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यूपी: महिला सिपाहियों को दी जा रही स्पेशल ट्रेनिंग, कमांडो की तरह मारेंगी पंच; लाठी और शस्त्र भी चलाएंगी
Fri, 02 Feb 2024 02:09 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 02 Feb 2024 02:09 PM IST
सार
आगरा कमिश्नरेट की 91 आरक्षियों का एक माह का मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण पूरा हो गया है। दो महीने के प्रशिक्षण के लिए 30 चयनित हुई हैं।
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महिला सिपाही
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा कमिश्नरेट की महिला पुलिसकर्मी थाने-चौकी में बैठकर अब सिर्फ लिखापढ़ी नहीं करेंगी। मार्शल आर्ट में दक्ष बनने के बाद लाठी-शस्त्र चलाना भी सीखेंगी। पहले चरण में कराटे का प्रशिक्षण लेने वाली 91 में से 30 महिला आरक्षियों का चयन आगामी दो और प्रशिक्षण के लिए हुआ है। तीन महीने तक प्रशिक्षण लेने वाली इन युवा महिला पुलिसकर्मियों को विशेष टीम बनाकर कुख्यात अपराधियों की धरपकड़ में लगाया जाएगा।
पुलिस ऑफिस से लेकर थानों-चौकियों में महिला पुलिसकर्मी तैनात हैं। मगर, इनका कार्य सिर्फ लिखापढ़ी तक सीमित रहता है। इसके अलावा कभी महिला पीड़ितों के साथ मेडिकल और कोर्ट में बयान कराना तो कभी विवेचक के साथ घटनास्थल पर जाने का ही रहता है। सामान्य से लेकर कुख्यात अपराधी की धरपकड़ का कोई अनुभव नहीं होता है। मामूली बवाल पर भी पुलिसकर्मियों को पता नहीं होता है कि उन्हें क्या करना है।
इसको देखते हुए एक महीने पहले महिला पुलिसकर्मियों को मार्शल आर्ट का विशेष प्रशिक्षण दिलाने का निर्णय लिया गया था। इसके पीछे उद्देश्य था कि वह खुद तो सीखेंगी, बल्कि स्कूल-कॉलेज में जाकर छात्राओं को भी सिखाएंगी। इसलिए तेजतर्रार युवा महिला सिपाहियों को चुना गया। प्रशिक्षण से पहले उनकी इच्छा भी पूछी गई। इसके बाद 244 महिला सिपाही और 32 उप निरीक्षकों का चयन किया गया। इसमें से 91 को चयनित किया गया। इनको प्रशिक्षक से मार्शल आर्ट के गुर सिखाए गए।
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पुलिस लाइन में चलाएंगी लाठी
एसीपी एत्मादपुर सुकन्या शर्मा ने बताया कि एक महीने का मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण पूरा हो गया है। इस पर बृहस्पतिवार को फुल रिहर्सल हुआ। 91 में से 30 को आगामी प्रशिक्षण के लिए चुना गया है। इनको शनिवार से लाठी चलाने का प्रशिक्षण पुलिस लाइन मैदान में दिलाया जाएगा। एक महीने के प्रशिक्षण के बाद कॉम्बैट प्रशिक्षण होगा। इसमें महिला सिपाही पिस्टल और रिवाल्वर सहित अन्य शस्त्र चलाना सीखेंगी। शस्त्र और लाठी चलाने के प्रशिक्षण के पीछे मकसद है कि अगर, महिला पुलिसकर्मी दबिश के दौरान कहीं फंस जाए तो इनका प्रयोग करके आत्मरक्षा कर लें। पुलिस आपरेशन के दौरान भी वह किसी पुरुष पुलिसकर्मी से कम भी नहीं रहेंगी। दो महीने के प्रशिक्षण के बाद महिला पुलिसकर्मियों को चयनित कर अलग-अलग स्पेशल टीम में नियुक्त किया जाएगा।
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पुलिस ऑफिस से लेकर थानों-चौकियों में महिला पुलिसकर्मी तैनात हैं। मगर, इनका कार्य सिर्फ लिखापढ़ी तक सीमित रहता है। इसके अलावा कभी महिला पीड़ितों के साथ मेडिकल और कोर्ट में बयान कराना तो कभी विवेचक के साथ घटनास्थल पर जाने का ही रहता है। सामान्य से लेकर कुख्यात अपराधी की धरपकड़ का कोई अनुभव नहीं होता है। मामूली बवाल पर भी पुलिसकर्मियों को पता नहीं होता है कि उन्हें क्या करना है।
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इसको देखते हुए एक महीने पहले महिला पुलिसकर्मियों को मार्शल आर्ट का विशेष प्रशिक्षण दिलाने का निर्णय लिया गया था। इसके पीछे उद्देश्य था कि वह खुद तो सीखेंगी, बल्कि स्कूल-कॉलेज में जाकर छात्राओं को भी सिखाएंगी। इसलिए तेजतर्रार युवा महिला सिपाहियों को चुना गया। प्रशिक्षण से पहले उनकी इच्छा भी पूछी गई। इसके बाद 244 महिला सिपाही और 32 उप निरीक्षकों का चयन किया गया। इसमें से 91 को चयनित किया गया। इनको प्रशिक्षक से मार्शल आर्ट के गुर सिखाए गए।
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पुलिस लाइन में चलाएंगी लाठी
एसीपी एत्मादपुर सुकन्या शर्मा ने बताया कि एक महीने का मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण पूरा हो गया है। इस पर बृहस्पतिवार को फुल रिहर्सल हुआ। 91 में से 30 को आगामी प्रशिक्षण के लिए चुना गया है। इनको शनिवार से लाठी चलाने का प्रशिक्षण पुलिस लाइन मैदान में दिलाया जाएगा। एक महीने के प्रशिक्षण के बाद कॉम्बैट प्रशिक्षण होगा। इसमें महिला सिपाही पिस्टल और रिवाल्वर सहित अन्य शस्त्र चलाना सीखेंगी। शस्त्र और लाठी चलाने के प्रशिक्षण के पीछे मकसद है कि अगर, महिला पुलिसकर्मी दबिश के दौरान कहीं फंस जाए तो इनका प्रयोग करके आत्मरक्षा कर लें। पुलिस आपरेशन के दौरान भी वह किसी पुरुष पुलिसकर्मी से कम भी नहीं रहेंगी। दो महीने के प्रशिक्षण के बाद महिला पुलिसकर्मियों को चयनित कर अलग-अलग स्पेशल टीम में नियुक्त किया जाएगा।