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अनोखा प्रेम: ताजनगरी में किसी का पेड़, तो किसी के लिए किताबें बन गईं वैलेंटाइन
Sun, 14 Feb 2021 12:03 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 14 Feb 2021 12:03 AM IST
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गुलाब का फूल
- फोटो : अमर उजाला
वैलेंटाइन के मायने सबके लिए अलग-अलग होते हैं। कोई अपनों में प्यार तलाशते हैं, तो कई अलग-अलग वस्तु और प्रकृति में। ताजनगरी में कई ऐसे लोग हैं, जिनके अलग-अलग वैलेंटाइन हैं। किसी ने पेड़, तो किसी ने किताबों को अपना वैलेंटाइन माना है। जबकि कुछ तो ऐसे हैं, जो पशु और निर्धन बच्चों में प्यार ढूंढते हैं। श्रुति, लव, दीक्षा और मयंक ऐसे ही शख्स हैं, जो अपने इस शौक से लोगों को भी प्रेरित कर रहे हैं।
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'मुझे पशुओं से बहुत प्यार है'
कमला नगर निवासी श्रुति ने बताया कि मुझे पशुओं से बहुत प्यार है। खासकर श्वान से। जब भी घर से बाहर निकलती हूं, उन्हें कुछ न कुछ जरूर खिलाती हूं। परिजनों ने भी मुझे यही संस्कार दिए हैं। जल्द मैं अपने घर में एक छोटा श्वान भी लाने वाली हूं। यही मेरा वैलेंटाइन होगा।
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'निर्धन बच्चों को पढ़ाना पसंद'
सिकंदरा के लव उपाध्याय ने कहा कि मुझे निर्धन बच्चों को पढ़ाना बहुत पसंद है। उनसे मेरा अटूट रिश्ता हो गया है। जब भी मौका मिलता है, उन्हें पढ़ाने की कोशिश करता हूं। इसके लिए मैं उनसे किसी प्रकार का शुल्क नहीं लेता हूं। सही मायनों में वे ही मेरे लिए वैलेंटाइन हैं।
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'मैं समय-समय पर पौधे रोपती हूं'
शाहगंज की दीक्षा सिंह ने कहा कि मुझे पेड़-पौधे काफी आकर्षित करते हैं। मैं समय-समय पर पौधे रोपती हूं। इस बार वैलेंटाइन डे पर पौधरोपण करूंगी। यही मेरे लिए असली वैलेंटाइन होगा। हो सकता है कि इससे और लोग भी प्रेरित हो सकें।
'किताबों से ही दोस्ती करना चाहूंगा'
कृष्णा कॉलॉनी मयंक चावला ने कहा कि मुझे किताबों से बहुत प्यार है। ये आपको आगे बढ़ने का रास्ता तो दिखाती है। खाली वक्त में सच्चे दोस्त की भूमिका निभाती हैं। इसलिए वैलेंटाइन डे पर बाहर जाने के बजाय किताबों से ही दोस्ती करना चाहूंगा।
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