{"_id":"63401b5cd1b47d26c32c7bc8","slug":"vijay-ikka-murder-case-chairman-of-revenue-council-gave-a-statement-in-mathura-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura: विजय इक्का हत्याकांड में राजस्व परिषद के अध्यक्ष ने अदालत में दिए बयान, पुलिस हिरासत में हुई थी मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura: विजय इक्का हत्याकांड में राजस्व परिषद के अध्यक्ष ने अदालत में दिए बयान, पुलिस हिरासत में हुई थी मौत
Fri, 07 Oct 2022 05:58 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 07 Oct 2022 05:58 PM IST
सार
नवादा स्थित सेंट फ्रांसिस स्कूल परिसर में रहने वाले फादर जॉर्ज ब्रदर के घर में बदमाशों ने डाका डाला था, जिसमें फादर की डकैतों ने हत्या कर दी थी। पूछताछ के उद्देश्य से स्कूल के कर्मचारी विजय इक्का की मौत हो गई थी।
विज्ञापन
कोर्ट।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
मथुरा में 21 वर्ष पूर्व सेंट फ्रांसिस स्कूल के रसोइया विजय इक्का हत्याकांड में तत्कालीन डीएम और वर्तमान में राजस्व परिषद के अध्यक्ष संजीव मित्तल ने एडीजे (सप्तम) संजय चौधरी की अदालत में बयान दर्ज कराए। इससे पूर्व 27 सितंबर को प्रथम जांच अधिकारी तत्कालीन सीओ और वर्तमान में बनारस के एसीपी संतोष कुमार सिंह अदालत में अपने बयान दर्ज करा चुके हैं। अदालत में केस की अगली सुनवाई 11 नवंबर को होगी।
विज्ञापन
नवादा स्थित सेंट फ्रांसिस स्कूल परिसर में रहने वाले फादर जॉर्ज ब्रदर के घर में बदमाशों ने डाका डाला था, जिसमें फादर की डकैतों ने हत्या कर दी थी। पूछताछ के उद्देश्य से स्कूल के कर्मचारी विजय इक्का को नरहौली थाना पुलिस पकड़कर लाई। बाद में उसे पुलिस लाइन भेज दिया। पूछताछ के दौरान इक्का की 17 जून 2000 को मौत हो गई।
विज्ञापन
मामले में स्कूल के संचालक ब्रदर इमनुअल ने तत्कालीन नरहौली थानाध्यक्ष सुनील कुमार शर्मा और सिपाही दिनेश उपाध्याय को नामजद किया। बाद में जांच सीबीसीआईडी पर चली गई। एडीजीसी मुकेश बाबू गोस्वामी ने बताया कि तत्कालीन डीएम संजीव मितल ने अदालत में पेश होकर अपने बयान दर्ज कराए। गौरतलब है कि तत्कालीन डीएम की गवाही के लिए 10 अक्तूबर की तारीख लगी थी, परंतु अधिवक्ताओं की पैरवी के बाद अदालत में 7 अक्तूबर को ही गवाही करा दी गई।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें - Agra University: स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए बड़ा मौका, कॉलेजों की बढ़ाईं गईं 33 फीसदी सीटें
22 वर्ष में 15 गवाही
पुलिस और प्रशासन के गवाहों के अदालत तक पहुंचने में 22 वर्ष लग गए। इस दौरान अदालत में सिर्फ 15 गवाही हो सकीं। जबकि केस में लगभग 15 गवाही और होनी हैं । अब जिनकी गवाही होनी है, वह सब प्रशासनिक तथा पुलिस अधिकारी हैं।