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UP: सोशल मीडिया पर बच्चों के बारे में कुछ भी शेयर करने से पहले सोच लें, पांच साल की है सजा; दो युवक बुरे फंसे

Tue, 23 Jun 2026 10:01 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Tue, 23 Jun 2026 10:01 AM IST
सार

आगरा में इंस्टाग्राम पर बच्चों से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री साझा करने के आरोप में दो युवकों के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने आईटी एक्ट की धारा 67बी के तहत कार्रवाई की है, जिसमें पहली बार दोषी पाए जाने पर भी पांच साल तक की सजा का प्रावधान है।

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Two Agra Youths Booked for Sharing Child Sexual Abuse Material on Instagram, Up to 5 Years' Jail Possible
बच्चा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

सोशल मीडिया पर बाल याैन शोषण सामग्री साझा करना अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसा करने वाले के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करती है। हाल ही में ऐसे ही दो मामले सामने आए हैं, जिनमें इंस्टाग्राम पर अलग-अलग दो युवकों ने बच्चों से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री सोशल मीडिया पर शेयर की थीं। मामले में यूएसए के संगठन नेशनल सेंटर फाॅर मिसिंग एंड एक्सप्लोइटेड चिल्ड्रेन (एनसीएमईसी) पोर्टल ने गृह मंत्रालय को अलर्ट जारी किया। इस पर आरोपियों की पहचान के बाद दोनों मामलों में थाना साइबर क्राइम में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को नोटिस जारी कर आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया जाएगा।
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दोनों ही मामलों में साइबर क्राइम थाने की महिला उपनिरीक्षकों ने प्राथमिकी दर्ज कराई हैं। डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि एक मामला चंद्रनगर, नरायच निवासी विवेक कपिल के खिलाफ दर्ज किया गया है। इस संबंध में साइबर टिपलाइन रिपोर्ट से जानकारी मिली थी। आरोपी की आईडी से तीन वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए थे।
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जीमेल आईडी और आईपी एड्रेस से आरोपी की पहचान करने के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई। इसी तरह दूसरा मामला मलपुरा के अभयपुरा निवासी अंशु के खिलाफ दर्ज किया गया। इस नाम से बनी आईडी से एक बच्ची का वीडियो साझा किया गया था। तीन लोगों ने यह वीडियो डाउनलोड भी किया। पोर्टल के माध्यम से मिली जानकारी में अन्य तीन के भी नाम हैं। इन सभी पर कार्रवाई की जाएगी। इस अलावा भी दो अन्य मामलों की जानकारी पुलिस को मिली है। इनमें भी प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी है।

 
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पहली बार में ही हो सकती है 5 साल तक की सजा
डीसीपी आदित्य सिंह ने बताया कि दोनों मामलों में पुलिस ने आईटी एक्ट की धारा 67बी के तहत कार्रवाई की है। यह बच्चों के बारे में आपत्तिजनक सामग्री सोशल मीडिया पर साझा करने के अपराध से संबंधित है। इसमें पांच साल तक की सजा का प्रावधान है। इसमें आरोपी को नोटिस जारी किया जाता है। साक्ष्य संकलन कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया जाता है। अगर कोई व्यक्ति दूसरी बार इस तरह का अपराध करता है तो सात साल तक की सजा दोषी पाए जाने पर हो सकती है। किसी पीड़ित के सामने आने पर पाक्सो एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। इसमें गिरफ्तारी भी हो सकती है।
 

ऐसे होती है आरोपियों की पहचान
साइबर क्राइम थाना की प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक, गूगल, फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और माइक्रोसॉफ्ट जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म अपने सर्वर पर किसी भी संदिग्ध बाल यौन शोषण सामग्री का पता लगाने के लिए एआई टूल्स का उपयोग करते हैं। जब भी इन कंपनियों को कोई संदिग्ध सामग्री मिलती है, तो वे इसकी रिपोर्ट सीधे एनसीएमईसी पोर्टल पर करती हैं। आम जनता भी इस पोर्टल पर सीधे रिपोर्ट कर सकती है। यह पोर्टल इन रिपोर्ट्स की जांच करता है। आरोपी के आईपी एड्रेस व लोकेशन के आधार पर उस देश की जांच एजेंसियों को डाटा भेजता है। भारत सरकार का गृह मंत्रालय इस पोर्टल से सीधे जुड़ा हुआ है। जब कोई भारतीय यूजर सोशल मीडिया या इंटरनेट पर आपत्तिजनक सामग्री अपलोड या डाउनलोड करता है तो एनसीआरबी जानकारी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो को भेजता है। राज्य की साइबर सेल और स्थानीय पुलिस को ट्रांसफर करता है। इसके बाद पुलिस उस आईपी एड्रेस को ट्रैक करके आरोपी पर कार्रवाई करती है।
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