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वट सावित्री व्रतः चार संयोग बनाएंगे सारे बिगड़े काम, अखंड सौभाग्य की कामना
Mon, 03 Jun 2019 04:24 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 03 Jun 2019 04:24 AM IST
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- फोटो : vat
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अखंड सौभाग्य और संतान प्राप्ति की कामना के लिए किया जाने वाला वट सावित्री व्रत सोमवार को पड़ रहा है। इस बार वट सावित्री व्रत पर चार संयोग इस दिन को विशेष बना रहे हैं।
पहला सोमवती अमावस्या है, दूसरा संयोग सर्वार्थ सिद्धि योग, तीसरा अमृत सिद्धि और चौथा संयोग त्रिग्रही योग का बन रहा है। इस दिन भगवान शनि की जयंती भी है। इस कारण इस दिन जो भी पूजा, गंगा में स्नान और दान करेगा उसे सहस्त्र फल की प्राप्ति होगी।
ज्येष्ठ मास की अमावस्या को वट सावित्री पूजा व्रत किया जाता है। इसी दिन शनि जयंती भी पड़ रही है। ऐसी मान्यता है कि ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को भगवान शनि का जन्म हुआ था।
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पहला सोमवती अमावस्या है, दूसरा संयोग सर्वार्थ सिद्धि योग, तीसरा अमृत सिद्धि और चौथा संयोग त्रिग्रही योग का बन रहा है। इस दिन भगवान शनि की जयंती भी है। इस कारण इस दिन जो भी पूजा, गंगा में स्नान और दान करेगा उसे सहस्त्र फल की प्राप्ति होगी।
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ज्येष्ठ मास की अमावस्या को वट सावित्री पूजा व्रत किया जाता है। इसी दिन शनि जयंती भी पड़ रही है। ऐसी मान्यता है कि ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को भगवान शनि का जन्म हुआ था।
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ज्योतिषाचार्य कपिल चतुर्वेदी का कहना है कि अमावस्या रविवार की शाम 4:39 से शुरू होकर सोमवार को 3:31 बजे तक रहेगी। इस दिन पीपल, बरगद पूजने से शनि, मंगल, राहु के अशुभ प्रभाव दूर होंगे। वट वृक्ष के नीचे इस दिन सावित्री सत्यवान की कथा सुनी जाती है।
इस दिन चार संयोग बनने से व्रत रखने से घर-परिवार में सुख-शांति का योग है। इसमें सौभाग्यवती महिलाएं अपने पति और परिवार की रक्षा के लिए सावित्री की तरह पवित्र धर्म को धारण करके इस व्रत का पालन करती हैं।
यह व्रत अखंड सौभाग्य, सभी रोगों को नष्ट करने वाला एवं संतान प्राप्ति के लिए अति महत्वपूर्ण है। इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र, सोमवती अमावस्या होने के कारण विशेष फलदायी सिद्ध होगा।
इस दिन चार संयोग बनने से व्रत रखने से घर-परिवार में सुख-शांति का योग है। इसमें सौभाग्यवती महिलाएं अपने पति और परिवार की रक्षा के लिए सावित्री की तरह पवित्र धर्म को धारण करके इस व्रत का पालन करती हैं।
यह व्रत अखंड सौभाग्य, सभी रोगों को नष्ट करने वाला एवं संतान प्राप्ति के लिए अति महत्वपूर्ण है। इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र, सोमवती अमावस्या होने के कारण विशेष फलदायी सिद्ध होगा।
ज्योतिषाचार्य कपिल चतुर्वेदी का कहना है कि कच्चे धागे को हाथ में लेकर वट की अधिकतम 108 परिक्रमा की जाती है। जबकि न्यूनतम सात बार परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए।
मीठे आटे की बरगद फल बनाकर ऐपन, सिंदूर, फल, फूल आदि बरगद यानी वट को अर्पित करें। बरगद के पेड़ की जड़ में जल भी दिया जाता है। सोमवती अमावस्या के कारण अखंड सौभाग्य सूचक है।
मीठे आटे की बरगद फल बनाकर ऐपन, सिंदूर, फल, फूल आदि बरगद यानी वट को अर्पित करें। बरगद के पेड़ की जड़ में जल भी दिया जाता है। सोमवती अमावस्या के कारण अखंड सौभाग्य सूचक है।