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भूगोल के प्रश्रों के जवाब में चकराए परीक्षार्थी
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27एमएनपी-19-बोर्ड परीक्षा के बाद बाहर निकलते छात्र-छात्राएं
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। यूपी बोर्ड परीक्षा में बृहस्पतिवार को यूपी बोर्ड सामाजिक विज्ञान की परीक्षा कड़ी निगरानी के बीच आयोजित की गई। परीक्षा के दौरान कहीं से भी कोई नकल नहीं पकड़ी जा सकी। सामाजिक विज्ञान में भूगोल खंड के प्रश्नों के जवाब में परीक्षार्थियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। परीक्षा के दौरान पंजीकृत 34073 परीक्षार्थियों में से 4065 परीक्षार्थी परीक्षा देने नहीं पहुंचे।
बृहस्पतिवार को प्रथम पाली में हाईस्कूल सामाजिक विज्ञान परीक्षा का आयोजन किया गया। परीक्षा के दौरान पंजीकृत 34073 परीक्षार्थियों में से 30008 परीक्षार्थी उपस्थित हुए जबकि 4065 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। सामाजिक विज्ञान का प्रश्नपत्र तीन खंडों में आया था। प्रथम खंड में भूगोल, द्वितीय में इतिहास और तृतीय खंड में नागरिक शास्त्र की प्रश्नपत्र पूछे गए। परीक्षा देकर निकले छात्र-छात्राओं से बात की तो उनका कहना था कि इतिहास और नागरिक शास्त्र के सवालों को जवाब देनो आसान था लेकिन भूगोल के सवालों के जवाब में दिमाग चकरा गया।
प्रश्नपत्र में भूगोल का खंड अधिक कठिन था। भूगोल के बड़े प्रश्नों के जवाब देने में दिक्कत उठानी पड़ी।
महालक्ष्मी
प्रश्नपत्र अच्छा हुआ। भूगोल खंड के प्रश्न कुछ उलझे हुए थे। उनके जवाब देने में दिमाग भी उलझता हुआ दिखाई दिया।
शिल्पी
अंतिम दो खंडों के प्रश्नपत्रों के जवाब देने में दिक्कत नहीं हुई। लेकिन प्रथम खंड के प्रश्नों के जवाब देने में दिक्कत उठानी पड़ी।
अंजू
प्रश्नों के जवाब तो आसान थे। लेकिन मानचित्र भरने में दिक्कत का सामना करना पड़ा। भूगोल का मानचित्र भी कठिन था।
वैष्णवी
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बृहस्पतिवार को प्रथम पाली में हाईस्कूल सामाजिक विज्ञान परीक्षा का आयोजन किया गया। परीक्षा के दौरान पंजीकृत 34073 परीक्षार्थियों में से 30008 परीक्षार्थी उपस्थित हुए जबकि 4065 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। सामाजिक विज्ञान का प्रश्नपत्र तीन खंडों में आया था। प्रथम खंड में भूगोल, द्वितीय में इतिहास और तृतीय खंड में नागरिक शास्त्र की प्रश्नपत्र पूछे गए। परीक्षा देकर निकले छात्र-छात्राओं से बात की तो उनका कहना था कि इतिहास और नागरिक शास्त्र के सवालों को जवाब देनो आसान था लेकिन भूगोल के सवालों के जवाब में दिमाग चकरा गया।
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प्रश्नपत्र में भूगोल का खंड अधिक कठिन था। भूगोल के बड़े प्रश्नों के जवाब देने में दिक्कत उठानी पड़ी।
महालक्ष्मी
प्रश्नपत्र अच्छा हुआ। भूगोल खंड के प्रश्न कुछ उलझे हुए थे। उनके जवाब देने में दिमाग भी उलझता हुआ दिखाई दिया।
शिल्पी
अंतिम दो खंडों के प्रश्नपत्रों के जवाब देने में दिक्कत नहीं हुई। लेकिन प्रथम खंड के प्रश्नों के जवाब देने में दिक्कत उठानी पड़ी।
अंजू
प्रश्नों के जवाब तो आसान थे। लेकिन मानचित्र भरने में दिक्कत का सामना करना पड़ा। भूगोल का मानचित्र भी कठिन था।
वैष्णवी