पंचायत चुनाव: आरक्षण की आपत्तियों के परिणाम पर रोक, हाईकोर्ट के आदेश के बाद डीएम ने लिया निर्णय
- हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिलाधिकारी ने लिया निर्णय, शुक्रवार को जारी होना था परिणाम
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आगरा में त्रिस्तरीय जिला पंचायत चुनाव के लिए 519 आपत्तियों का निस्तारण कर दिया गया, लेकिन ग्राम सभाओं और वार्डों के आरक्षण आवंटन पर अंतिम सूची जारी नहीं हो सकी है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने देर रात सूची को रोक दिया। इसके पहले सभी आपत्तियों का निस्तारण कर लिया गया था।
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने बताया कि सभी आपत्तियों का निस्तारण कमेटी ने कर लिया है। न्यायालय के आदेश के बाद ही इनकी रिपोर्ट सार्वजनिक करेंगे। आगरा में चार से आठ मार्च तक चली प्रक्रिया के दौरान 519 आपत्तियां आईं थीं। इसमें 690 ग्राम प्रधान पद पर 467 आपत्तियां आईं थीं। जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत के वार्डों में भी 30 से अधिक शिकायतें गलत आरक्षण की आईं।
2011 की जनगणना के आधार पर प्रशासन ने आरक्षण का निर्धारण किया है। बिचपुरी, बरौली अहीर, बाह ब्लॉक की पंचायतों से सबसे ज्यादा शिकायतें आरक्षण में गड़बड़ियों की हैं। जनगणना के जाति वार आंकड़ों को भी कई ग्राम पंचायतों में फर्जी बताते हुए आपत्तियां आईं हैं।
गुरुवार को अवकाश में भी पंचायत विभाग में आपत्तियों के निस्तारण का काम किया गया। शुक्रवार शाम तक आपत्तियों का निस्तारण करके आरक्षण आवंटन की अंतिम सूची तैयार कर ली गई। इसी बीच शासन से हाईकोर्ट संबंधी आदेश आ गया। इसके बाद पूरी प्रक्रिया रोक दी गई।
दावेदारों में मची खलबली
पंचायत चुनाव पर रोक लगने से दावेदारों में खलबली मच गई है। पिपरैठा जगनेर के पूर्व प्रधान बनवारीलाल शर्मा का कहना है कि चुनाव की तैयारी में लगे दावेदारों को इससे झटका लगा है। अब आरक्षण नए सिरे से होने से फर्क पड़ेगा।
बिजौली के पूर्व प्रधान लाखन सिंह का कहना है कि इससे चुनाव की तैयारी में लगे लोगों को इंतजार करना पड़ेगा। आरक्षण आवंटन इस चुनाव में बड़ा महत्व रखता है। जिला पंचायत चुनाव की तैयारी में लगे रामकेश दुबे का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया के रुकने से दावेदारों में निराशा है।
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष दुष्यंत शर्मा ने कहा कि पंचायत चुनाव में भी प्रशासन भाजपा के इशारे पर काम कर रहा था। न्यायालय ने आरक्षण आवंटन पर रोक लगाकर सभी के हित में काम किया है। अब निष्पक्षता के साथ आरक्षण से लेकर आपत्तियों तक का निस्तारण होना चाहिए।
सरकार की नीयत साफ नहीं
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष रामगोपाल बघेल ने बताया कि आरक्षण आबादी के सही अनुपात में नहीं हुआ है। सरकार की नीयत चुनाव कराने के लिए साफ नहीं लगती। उच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं।
मजबूत है संगठन, इससे फर्क नहीं पड़ेगा
भाजपा के महानगर अध्यक्ष भानु महाजन ने कहा कि भाजपा का संगठन न्याय पंचायत स्तर तक मजबूत है। न्यायालय के आदेश के बाद प्रक्रिया रुकी है। हमारी तैयारी पूरी है। कभी भी चुनाव कराएं जाएं, हमें लोगों का समर्थन मिलेगा।
ग्राम पेंतिखेड़ा के कप्तान सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट ने आरक्षण प्रक्रिया पर रोक लगाकर न्याय किया है, क्योंकि नियम विरुद्ध गांव की सीटें ओबीसी में कर दी गयी, जबकि सामान्य वर्ग को यह अधिकार मिलना था।
मनमाने ढंग से बदला आरक्षण
ग्राम बदरौली निवासी विष्णु कुमार ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। वर्ष 1995 से 2015 तक सीटों में फेरबदल नहीं हुआ, अब सीट का आरक्षण मनमाने ढंग से बदला गया है।
गलत तरीके से किया निर्धारण
ग्राम पंचायत उजरई निवासी महेश ने कहा कि ग्राम में प्रधान पद पर आरक्षण का निर्धारण गलत तरीके से किया गया है। इसकी आपत्ति भी दर्ज कराई थी। अब हाईकोर्ट ने सही निर्णय लिया है।