
खंदौली - 46 - 50.37
खेरागढ़ - 22.4 - 29.7
जगनेर - 16.8 - 17.2
सैंया - 39.6 - 40.5
फतेहाबाद - 45 - 46.5
फतेहपुर सीकरी - 17.4 - 17.2
पिनाहट - 38.4 - 37.9
अकोला - 30 - 29.72
बाह - 36.33 - 36.06
अकोला - 30.2 - 29.7
बरौली अहीर - 25.1 - 21.9
शमशाबाद - 45.08 - 43.5
(सभी आंकड़े मीटर में हैं)
मनमाने ढंग से दोहन
भूगर्भजल विज्ञानी रविकांत ने बताया कि भूगर्भ जल का मनमाने ढंग से दोहन किया जा रहा है, लेकिन रेन वाटर हार्वेस्टिंग उस अनुपात में नहीं की जा रही है। जहां जहां तालाब, खेत में पानी रोका गया है, वहां जलस्तर में सुधार आ रहा है। कम से कम गिरावट है, लेकिन नवविकसित क्षेत्रों में पानी जमीन से ज्यादा निकाला जा रहा है। बारिश का पानी हर हाल में भूगर्भ में पहुंचाने का प्रयास हो, तभी सुधार आएगा।