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यूपीः आलू किसानों की आय में हो सकता है इजाफा, सरकार ने की ये तैयारी

Thu, 11 Jan 2018 05:58 PM IST
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा Updated Thu, 11 Jan 2018 05:58 PM IST
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UP Government is planning to increase rate of potato
अालू - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश सरकार आलू का समर्थन मूल्य बढ़ाएगी। इस बार 487 रुपये क्विंटल था, जबकि आने वाले सीजन में आलू का भाव 600 रुपये क्विंटल किया जा सकता है। आलू खरीद के लिए क्रय केंद्रों की संख्या में भी इजाफा होगा।
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आगरा और मथुरा समेत प्रदेश के 20 जिलों में आलू की खेती होती है। करीब पांच लाख किसानों का जीवन आलू की कीमत पर चलता है। लेकिन वर्ष 2015 से किसानों को आलू की कीमत नहीं मिल पा रही है। हर साल आलू को फेंका जाता है। 
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लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं किसान। पिछले दिनों विधान भवन, राजभवन और मुख्यमंत्री आवास के पास जब आलू फेंका गया तो सरकार गंभीर हुई। आलू किसानों की समस्या का समाधान करने को मंत्रियों की एक कमेटी बना दी गई है। 
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यह कमेटी किसानों के बीच जाकर पूछेगी कि आलू की खेती पर कितनी लागत आ रही है और कितना दाम मिल रहा है। कितनी कीमत हो जाए जिससे किसानों का नुकसान कम किया जा सके। 

UP Government is planning to increase rate of potato
श्रीकांत शर्मा
इस साल सरकार ने आलू का समर्थन मूल्य 487 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया था लेकिन आने वाले सीजन में समर्थन मूल्य बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की तैयारी है। मंत्रियों की टीम जब रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप देगी तो रेट तय कर दिए जाएंगे। 

अभी तक सरकार ने आलू की खरीद केवल मंडी समिति के माध्यम से ही कराई थी लेकिन अब कुछ दूसरी एजेंसियां भी आलू की खरीद करेंगी। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि आलू किसानों को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। सरकार तो आलू की खरीद करेगी ही आने वाले समय में फूड प्रोसेसिंग प्लांट भी शुरू हो जाएंगे। 

प्राइवेट कंपनियों से भी बात कर रही सरकार

सरकार तो आलू की खरीद करेगी ही कुछ प्राइवेट कंपनियों से भी बात की जा रही है। चिप्स बनाने वाली कंपनियों को सरकार आलू उत्पादन वाले जनपदों में बुलाएगी। 

ताकि यह कंपनियां किसानों से सीधे आलू की खरीद कर सकेंगी। जब प्राइवेट कंपनियां आलू खरीद के लिए मार्केट में आएंगी तो आलू का भाव बढ़ जाएगा। 

अभी ये है हाल

भगवान कृष्ण के जिले में आलू की खेती करने वाला किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच गया है। मथुरा में 15000 हेक्टेयर में आलू की खेती हो रही है। मथुरा, बलदेव, मांट, राया, नौहझील और महावन में आलू की खेती होती है। 35000 किसान आलू की खेती कर रहे हैं। 

हर साल यह सोचकर फसल बोते हैं कि दाम अच्छे मिलेंगे तो बेटी की शादी करेंगे। घर का सामान खरीदेंगे। बैंक का कर्ज चुकाएंगे। लेकिन हर बार इनका ख्वाब टूट जाता है। 2015 से आलू का भाव मिल ही नहीं पा रहा। कभी आलू तीन रुपये किलो बिक जाता है तो कभी पांच रुपये किलो। इसमें लागत भी नहीं निकलती। 

आलू किसान होशियार सिंह का कहना है कि ऐसा लगता है कि आलू की खेती बंद करनी पड़ेगी। अब तो आलू को मंडी समिति ले जाने का भी किराया नहीं निकल पाता। कोल्ड स्टोर में अगर आलू को रख दिया जाए तो उसका किराया नहीं निकलता। 

प्रहलाद कुमार का कहना है कि वह 20 बीघा जमीन में आलू की खेती करते हैं। खाद-बीज उधार लेना पड़ता है। यह सोचकर लेते हैं कि आलू का भाव मिलेगा तो पैसा चुका देंगे लेकिन भाव मिल ही कहां पा रहा है। विनोद कुमार का कहना है कि सरकार को चाहिए कि वह गेहूं और धान की तरह से ही आलू की खरीद करे।
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