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विजयदशमी: आगरा में जगह-जगह किया गया रावण के पुतले का दहन, बड़े आयोजनों पर रही रोक

Sat, 16 Oct 2021 12:21 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 16 Oct 2021 12:21 AM IST
सार

आगरा में दशहरा (विजयदशमी) पर कोई बड़ा आयोजन तो नहीं हुआ लेकिन जगह-जगह सार्वजनिक और कॉलोनियों व मोहल्लों में रावण दहन की परंपरा निभाई गई। रात को श्रीराम के जयघोष के साथ रावण दहन किया गया। बड़े आयोजनों पर रोक रही।

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vijayadashami celebrations Ravana effigies burnt at various places in Agra
बल्केश्वर में फूंका गया 20 फीट ऊंचा रावण का पुतला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के बल्केश्वर में 18 फीट ऊंचे वर्जिश करते हुए रावण के पुतले का दहन किया गया। श्री मन:कामेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार के बाहर रावण के पुतले का दहन किया गया। कैंट में भी रामलीला के बाद रावण के पुतला जलाया गया। राजामंडी, न्यू आगरा, रावतपाड़ा, गोकुलपुरा, दयालबाग, इंद्रापुरम, आवास विकास कॉलोनी, केदार नगर, बिचपुरी रोड, शास्त्रीपुरम, यमुना पार, राजपुर चुंगी आदि क्षेत्रों में रावण के पुतलों का दहन किया गया।

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श्रीराम ने 31 तीर चला कर किया रावण का वध
श्री मन:कामेश्वर मंदिर में शुक्रवार को श्रीराम और रावण के बीच युद्ध की लीला का मंचन किया गया। श्रीराम ने 31 तीर चला कर रावण का वध कर दिया। लीला की समाप्ति पर मंदिर के मुख्य द्वार के बाहर रावण का पुतला दहन किया गया। 
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लीला की शुरुआत में सुग्रीव, जामवंत, हनुमान आदि बलशाली वानरों को श्रीराम लंका पर चढ़ाई का आदेश देते हैं। लंका के चारों दरवाजों पर सेना है। राक्षस और वानरों के बीच घमासान युद्ध होता है। जिसमें राक्षस मारे जाते हैं। 

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रावण वध लीला का हुआ मंचन 
रावण यह समाचार सुनकर अपने पुत्र इंद्रजीत मेघनाथ को युद्ध के लिए भेजता है। विभिन्न प्रकार के छल, बल प्रयोग करने के बाद भी वह पराजित होता है। इस दौरान लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं। सुषेण वैद्य के परामर्श के अनुसार हनुमानजी द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लेने जाते हैं और पूरा पर्वत ही उठा लाते हैं। 

रावण अपने भाई कुंभकरण को नींद से जगाता है और युद्ध के लिए प्रेरित करता है। कुंभकरण युद्ध भूमि में पहुंचता है। श्रीराम को युद्धभूमि में देखता है। कुंभकरण को नारायण की शक्ति का ज्ञान था। उसे अपने कर्तव्य का पालन करते हुए उनसे युद्ध भी करना था। वह जानता था कि नारायण के हाथों उसकी मृत्यु होगी। 

अंत में रावण युद्ध को आता है। अत्यन्त क्रोधित हो उसने भारी मारकाट मचा दी। कितने ही वानरों के सिर काट डाले, कितनों के मस्तक कुचल डाले, कितनों ही के वक्ष चीर डाले। घायल वानरों ने दौड़कर श्रीराम से गुहार लगाई। विभीषण ने राम को रावण की मृत्यु का उपाय बताया। 

श्रीराम 31 तीर एक साथ छोड़ते हैं, जिससे रावण के दस शीश, बीस भुजाएं एक साथ कटने के साथ ही नाभि का अमृत कुंड भी सूख जाता है। श्रीराम रावण का वध कर देते हैं। चारों ओर जय श्रीराम की जय-जयकार होने लगती है।
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