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मथुरा में मर्यादा तार-तार: नगर निगम की बैठक में दो पार्षदों की हरकत से आहत महिला पार्षद फूट-फूटकर रोईं

Sat, 23 Oct 2021 12:16 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 23 Oct 2021 12:16 AM IST
सार

मथुरा-वृंदावन नगर निगम की बोर्ड कार्यसमिति में एक बार फिर मर्यादा तार-तार हो गई। शुक्रवार को बैठक के दौरान दो पार्षद भिड़ गए। दोनों में कुर्सियां चलीं, जमकर गाली-गलौज हुई। इससे आहत होकर सदन में मौजूद महिला पार्षद फफक-फफक कर रो पड़ीं।  

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two councillor abusing each other in the meeting of Mathura-Vrindavan Municipal Corporation
नगर निगम की बैठक में मौजूद महापौर व नगर आयुक्त - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मथुरा-वृंदावन नगर निगम की बोर्ड कार्यसमिति बैठक में शुक्रवार को दो पार्षद आपस में भिड़ गए। दोनों में जमकर गाली-गलौज हुई और कुर्सियां तक फेंककर मारी गईं। बाद में नगर आयुक्त अनुनय झा और महापौर डॉ.मुकेश आर्य बंधु ने मामले को शांत कराया। इस दौरान महिला पार्षद मीरा मित्तल फफक-फफक कर रोने लगीं।

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बैठक में पार्षद तिलकवीर सिंह, महापौर डॉ. मुकेश आर्य बंधु से समितियों के बारे में बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान पार्षद कुलदीप बीच में बोल पड़े। इस पर दोनों पार्षदों में जमकर बहस होने लगी। शोरशराबा, गाली-गलौज के साथ ही एक-दूसरे को मारने के लिए कुर्सियां फेंकी गईं। वहां मौजूद अधिकारियों व अन्य पार्षदों ने किसी तरह से स्थिति को संभाला और मामले को शांत कराया। 
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महिला पार्षद रो पड़ीं 
कार्यसमिति में दो पार्षदों के मध्य झगड़ा, अपशब्दों का प्रयोग, एक-दूसरे को धमकी देने से क्षुब्ध होकर वहां मौजूद पार्षद मीरा मित्तल फफक-फफकर रोने लगीं। उनका कहना था कि कार्यसमिति में पार्षद ऐसे लड़ रहे हैं, इससे ज्यादा शर्म की क्या बात हो सकती है? यह गलत है और मैं भी इस सदन की सदस्य हूं। 

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नगर आयुक्त और महापौर ने मामले को शांत कराते हुए दोनों पक्षों में समझौता करा दिया और झगड़ रहे दोनों पार्षदों ने कहा कि भविष्य में सदन में इस तरह की हरकत नहीं करेंगे। उधर, महापौर और नगर आयुक्त ने बताया कि सदन में बहस जरूर हुई थी, कोई कुर्सी नहीं फेंकी गई। दोनों पक्षों को शांत कराकर गले मिलवा दिया गया।

20 लाख रुपये लेने का है विवाद
दरअसल, पिछले सदन की बैठक में पार्षदों ने हंगामा करते हुए आरोप लगाया था कि एक जमीन के मामले में महापौर ने 20 लाख रुपये लिए हैं। उस वक्त जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। कमेटी जांच कर रही थी कि इसी बीच महापौर ने कमेटी भंग कर दी। इस बात पर शुक्रवार को दोनों पार्षदों में बहस हुई। 

एक पार्षद ने कहा कि क्या कमेटी भंग करने के लिए ही बनाई गई थी। तय हुआ था कि कमेटी अपनी जांच रिपोर्ट सदन में रखेगी। लेकिन इससे पहले ही भंग कर दी गई। कहीं न कहीं आरोप में सच्चाई थी, इसीलिए महापौर ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर कमेटी भंग की। दूसरे पार्षद महापौर के निर्णय का पक्ष लेने लगे, तभी विवाद हो गया। मालूम कि इससे पहले पार्षदों में चप्पलें भी चल चुकी हैं।

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