Mathura: नौ विभागों में नियुक्त होंगे खिलाड़ी, खेल निदेशक बोले- खिलाड़ियों की बेहतरी के काम कर रही योगी सरकार
उत्तर प्रदेश के खेल निदेशक आरपी सिंह सोमवार को मथुरा पहुंचे। उन्होंने वृंदावन पहुंचकर पत्नी के साथ ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में पूजन किया। इसके बाद खेल निदेशक ने गणेशरा स्थित मोहन पहलवान स्पोर्ट्स स्टेडियम का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्हें तमाम खामियां मिलीं।
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खेल निदेशक आरपी सिंह ने सोमवार को पत्नी के साथ फूल बंगले में विराजमान ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन कर पूजन किया। इसके बाद पत्रकार वार्ता में खेल निदेशक ने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार खेल और खिलाड़ियों की बेहतरी के लिए अच्छा काम कर रही है। तीन दिन पहले ही नौ विभागों में राजपत्रित पदों पर विश्व स्तर पर, ओलिंपिक में व कॉमनवेल्थ गेम में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सीधे नियुक्ति देने की बात कही है। यह प्रदेश में पहली बार हुआ है।
उन्होंने बताया कि हॉकी में उत्तर प्रदेश नेशनल लेबल पर चैंपियन बना है। प्रदेश से छह खिलाड़ी हॉकी की इंडिया टीम में खेल रहे हैं। हॉकी टीम ने भी 41 साल बाद ओलंपिक में पदक जीता। नगर निगम के पार्षद वैभव अग्रवाल ने ज्ञापन सौंपकर खेल निदेशक से मांग की कि वृंदावन में दस वर्ष से उपेक्षा का शिकार एक मात्र स्टेडियम को संवारने का काम किया जा रहा है। इस स्टेडियम में खेल विभाग से किसी अधिकारी, कोच, कर्मचारी की नियुक्ति की जाए।
स्टेडियम का हाल देख जताई नाराजगी
खेल निदेशक ने गणेशरा स्थित मोहन पहलवान स्पोर्ट्स स्टेडियम का औचक निरीक्षण किया। उन्हें स्टेडियम बेहद खराब हाल में मिला। तरणताल बंद था। टेनिस कोर्ट में दरारें थीं। आधुनिक जिम की मशीनों पर पॉलीथिन चढ़ी मिली। हर तरफ गंदगी का अंबार था। जिला क्रीड़ा अधिकारी भी गैर हाजिर मिले। स्टेडियम में सिर्फ गार्ड और स्वीपर ही थे। खेल निदेशक ने स्टेडियम की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई। बता दें कि पिछले सप्ताह विधायक श्रीकांत शर्मा ने खेल उपकरणों का उद्घाटन करते हुए स्टेडियम की खूबसूरती को लेकर तमाम दावे किए थे।
खेल निदेशक आरपी सिंह, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी सुनील कुमार जोशी, जिला क्रीड़ा अधिकारी आगरा अरविंद यादव, कोच राम मिलन के साथ सुबह करीब 10:30 बजे अचानक मोहन पहलवान स्पोर्ट्स स्टेडियम पहुंच गए। स्टेडियम में उन्हें कोई नहीं मिला। कुछ खिलाड़ी अभ्यास करते मिले। बाकी एक स्वीपर और गार्ड की मौजूदगी मिली। फोन कर लिपिक कमल किशोर को बुलाया गया।
12 मई से गैरहाजिर थे क्रीड़ा अधिकारी
जिला क्रीड़ा अधिकारी एसपी बामनियां भी मौजूद नहीं थे। उपस्थित रजिस्टर देखा तो 12 मई से हस्ताक्षर नहीं थे। लिपिक से कैश रजिस्टर मांगा तो उसमें 31 मार्च के बाद कोई एंट्री नहीं मिली। सात कर्मचारियों में से सिर्फ दो मौके पर मिले। निरीक्षण की जानकारी मिलते ही लेखाधिकारी अमित कुमार भी मौके पर पहुंच गए। उनसे सवाल जवाब किए तो कड़ी नाराजगी जताई।