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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में खुलासा, जहां करोड़ों रुपये किए खर्च, वहीं सबसे मैली है यमुना

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा/मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 02 May 2019 11:16 AM IST
यमुना नदी (फाइल)
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उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2018 में यमुना नदी के प्रदूषण की जो रिपोर्ट जारी की है, उसने जल निगम और यमुना एक्शन प्लान पर सवालिया निशान उठा दिए हैं। दरअसल, आगरा में ताजमहल और मथुरा में वृंदावन, गोकुल के धार्मिक मान्यता के कारण सबसे ज्यादा खर्च यमुना सफाई पर किया गया है, लेकिन यहीं दोनों जगह यमुना नदी पूरे प्रदेश में सबसे गंदी और नाले से भी बदतर हालात में है। 


यमुना नदी की सफाई के नाम पर यमुना एक्शन प्लान में 1500 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और 1174 करोड़ रुपये की योजना फिर से बनाई गई है। नमामि गंगे योजना के तहत 460 करोड़ रुपये यमुना सफाई के लिए दिए गए हैं।


वहीं 11 करोड़ रुपये हाल में ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन के लिए मिले हैं, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सालाना रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि यमुना में शहर के अंदर ही 61 नालों के जरिए सीवर गिर रहा है। यही वजह है कि कैलाश घाट से ताजमहल के बीच यमुना नदी पांच गुना प्रदूषित है।

चंबल के मिलने के बाद जीवित होती है यमुना

मथुरा और आगरा में भारी प्रदूषण के कारण यमुना नाले में तब्दील हो चुकी है, लेकिन इटावा से आगे जब सिन्डौस में पचनदा में चंबल, क्वारी, सिंद, पहूज नदी यमुना में मिलती है तब जाकर यमुना नदी नाले से नदी में तब्दील होती है। 

पचनदा से आगे यमुना की जल गुणवत्ता में एकदम बदलाव आता है कि यह प्रयागराज में प्रवेश से पहले कम प्रदूषित नजर आने लगती है। यहां टोटल कॉलीफार्म 3100 से 5800 एमपीएन तक पूरे साल रहता है, जबकि घुलनशील आक्सीजन 7 से 9.5 के बीच रहती है। बायो केमिकल आक्सीजन डिमांड भी 1.8 से 2 मिग्रा तक रहती है।
 
यमुना में दलदल के कारण ताज पर कीड़े

ओखला बैराज के बाद से प्रयागराज तक यमुना नदी की सबसे खराब हालत ताजमहल के पीछे है। यहां दलदल के चलते ताजमहल पर गोल्डी काइरोनोमस कीड़े उत्तरी दीवार को तीन साल से हरे रंग के स्राव से खराब कर रहे हैं। 

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल तक पहुंचे कीड़ों के मामले में बनाई गई 6 सदस्यीय कमेटी ने तब संस्तुति की थी कि यमुना में जलस्तर बढ़ाया जाए और सीवर तथा नालों की टेपिंग की जाए। अप्रैल से कीड़ों का प्रकोप ताज पर बढ़ जाता है जो यमुना किनारे के संगमरमर को खराब कर रहा है। चार से पांच बार यहां मडपैक ट्रीटमेंट कर सफाई की जा चुकी है। 

नमामि गंगे की तर्ज पर यमुना की सफाई की मांग

नमामि गंगे अभियान के चलते वाराणसी में गंगा नदी में प्रदूषण स्तर बेहद कम रह गया है। वाराणसी अपस्ट्रीम में गंगा नदी में टोटल कॉलीफार्म 1100 से कर 3400  एमपीएन तक रहे हैं, जबकि  घुलनशील आक्सीजन 7 से 9 के बीच रही है। 

यही हाल बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड का है जो 2 से 3 के बीच बनी रही है। यहां गंगाजल नहाने लायक और ट्रीटमेंट के बाद पेयजल लायक है। नमामि गंगे की तर्ज पर ही आगरा में भी यमुना की सफाई और प्रदूषण मुक्ति की मांग की जा रही है ताकि ताजमहल के पीछे यमुना स्वच्छ निर्मल बह सके। 
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