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वेंटीलेटर नहीं खरीदे तो सांसद ने वापस मांगी 25 लाख की निधि
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24एमएनपी-03-हरनाथ सिंह राज्य सभा सांसद
- फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। धनराशि मिलने के दो माह बाद भी जब स्वास्थ्य विभाग वेंटिलेटर नहीं खरीद सका तो राज्यसभा सांसद ने ये धनराशि वापस मांग ली है। इस संबंध में उन्होंने जिलाधिकारी को पत्र भेजा है। उन्होंने निधि की धनराशि विकास कार्यों में लगाने की भी बात कही है। जिले भर में इस बात की चर्चा है।
कोरोना वायरस फैलने के बाद जिले में अमर उजाला ने वेंटीलेटर न होने का मुद्दा उठाया था। इस पर मार्च के अंत में राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने संज्ञान लिया और उन्होंने 25 लाख रुपये की निधि जिला अस्पताल में वेंटिलेटर खरीदने के लिए दी थी। दो माह बीतने के बाद भी जब स्वास्थ्य विभाग ने वेंटिलेटर नहीं खरीदे तो सांसद ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर वेंटिलेटर का प्रस्ताव निरस्त करने के लिए कहा।
उन्होंने इस बात का भी पत्र में जिक्र किया है कि कई बार मुख्य चिकित्साधिकारी से उन्होंने इसके लिए वार्ता की, लेकिन कभी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। उन्होंने निधि की धनराशि को अन्य कार्यों में समायोजित करने की बात की है। ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग को इस धनराशि से कोई फायदा होगा। कहीं न कहीं ये स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। आखिर क्यों धनराशि मिलने के बाद भी वेंटीलेटर नहीं खरीदे गए। सांसद का पत्र मिलने के बाद प्रशासन ने धनराशि वापस करने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है।
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शासन से मिले हैं चार वेंटिलेटर
जिले को शासन से चार वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए हैं। इन्हें पुराने जिला महिला अस्पताल में
लगाया गया है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि जिले में और वेंटिलेटर की आवश्यकता नहीं है।
जिले की 21 लाख की आबादी पर चार वेंटिलेटर नाकाफी साबित होंगे। अगर स्वास्थ्य विभाग समय रहते कार्रवाई करता तो जिले को दो से तीन वेंटिलेटर और मिल जाते।
राज्यसभा सांसद द्वारा 25 लाख रुपये निधि से दिए गए थे। इस धनराशि को स्वास्थ्य विभाग को दे दिया गया था। सांसद ने पत्र भेजकर प्रस्ताव निरस्त करने के लिए कहा है। उनकी मांग के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
नगेंद्र शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी।
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कोरोना वायरस फैलने के बाद जिले में अमर उजाला ने वेंटीलेटर न होने का मुद्दा उठाया था। इस पर मार्च के अंत में राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने संज्ञान लिया और उन्होंने 25 लाख रुपये की निधि जिला अस्पताल में वेंटिलेटर खरीदने के लिए दी थी। दो माह बीतने के बाद भी जब स्वास्थ्य विभाग ने वेंटिलेटर नहीं खरीदे तो सांसद ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर वेंटिलेटर का प्रस्ताव निरस्त करने के लिए कहा।
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उन्होंने इस बात का भी पत्र में जिक्र किया है कि कई बार मुख्य चिकित्साधिकारी से उन्होंने इसके लिए वार्ता की, लेकिन कभी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। उन्होंने निधि की धनराशि को अन्य कार्यों में समायोजित करने की बात की है। ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग को इस धनराशि से कोई फायदा होगा। कहीं न कहीं ये स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। आखिर क्यों धनराशि मिलने के बाद भी वेंटीलेटर नहीं खरीदे गए। सांसद का पत्र मिलने के बाद प्रशासन ने धनराशि वापस करने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है।
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शासन से मिले हैं चार वेंटिलेटर
जिले को शासन से चार वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए हैं। इन्हें पुराने जिला महिला अस्पताल में
लगाया गया है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि जिले में और वेंटिलेटर की आवश्यकता नहीं है।
जिले की 21 लाख की आबादी पर चार वेंटिलेटर नाकाफी साबित होंगे। अगर स्वास्थ्य विभाग समय रहते कार्रवाई करता तो जिले को दो से तीन वेंटिलेटर और मिल जाते।
राज्यसभा सांसद द्वारा 25 लाख रुपये निधि से दिए गए थे। इस धनराशि को स्वास्थ्य विभाग को दे दिया गया था। सांसद ने पत्र भेजकर प्रस्ताव निरस्त करने के लिए कहा है। उनकी मांग के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
नगेंद्र शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी।