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वीआईपी नंबर: कभी एक लाख में भी लगानी पड़ रही थी बोली, अब खरीदार नहीं
Sun, 15 Aug 2021 10:21 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 15 Aug 2021 10:21 AM IST
सार
सितंबर 2019 से पहले तक वीआईपी नंबर की पहली श्रेणी यानी 1111 से लेकर 9999 तक के नंबर की अधिकतम कीमत 25 हजार रुपये थी, इसी तरह अन्य श्रेणियों के नंबरों की कीमतें तय थीं, लोग अपना नंबर बुकिंग कराने के बाद प्राप्त करते थे।
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विस्तार
गाड़ियों पर वीआईपी नंबर लेने के लिए लोग कभी मुंहमांगी कीमत अदा करने को तैयार रहते थे। यही कारण रहा कि वर्ष 2019 में शून्य से 9 नंबर की सीरीज की कीमत अधिकतम 25 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी गई। नीलामी प्रक्रिया भी शुरू की गई, लेकिन कोरोना संक्रमण के बाद से वीआईपी नंबरों का क्रेज कम हो गया है। अब इन नंबरों की बुकिंग 60 फीसदी तक गिर गई है।
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कार और एसयूवी के खरीदार हों या फिर बुलेट और बाइक खरीदने वाले लोग। कई बार अपने लकी नंबर की डिमांड करते हैं तो कई बार गाड़ी पर वीआईपी नंबर चाहते हैं। कुछ धार्मिक महत्व के हिसाब से भी गाड़ियों के नंबरों का चयन करते रहे हैं। सितंबर 2019 से पहले तक वीआईपी नंबर की पहली श्रेणी यानी 1111 से लेकर 9999 तक के नंबर की अधिकतम कीमत 25 हजार रुपये थी, इसी तरह अन्य श्रेणियों के नंबरों की कीमतें तय थीं, लोग अपना नंबर बुकिंग कराने के बाद प्राप्त करते थे।
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लेकिन सितंबर 2019 में परिवहन मुख्यालय ने वीआईपी नंबरों की कीमतों में इजाफा कर दिया। चार पहिया में 1111 से लेकर 9999 तक के नंबरों की कीमत एक लाख रुपये और दोपहिया के लिए अधिकतम 20 हजार रुपये तय कर दी। इसी तरह 1000, 2000 जैसे नंबरों की कीमतें 50 हजार और दोपहिया के लिए 10 हजार तय की गईं। इसके अलावा नीलामी प्रक्रिया भी शुरू कर दीं। इन नंबरों की बुकिंग कराने के बाद दूसरा व्यक्ति उसी नंबर का आवेदन करता है तो नीलामी में जो अधिक बोली लगाएगा, वही नंबर ले पाएगा।
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एचएसआरपी की अनिवार्यता और कोरोना संक्रमण भी बना वजह
कोरोना संक्रमण का दौर शुरू होने के साथ ही वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य होने के बाद वीआईपी नंबरों को लेने वालों में भारी कमी आई है। यही कारण है कि अब बहुत कम लोग ही वीआईपी या फैंसी नंबर लगवाने के लिए बुकिंग करा रहे आरटीओ के मुताबिक 786 नंबर पहले सबसे ज्यादा बुक हुआ करते थे। अब भी इस नंबर की डिमांड है, लेकिन पहले जैसी मारामारी नहीं है।
आर्थिक कारण भी हो सकते हैं
पिछले एक साल के भीतर वीआईपी नंबर के लिए बोली लगाने वालों में 60 फीसदी तक की गिरावट आई है। इसके पीछे एचएसआरपी की अनिवार्यता और आर्थिक कारण भी हो सकते हैं। - अनिल कुमार सिंह, एआरटीओ (प्रशासन)
कोरोना संक्रमण का दौर शुरू होने के साथ ही वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य होने के बाद वीआईपी नंबरों को लेने वालों में भारी कमी आई है। यही कारण है कि अब बहुत कम लोग ही वीआईपी या फैंसी नंबर लगवाने के लिए बुकिंग करा रहे आरटीओ के मुताबिक 786 नंबर पहले सबसे ज्यादा बुक हुआ करते थे। अब भी इस नंबर की डिमांड है, लेकिन पहले जैसी मारामारी नहीं है।
आर्थिक कारण भी हो सकते हैं
पिछले एक साल के भीतर वीआईपी नंबर के लिए बोली लगाने वालों में 60 फीसदी तक की गिरावट आई है। इसके पीछे एचएसआरपी की अनिवार्यता और आर्थिक कारण भी हो सकते हैं। - अनिल कुमार सिंह, एआरटीओ (प्रशासन)