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दयालबाग की सात कालोनियों के अध्यक्षों के खिलाफ वारंट
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा
Updated Tue, 13 Oct 2015 01:50 AM IST
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यमुना नदी में प्रदूषित करने को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा जारी नोटिस का जवाब न देना दयालबाग क्षेत्र की सात आवासीय कालोनियों के रेजीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) अध्यक्षों को भारी पड़ गया। इनके ट्रिब्युनल के समक्ष हाजिर न होने पर जमानती वारंट जारी किया है। एनजीटी ने सभी से दो हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। ग्रीन पैनल ने कहा कि वह इस मामले की लगातार 4 से 6 नवंबर तक सुनवाई करेगा।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई की। बता दें, पिछली सुनवाई मेंएनजीटी ने स्कूल समेत जिन दस आवासीय कालोनियों पर जवाब-तलब किया था उनमें से सात के आरडब्ल्यूए प्रेसीडेंट हाजिर नहीं हुए। इस पर ट्रिब्युनल ने उनके खिलाफ 10 हजार रुपये के जमानती वारंट को जारी किया है। इन कालोनियों का सीवेज डिस्चार्ज यमुना में किया जा रहा था।
ट्रिब्युनल ने आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) से सभी आवासीय कालोनियों को नोटिस देने का सबूत मांगा है। प्राधिकरण को फिर चेताया है कि यमुना में किसी भी तरह का सीवेज अथवा निर्माण मलबा नहीं जाना चाहिए। याचिकाकर्ता डीके जोशी की ओर से एडवोकेट राहुल चौधरी ने दलीलें रखीं। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले डीके जोशी ने यमुना को मूलस्वरूप में लाने के लिए ट्रिब्यूनल में जनहित याचिका दाखिल की थी। इसी पर सुनवाई चल रही है।
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इन कॉलोनियों के खिलाफ जारी हुए वारंट
जगनपुरा क्षेत्र के इंद्रधनुष कॉलोनी, संत नगर कालोनी, जयराम बाग कॉलोनी, राहुल विहार, अमर विहार, मैत्री बाग, फ्रेंड्स विहार कालोनी को कारण बताओ नोटिस के बाद जमानती वारंट जारी किया गया है। राहुल ग्रीन, तुलिप पैराडाइज, राधावल्लभ भाई इंटर कॉलेज के प्रतिनिधि ट्रिब्यूनल के समक्ष हाजिर हुए और नोटिस का जवाब दिया। इसलिए इन्हें जमानती वारंट से एनजीटी ने राहत दी है।
दो हफ्तों में मांगा जवाब
एनजीटी ने यमुना किनारों पर गंदगी और निर्माण मलबा फेंकने के लिए पुष्पांजलि हाईट्स, मंगलम एस्टेट, तनिष्क राजश्री एस्टेट, ताराचंद अपार्टमेंट के साथ व्यक्तिगत तौर पर अनूप अग्रवाल को नोटिस दिया था। जवाब दाखिल नहीं होने पर एनजीटी ने इन्हें दो हफ्तों का समय और दिया है।
यूपी सरकार पेश करे एसटीपी प्लांट पर रिपोर्ट
एनजीटी ने यूपी सरकार और आगरा नगर निगम के काउंसिल से कहा है कि वह बताएं कि यमुना डूब क्षेत्र और उससे बाहर के दायरे में आने वाले सभी बिल्डर्स के जरिये डिस्चार्ज सीवेज का ट्रीटमेंट प्लांट में हो रहा है या नहीं। यदि हां तो ट्रीटमेंट के बाद उसका इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है।
डूब क्षेत्र के सीमांकन की विस्तृत रिपोर्ट मांगी
