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केंद्रीय मंत्री से कहा, किराया दें या फिर आवास खाली करें

Thu, 08 Oct 2015 01:40 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा Updated Thu, 08 Oct 2015 01:40 AM IST
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university said to katheria,  rent paid or vacate the accommodation
डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री रामशंकर कठेरिया से कहा है कि वे खंदारी परिसर में स्थित अपने लिए आवंटित आवास किराया अदा करें अथवा इसे खाली कर दें। उन्हें इस आशय का नोटिस जारी किया गया है।
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बता दें, बीते दिनों कांग्र्रेस की छात्र इकाई (एनएसयूआई) ने केंद्रीय मंत्री पर विश्वविद्यालय के खंदारी कैंपस में अवैध तरीके से निवास करने, निर्माण कराने और राजनीतिक गतिविधियां संचालित करने का आरोप लगाया था। एनएसयूआई ने आवास खाली कराने की मांग के साथ धरना भी दिया। तब भड़के मंत्री समर्थकों ने गेस्ट हाउस पर धरनारत एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को खदेड़ दिया था। मामला गर्माने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने उचित कार्रवाई का भरोसा दिया था।
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बुधवार को मंत्री के सुरक्षा गार्ड पर एफआईआर की मांग को लेकर किए प्रदर्शन में एनएसयूआई कार्यकर्ताआें ने फिर से यह मांग उठाई। तब कुलपति प्रोफेसर मोहम्मद मुजम्मिल ने उन्हें बताया कि मंत्री कठेरिया को नोटिस भेजा गया है। विश्वविद्यालय के पीआरओ डा. मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि विवि में प्रवक्ता डा. कठेरिया नवंबर 2014 से अवकाश पर हैं। उन्हें विवि नियमावली के तहत आवास का शुल्क जमा करने को पत्र भेजा गया है।
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पहले आवास शुल्क मेरे वेतन से ही कट जाता था। अवकाश पर होने और विश्वविद्यालय से वेतन नहीं लेने के कारण यह शुल्क कटना बंद हो गया। मैंने तो स्वयं विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर बकाया शुल्क की जानकारी मांगी थी। पत्र मिलते ही शुल्क का भुगतान करा दिया जाएगा।
- डा. रामशंकर कठेरिया, केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री
कठेरिया का विवादों से पुराना नाता
केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री प्रोफेसर रामशंकर कठेरिया एक बार फिर विवाद से घिर गए हैं। इस बार उन्हें डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय से नोटिस मिला है। इससे पहले भी उन पर आरोप लगते रहे हैं। इनमें से ज्यादातर विश्वविद्यालय से ही संबंधित हैं। कई मामले कोर्ट में भी पहुंचे।
2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी कुंवर चंद वकील ने कठेरिया की डिग्री पर सवाल खड़ा करते हुए कोर्ट में याचिका दायर की। 2014 में उनके चुनाव जीतते ही यह मामला फिर उछला। हालांकि बाद में उन्हें कोर्ट से क्लीन चिट मिल गई। यह मामला थमा तो मंत्री रहते हुए विश्वविद्यालय से वेतन लेने पर हंगामा खड़ा हो गया।  विरोधियों ने इसे मुद्दा बना लिया। डा. कठेरिया को कई मंचों से जवाब देना पड़ा।

कुछ ही दिनों बाद एनएसयूआई और कांग्रेस ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आरोप था कि मंत्री ने खंदारी परिसर का गेस्ट हाउस पर कब्जा लिया है। उसमें उनके सुरक्षाकर्मी रह रहे हैं। एनएसयूआई और भाजपा कार्यकर्ताओं में झड़प भी हुई। शहर में हुए तमाम धरना-प्रदर्शनों में उन पर मुकदमे दर्ज हुए हैं। कुछ में उन्हें बरी कर दिया गया है तो कई विचाराधीन है।
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