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बैकुंठ एकादशी: गोदारंगमन्नार ने बैकुंठ द्वार से दिए दर्शन, कोरोना संक्रमण के चलते भक्तों को नहीं मिला प्रवेश

Thu, 13 Jan 2022 10:57 AM IST
Abhishek Saxena संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 13 Jan 2022 10:57 AM IST
सार

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण गुरुवार को बैकुंठ एकादशी पर भक्त बैकुंठ द्वार के दर्शन नहीं कर सके।

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Vaikuntha Ustav 2022 Celebration In Rangnath Temple Vrindavan
रंगनाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर भारत के दक्षिण शैली के सबसे बड़े मंदिर रंगनाथ मंदिर में गुरुवार को बैकुंठ एकादशी के अवसर पर बैकुंठ द्वार को खोला गया। ब्रह्म मुहूर्त में भगवान रंगनाथ माता गोदा के साथ निज मंदिर से पालकी में विराजमान हो कर बैकुंठ द्वार पहुंचे। जहां मंदिर के सेवायत पुजारियों के निर्देशन में पाठ किया गया। करीब आधा घंटे तक हुए पाठ और अर्चना के बाद भगवान रंगनाथ और शठ कोप स्वामी की सवारी मंदिर प्रांगड़ में भ्रमण करने के बाद पौंडानाथ मंदिर पहुंची। जिसे बैकुंठ लोक कहते हैं। यहां मंदिर के लोगों ने भगवान को भजन गा कर सुनाए। बैकुंठ द्वार से निकलने की चाह में हजारों भक्त रात से ही मंदिर परिसर में एकत्रित होना शुरू हो जाते थे। लेकिन इस बार कोरोना काल होने के कारण मंदिर प्रबंधन ने भक्तों के मंदिर में प्रवेश पर रोक लगा दी थी। मंदिर प्रबंधन ने यह निर्णय जनहित में लिया। जिसकी वजह से श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश नहीं मिला। कोरोना काल के कारण करीब 185 वर्ष पुराने रंगनाथ मन्दिर में भक्तों को बैकुंठ एकादशी पर सुबह के समय खुलने वाले बैकुंठ द्वार के दर्शन नहीं हो सके। 
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बैकुंठ एकादशी पर्व पर खोला जाता है द्वार
मंदिर के पुजारी स्वामी राजू ने बताया कि 21 दिवसीय बैकुंठ उत्सव में 11 वें दिन बैकुंठ एकादशी पर्व पर बैकुंठ द्वार खोला जाता है। यह एकादशी वर्ष की सर्वश्रेष्ठ एकादशियों में से एक मानी जाती है। मान्यता है कि बैकुंठ एकादशी पर जो भी भक्त बैकुंठ द्वार से निकलता है उसे बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती हैं। मंदिर की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनघा श्री निवासन ने बताया कि अलवार आचार्य बैकुंठ उत्सव के दौरान अपनी रचित गाथाएं भगवान को सुनाते हैं। बैकुंठ एकादशी के दिन दक्षिण के सभी वैष्णव मंदिरों में बैकुंठ द्वार ब्रह्म मुहूर्त में खुलता है। इसी परंपरा का निर्वाहन वृन्दावन स्थित रंगनाथ मंदिर में किया जाता है। बैकुंठ उत्सव के दौरान रघुनाथ स्वामी, माल्दा गोवर्धन, श्री निवासन, रंगा स्वामी, चौवी स्वामी, तिरुपति, आनंद राव, राकेश दुबे, विजय अग्रवाल, जुगल किशोर, चक्रपाणि मिश्रा, कंहैया, पंकज शर्मा, शुभम, अमित आदि मौजूद थे।
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