यूक्रेन संकट: आगरा के 72 छात्र-छात्राओं की घर वापसी, भविष्य को लेकर चिंतित, मुख्यमंत्री से की यह मांग
यूक्रेन से अब तक आगरा के 72 छात्र-छात्राओं की घर वापसी हो चुकी है। यूक्रेन में शहर के 77 छात्र फंसे थे। अभी तीन छात्राओं सहित कुल पांच लोगों के वतन लौटने का इंतजार है।
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यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध भीषण रूप ले चुका है। राहत की बात ये है कि ताजनगरी के सभी छात्र सुरक्षित हैं। सोमवार को दयालबाग निवासी हर्षा, रुई की मंडी निवासी शोएब और कोरथ गांव निवासी आयुष सिंह घर पहुंच गए। हर्षा, अमीषा और सुनील चौहान भी घर वापस आ गए हैं। यूक्रेन से लौटने के बाद जहां एक तरफ छात्र वहां के हालातों को याद कर डर जाते हैं, दूसरी तरफ अब उनके सामने भविष्य को लेकर चिंता है।
अधर में फंसी पढ़ाई
युद्ध के कारण अनिश्चितकाल के लिए यूक्रेन में मेडिकल कॉलेज बंद हो गए हैं। जिससे छात्रों की पढ़ाई अधर में फंस गई है। यूक्रेन से लौटे वायु विहार निवासी विवेक की मां प्रेमलता चौधरी ने बताया कि बच्चों का भविष्य खराब न हो जाए। इसके लिए सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री से यूक्रेन से लौटे छात्रों के लिए योजना बनाने की मांग की है।
सात दिन बंकर में रहे... खत्म हो गया था खाना : हर्षा
यूक्रेन के खारकीव से लौटी हर्षा ने बताया कि सात दिन उन्हें बंकर में रहना पड़ा। बाहर धमाके हो रहे थे। सात दिन बाद जब खाने-पीने का सामान खत्म हो गया, तो हम पैदल वहां से निकल लिए। ल्वीव पहुंचे फिर वहां से रोमानिया आए। रोमानिया से दूतावास की मदद से घर वापस लौटे हैं।
एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा हर्षा ने बताया कि 2 मार्च को वह खारकीव से निकली थी। उनके साथ अन्य भारतीय छात्र भी थे। हर्षा के पिता सबाजीत ने बताया कि बेटी को लेकर बहुत चिंता थी। दिनभर टीवी पर बैठा रहता था। अब बहुत खुश हूं। बेटी सही सलामत घर लौट आई है।
मॉस्को से शारजाह होते हुए आई घर : अमीषा
यूक्रेन और रूस के बीच छिड़ी जंग में बॉर्डर पर बसे क्रीमिया में भी दहशत का माहौल था। क्रीमिया से लौटी एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष की छात्रा अमीषा राज ने बताया कि 2014 में रूस ने क्रीमिया पर हमला किया था। क्रीमिया बॉर्डर पर बसा है। यूक्रेन और रूस में लड़ाई शुरू हुई तो शहर के ऊपर से फाइटर जेट उड़ रहे थे। धमाकों की आवाजें आ रही थीं। हमें पता नहीं चल रहा था कि रूस हमला कर रहा है या यूक्रेन।
कॉलेज प्रबंधन ने हाई अलर्ट घोषित करते हुए भारतीय नागरिकों को निकलने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि वह क्रीमिया से ट्रेन पकड़कर मॉस्को पहुंची। वहां फ्लाइट नहीं मिली। मुश्किल से दुबई की फ्लाइट से शारजाह होते हुए दिल्ली आई। बेटी की घर वापसी पर पिता अजय सक्सेना और मां रंजना ने बेटी को गले लगा लिया।
बेटे को देख आंखों से छलके आंसू
फतेहाबाद के विझामई गांव निवासी सुनील चौहान भी रविवार को घर पहुंच गए। बेटे को देख परिजनों के आंसू छलक पड़े। पिता अशोक चौहान और मां मीरा देवी ने बेटे को गले से लगा लिया। सुनील ने बताया कि वह डेनीप्रो यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस पांचवें वर्ष का छात्र है। 24 फरवरी से रूस का हमला शुरू हो गया था। सैन्य एयरबेस तबाह कर दिया।
हमले के बाद शहर में खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया। पांच लीटर पानी की बोतल 120 रुपये में बिक रही थी। सायरन बजते ही लोग बंकर की तरफ दौड़ पड़ते थे। माइनस नौ डिग्री तापमान में बंकर में दुबके रहे। 28 फरवरी को 15 हजार रुपये में रोमानिया के लिए बस की। एक मार्च को रोमनिया बॉर्डर पार किया। जहां से दूतावास की मदद से मैं घर पहुंच सका हूं।