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Agra Court News: 32 साल पुराने केस में नया मोड़, गवाही बदलते ही दो आरोपी बरी; वादी के भाई ने बताए निर्दोश
Wed, 13 May 2026 12:09 PM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 13 May 2026 12:09 PM IST
सार
आगरा की अदालत ने 1993 के लूट और हत्या प्रयास मामले में दो आरोपियों को 32 साल बाद दोषमुक्त कर दिया। सुनवाई के दौरान वादी के भाई ने अदालत में बयान दिया कि दोनों आरोपी निर्दोष हैं और घटना में शामिल नहीं थे।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा में लूट, हत्या प्रयास और आपराधिक षड्यंत्र के एक मामले में विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावी क्षेत्र) विकास गोयल ने नसीम उर्फ पलटू और इखलाक उर्फ मुन्ना को दोषमुक्त करने के आदेश दे दिए। गवाही के दौरान वादी के भाई ने आरोपियों को निर्दोष बताया था।
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थाना मंटोला में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार मोहम्म्द जुबैर ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 26 नवंबर 1993 को उनका भाई सलामुद्दीन गाजियाबाद से भेड़-बकरी बेचकर अपने घर टीला अजमेरी लौट रहा था। अटैची में में 1.60 लाख रुपये रखे थे। रात 3 बजे दो बदमाशों ने लूट के इरादे से घर के पास रोक लिया। छुरी से हमला कर गोली चला दी, जिससे भाई डर गया और बदमाशों ने अटैची लूट ली। भाई की चीखपुकार सुनकर वादी व अन्य परिजन मौके पर पहुंचे तो बदमाश भाग गए।
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मोहल्ले के लोगों के साथ बदमाशों का पीछा किया। पुलिस की मदद लूटी गई अटैची, छुरी और तमंचे सहित हनुमान मंदिर के पास से पकड़ लिया। पूछताछ में बदमाशों ने यामीन और अनिल शर्मा नाम बताया। पुलिस ने लूट, हत्या प्रयास, आयुध अधिनियम और माल बरामदगी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की। विवेचना में नसीम उर्फ पलटू और इखलाक उर्फ मुन्ना को भी आरोपी बनाया गया।
विचारण के दौरान यामीन की मृत्यु हो गई। अदालत ने उसके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी। अनिल शर्मा के हाजिर न होने पर उसकी पत्रावली अलग कर दी गई। अदालत में गवाही होने से पहले वादी मोहम्मद जुबैर और पीड़ित सलामुद्दीन की भी मृत्यु हो गई। इस वजह से उनकी गवाही दर्ज नहीं हो सकी। मुकदमे में वादी के अन्य भाई इकबाल की गवाही दर्ज हुई। उसने नसीम और इखलाक को निर्दोष बताया। इकबाल ने बताया कि घटना केवल यामीन और अनिल शर्मा ने की थी। उन्होंने ही इन्हें मौके से पकड़कर पुलिस को सौंपा था।