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Agra News: 26 साल बाद वीर हुआ आजाद, बंधक बनाकर मंगवाई जा रही थी भीख (फोटो भी)
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आगरा। यूं तो वह हाथी है, जो जंगल के राजा शेर से भी नहीं डरता। लेकिन इंसानी जुल्म का शिकार वीर (हाथी) जीवन में पहली बार सुकून की सांस ले पा रहा है। जीवन के 26 साल गुलामी की बेड़ियों में गुजारने के बाद आखिर वीर को रिहाई मिल गई। हालांकि वह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा है। वाइल्ड लाइफ एसओएस ने वन विभाग मऊ के सहयोग से उसे मुक्त करा लिया है। फिलहाल मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में उसकी विशेष देखभाल की जा रही है।
वीर के लिए जीवन के 26 साल किसी यातना से कम नहीं थे। उसे न तो अपनी मर्जी से बैठने की इजाजत थी और न ही घूमने की। सालों से वह अपने मालिक की इच्छा का पालन कर रहा था बगैर शिकायत। धार्मिक जुलूसों से लेकर तपती तारकोल की सड़कों पर भीख मांगने तक उसने हर अमानवीय अत्याचार सहा। नतीजा उसका बायां अगला पैर बुरी तरह मुड़ा हुआ है। दाहिने पैर में जकड़न, बाएं पैर में तेज दर्द और सूजन है।
उत्तर प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) और चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन सहित एसओएस की टीम ने विशेष अभियान चलाया था। तीन तीन के व्यापक बचाव अभियान के बाद उसको मथुरा स्थित हाथी अस्पताल में सुरक्षित पहुंचाया गया है। यहां उसको चिकित्सा देने के साथ 24 घंटे निगरानी की जा रही है। वाइल्डलाइफ एसओएस की पशु चिकित्सा सेवाओं के उप निदेशक डॉ. एस इलयाराजा ने बताया कि वीर गंभीर रूप से टखने की कमजोरी (एंकिलोसिस) है। मऊ के प्रभागीय वन अधिकारी प्रभाकर पांडे आईएफएस ने कहा कि हाथी के स्वास्थ्य और भविष्य को ध्यान में रखते हुए बचाव अभियान चलाया गया।
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वाइल्डलाइफ एसओएस के सह संस्थापक व सीईओ कार्तिक सत्यनारायण, सह-संस्थापक व सचिव गीता शेषमणि, डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एमवी ने बताया कि वीर का बचाव वाइल्डलाइफ एसओएस के चल रहे बेगिंग एलीफैंट अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य 2030 तक ऐसे 300 हाथियों का पुनर्वास करना और उन्हें दीर्घकालिक चिकित्सा देखभाल और आश्रय प्रदान करना है। भीख मांगने वाले हाथी की सूचना देने के लिए हेल्पलाइन 9971699727 पर संपर्क कर सकते हैं।
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वीर के लिए जीवन के 26 साल किसी यातना से कम नहीं थे। उसे न तो अपनी मर्जी से बैठने की इजाजत थी और न ही घूमने की। सालों से वह अपने मालिक की इच्छा का पालन कर रहा था बगैर शिकायत। धार्मिक जुलूसों से लेकर तपती तारकोल की सड़कों पर भीख मांगने तक उसने हर अमानवीय अत्याचार सहा। नतीजा उसका बायां अगला पैर बुरी तरह मुड़ा हुआ है। दाहिने पैर में जकड़न, बाएं पैर में तेज दर्द और सूजन है।
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उत्तर प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) और चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन सहित एसओएस की टीम ने विशेष अभियान चलाया था। तीन तीन के व्यापक बचाव अभियान के बाद उसको मथुरा स्थित हाथी अस्पताल में सुरक्षित पहुंचाया गया है। यहां उसको चिकित्सा देने के साथ 24 घंटे निगरानी की जा रही है। वाइल्डलाइफ एसओएस की पशु चिकित्सा सेवाओं के उप निदेशक डॉ. एस इलयाराजा ने बताया कि वीर गंभीर रूप से टखने की कमजोरी (एंकिलोसिस) है। मऊ के प्रभागीय वन अधिकारी प्रभाकर पांडे आईएफएस ने कहा कि हाथी के स्वास्थ्य और भविष्य को ध्यान में रखते हुए बचाव अभियान चलाया गया।
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वाइल्डलाइफ एसओएस के सह संस्थापक व सीईओ कार्तिक सत्यनारायण, सह-संस्थापक व सचिव गीता शेषमणि, डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एमवी ने बताया कि वीर का बचाव वाइल्डलाइफ एसओएस के चल रहे बेगिंग एलीफैंट अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य 2030 तक ऐसे 300 हाथियों का पुनर्वास करना और उन्हें दीर्घकालिक चिकित्सा देखभाल और आश्रय प्रदान करना है। भीख मांगने वाले हाथी की सूचना देने के लिए हेल्पलाइन 9971699727 पर संपर्क कर सकते हैं।