उत्तराखंड में बादल फटने का आगरा में भी असर: गंगाजल में बढ़ी सिल्ट, सफाई में आई मुश्किल
उत्तराखंड में बादल फटने के कारण गंगाजल में मिट्टी और सिल्ट की मात्रा 20 गुना तक बढ़ गई। दो दिन से बुलंद शहर के पालड़ा फॉल से आगरा और मथुरा को मटमैला गंगाजल मिल रहा है
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तराखंड में बादल फटने के कारण गंगाजल में मिट्टी और सिल्ट की मात्रा 20 गुना तक बढ़ गई। दो दिन से बुलंद शहर के पालड़ा फॉल से आगरा और मथुरा को मटमैला गंगाजल मिल रहा है, जिसके शोधन में सिकंदरा और जीवनी मंडी वाटरवर्क्स में परेशानी आ रही है। शोधन के बाद भी जीवनी मंडी और सिकंदरा वाटररवर्क्स से जो गंगाजल सप्लाई किया गया, उसमें मिट्टी की मात्रा बनी हुई है। जलकल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक शनिवार शाम तक गंगाजल की गुणवत्ता में सुधार आने लगेगा। तब शोधन के बाद मिट्टी नहीं रहेगी।
परशुराम जयंती, अक्षय तृतीया और ईद के त्योहार पर शहर में मटमैले पानी की आपूर्ति हुई। इसकी वजह से लोग परेशान हो गए। जीवनी मंडी और सिकंदरा वाटरवर्क्स से जुड़े इलाकों में शोधन के बाद भी मटमैला पानी मिला, हालांकि जो गंगाजल आगरा को मिल रहा है, वह सामान्य से 20 गुना ज्यादा सिल्ट और मिट्टी लेकर पहुंच रहा है। इससे वाटरवर्क्स के प्लांट का संचालन तक मुश्किल हो गया।
आम दिनों में गंगाजल में टर्बिडिटी 110 पीपीएम तक रहती है, लेकिन दो दिन से यह 1900 पीपीएम तक पहुंच गई। नीला साफ दिखने वाला गंगाजल मटमैला और यमुना जल से भी काला नजर आ रहा है। यह स्थिति नवंबर में भी 5 दिन तक बनी थी, जब उत्तराखंड में बादल फटने की घटना हुई थी। इस बार भी बादल फटने के बाद पहाड़ों से मलबा और मिट्टी गंगाजल में पालड़ा फॉल तक आ गई, जो जलापूर्ति में नजर आ रही है।
शुक्रवार सुबह जीवनी मंडी वाटरवर्क्स से जब पानी की आपूर्ति हुई तो पीपल मंडी, काला महल, छीपीटोला, बेलनगंज, मंटोला, छत्ता, यमुना किनारा, बालूगंज, गुदड़ी मंसूर खां आदि इलाकों में लोग अपने घर में गंदा पानी देखकर परेशान हो गए। पहले तो लोगों को लगा कि कहीं लीकेज के कारण गंदा पानी आया है, पर लगातार दो घंटे तक जब गंदा पानी पूरे क्षेत्र में आया तो उन्होंने शिकायत की। पीपलमंडी, कालामहल के लोगों ने पार्षद रवि माथुर से संपर्क किया। पार्षद रवि माथुर ने जलकल विभाग के कर्मचारियों से बात की, तब पता चला कि वाटर वर्क्स से ही गंदा पानी आ रहा है।
शनिवार शाम से साफ पानी मिलने की उम्मीद
जलकल विभाग के महाप्रबंधक आरएस यादव ने बताया कि उत्तराखंड में बादल फटने की घटना का यह असर है। गंगा नदी में पालड़ा तक गंदा पानी आया, जिससे वाटरवर्क्स को जो पानी मिल रहा है, वह 20 गुना ज्यादा मटमैला है। इसका शोधन किया जा रहा है। ज्यादा रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, अन्यथा लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। तय सीमा तक ही रसायन इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए थोड़ा मटमैला पानी सप्लाई हो रहा है, जो बाल्टी में थोड़ी देर रखने पर साफ हो जा रहा है। जिस तेजी से पानी में सिल्ट कम हो रही है, उससे उम्मीद है कि शनिवार शाम तक गंगाजल में मिट्टी काफी कम हो जाएगी। साफ पानी मिलने लगेगा।
ये भी पढ़ें: मथुरा में कोरोना का प्रकोप: संक्रमण से पांच की मौत, 474 नए पॉजिटिव केस, जानिए कहां मिले नए मरीज
ये भी पढ़ें: अस्पताल के मनमाने बिल की करें शिकायत: 24 घंटे में समाधान, आईएमए का हेल्पलाइन नंबर जारी, शिकायत प्रकोष्ठ बनाया