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Agra News: हनुमान चालीसा के बहाने थमा देते थे राम नाम के सहयोग की पर्ची
Wed, 17 Jan 2024 11:09 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Wed, 17 Jan 2024 11:09 PM IST
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मैनपुरी। राम जन्मभूमि आंदोलन जब शुरू हुआ तो हर किसी ने अलग-अलग रूप में अपना योगदान दिया। इन्हीं लोगों में से एक थे मैनपुरी के मोहल्ला छपट्टी निवासी चंद्रप्रकाश गुप्ता। हनुमान चालीसा के बहाने लोगों को एकत्रित करते थे और राम लला के मंदिर के लिए अपना योगदान देने की परची थमा देते थे। पुलिस को सूचना मिलने पर कार्यक्रम खत्म करना पड़ता था।
जिंदगी के 60 बसंत देख चुके चंद्रप्रकाश गुप्ता बताते हैं कि 1990 में राम जन्मभूमि आंदोलन जोर पकड़ने लगा था। वे भी अपने आराध्या श्रीराम के लिए कुछ करना चाहते थे, तो वे भी मैदान में कूद पड़े। उन्होंने लोगों के साथ मिलकर हनुमान चालीसा का आयोजन कराना शुरू किया। पहले हनुमान चालीस के लिए लोगों को बुलाते थे और जब लोग एकत्रित हो जाते तो उनके हाथ में एक-एक परची थमा देते थे। इस परची में चंद लाइनों के साथ ही अपने भगवान को टेंट में से गर्भगृह में दोबारा विराजमान करने के लिए मदद मांगते थे।
वे बताते हैं कि रात में वे घर पर परचियां तैयार करते थे। उन परचियों में बाबर की न अकबर की अयोध्या सिर्फ रघुवर की... जैसी लाइनें लिखकर देते थे। लगभग दो साल तक ये सिलसिला जारी रही। बीच-बीच में पुलिस को सूचना होने पर कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर निकलना पड़ता था। आज रामलला का भव्य मंदिर बन रहा है तो चंद्रपकाश बेहद खुश हैं। वे कहते हैं कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद वे रामलला के वैभव को देखने जाएंगे।
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जिंदगी के 60 बसंत देख चुके चंद्रप्रकाश गुप्ता बताते हैं कि 1990 में राम जन्मभूमि आंदोलन जोर पकड़ने लगा था। वे भी अपने आराध्या श्रीराम के लिए कुछ करना चाहते थे, तो वे भी मैदान में कूद पड़े। उन्होंने लोगों के साथ मिलकर हनुमान चालीसा का आयोजन कराना शुरू किया। पहले हनुमान चालीस के लिए लोगों को बुलाते थे और जब लोग एकत्रित हो जाते तो उनके हाथ में एक-एक परची थमा देते थे। इस परची में चंद लाइनों के साथ ही अपने भगवान को टेंट में से गर्भगृह में दोबारा विराजमान करने के लिए मदद मांगते थे।
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वे बताते हैं कि रात में वे घर पर परचियां तैयार करते थे। उन परचियों में बाबर की न अकबर की अयोध्या सिर्फ रघुवर की... जैसी लाइनें लिखकर देते थे। लगभग दो साल तक ये सिलसिला जारी रही। बीच-बीच में पुलिस को सूचना होने पर कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर निकलना पड़ता था। आज रामलला का भव्य मंदिर बन रहा है तो चंद्रपकाश बेहद खुश हैं। वे कहते हैं कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद वे रामलला के वैभव को देखने जाएंगे।

टूटा बोर्ड और नाले में गिरी पड़ी कार । संवाद

टूटा बोर्ड और नाले में गिरी पड़ी कार । संवाद
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