एनजीटी ने सिंचाई विभाग को यमुना डूब क्षेत्र के भौतिक तौर पर सीमांकन और डूब क्षेत्र में आने वाले प्रोजेक्ट को लेकर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। प्रदेश सरकार की ओर से पेश काउंसिल ने कहा कि इस संबंध में मैप एनजीटी को दिया जा चुका है। बीते 25 वर्षों में 2010 में बाढ़ अपने उच्चतम स्तर पर पहुंची थी। इसके कारण कई कालोनियां और प्रोजेक्ट प्रभावित हुए थे। इसके बाद एनजीटी ने प्रभावित होने वाले कालोनियों और प्रोजेक्ट की सूची मांगी थी।
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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई की। बता दें, पिछली सुनवाई मेंएनजीटी ने स्कूल समेत जिन दस आवासीय कालोनियों पर जवाब-तलब किया था उनमें से सात के आरडब्ल्यूए प्रेसीडेंट हाजिर नहीं हुए। इस पर ट्रिब्युनल ने उनके खिलाफ 10 हजार रुपये के जमानती वारंट को जारी किया है। इन कालोनियों का सीवेज डिस्चार्ज यमुना में किया जा रहा था।
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ट्रिब्युनल ने आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) से सभी आवासीय कालोनियों को नोटिस देने का सबूत मांगा है। प्राधिकरण को फिर चेताया है कि यमुना में किसी भी तरह का सीवेज अथवा निर्माण मलबा नहीं जाना चाहिए। याचिकाकर्ता डीके जोशी की ओर से एडवोकेट राहुल चौधरी ने दलीलें रखीं। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले डीके जोशी ने यमुना को मूलस्वरूप में लाने के लिए ट्रिब्यूनल में जनहित याचिका दाखिल की थी। इसी पर सुनवाई चल रही है।
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इन कॉलोनियों के खिलाफ जारी हुए वारंट
जगनपुरा क्षेत्र के इंद्रधनुष कॉलोनी, संत नगर कालोनी, जयराम बाग कॉलोनी, राहुल विहार, अमर विहार, मैत्री बाग, फ्रेंड्स विहार कालोनी को कारण बताओ नोटिस के बाद जमानती वारंट जारी किया गया है। राहुल ग्रीन, तुलिप पैराडाइज, राधावल्लभ भाई इंटर कॉलेज के प्रतिनिधि ट्रिब्यूनल के समक्ष हाजिर हुए और नोटिस का जवाब दिया। इसलिए इन्हें जमानती वारंट से एनजीटी ने राहत दी है।
दो हफ्तों में मांगा जवाब
एनजीटी ने यमुना किनारों पर गंदगी और निर्माण मलबा फेंकने के लिए पुष्पांजलि हाईट्स, मंगलम एस्टेट, तनिष्क राजश्री एस्टेट, ताराचंद अपार्टमेंट के साथ व्यक्तिगत तौर पर अनूप अग्रवाल को नोटिस दिया था। जवाब दाखिल नहीं होने पर एनजीटी ने इन्हें दो हफ्तों का समय और दिया है।
यूपी सरकार पेश करे एसटीपी प्लांट पर रिपोर्ट
एनजीटी ने यूपी सरकार और आगरा नगर निगम के काउंसिल से कहा है कि वह बताएं कि यमुना डूब क्षेत्र और उससे बाहर के दायरे में आने वाले सभी बिल्डर्स के जरिये डिस्चार्ज सीवेज का ट्रीटमेंट प्लांट में हो रहा है या नहीं। यदि हां तो ट्रीटमेंट के बाद उसका इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है।
डूब क्षेत्र के सीमांकन की विस्तृत रिपोर्ट मांगी
एनजीटी ने सिंचाई विभाग को यमुना डूब क्षेत्र के भौतिक तौर पर सीमांकन और डूब क्षेत्र में आने वाले प्रोजेक्ट को लेकर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। प्रदेश सरकार की ओर से पेश काउंसिल ने कहा कि इस संबंध में मैप एनजीटी को दिया जा चुका है। बीते 25 वर्षों में 2010 में बाढ़ अपने उच्चतम स्तर पर पहुंची थी। इसके कारण कई कालोनियां और प्रोजेक्ट प्रभावित हुए थे। इसके बाद एनजीटी ने प्रभावित होने वाले कालोनियों और प्रोजेक्ट की सूची मांगी थी।