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अरहर की नहीं है ये पीली दाल: सस्ते में बिक रहा धीमा 'जहर', इसलिए खरीद रहे लोग; FSDA ने किया बड़ा खुलासा

Wed, 20 May 2026 01:22 PM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Wed, 20 May 2026 01:22 PM IST
सार

कागारौल में खाद्य विभाग ने छापा मारकर 2760 किलो प्रतिबंधित खेसारी दाल बरामद की, जिसे अरहर दाल बताकर गांवों में बेचा जा रहा था। ग्रामीणों की सतर्कता से पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ, विभाग ने गोदाम सीज कर जांच शुरू कर दी है।
 

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Toxic Kesari Dal Sold as Arhar: Food Department Seizes 2760 Kg in Agra Raid
पीली दाल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

खाद्य विभाग ने कागरौल में अवैध गोदाम में प्रतिबंधित 2760 किलो खेसारी दाल पकड़ी है। यहां बोरों में दाल भरी हुई थी। इसे अरहर की दाल बताकर शहर-देहात में बिक्री करते थे। जांच के लिए दो नमूने लैब भेज दिए हैं।
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सहायक आयुक्त खाद्य महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि किरावली के मलिकपुरा में अरहर की दाल के नाम पर खेसारी दाल बेचते हुए अनीश निवासी फिरोजाबाद को लोगों ने पकड़ लिया। खाद्य विभाग की टीम पहुंची को इसके पास से 80 किलो खेसारी दाल जब्त कर नमूना लिया। पूछताछ में इसने कागरौल के घुरैला गांव में गोदाम बताया। इस पर टीम ने मंगलवार की देर रात गोदाम पर छापा मारा। यहां संचालक करीम निवासी फिरोजाबाद मिला। 


 
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इससे लाइसेंस मांगा तो ये दिखा नहीं पाया। ये गोदाम किराए पर था। इसमें 92 कट्टों में खेसारी दाल भरी हुई थी। इसका वजन 2760 किलो मिला। गोदाम को सील करते हुए दाल भी सीज कर दी है। जांच के लिए नमूने लैब भेज दिए हैं। इस दाल की बिक्री प्रतिबंधित है। इसके रैकेट में शामिल लोगों की जांच की जा रही है।

 
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हाथरस से खरीदकर देशी अरहर के नाम पर बिक्री
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश गुप्ता ने बताया पूछताछ में करीम ने बताया कि हाथरस से ये खेसारी दाल खरीदकर स्टॉक करते हैं। खेसारी दाल को गांव-शहर में देशी अरहर के नाम पर 100-120 रुपये किलो में बिक्री करते थे। इसमें विक्रेता को 10 रुपये किलो का कमीशन देते हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी रविंद्र परमार ने बताया कि अरहर की दाल अर्द्धगोलाकार होती है। खेसारी दाल चपटी होती है।

 

खेसारी दाल से लकवा का खतरा
खेसारी दाल में न्यूरोटॉक्सिन पाया जाता है। लंबे समय तक उपयोग करने से लैथरिज्म गंभीर बीमारी हो सकती है। इस बीमारी में शरीर का निचला हिस्सा लकवाग्रस्त और पैर सुन्न पड़ सकते हैं। जोड़ो में दर्द की परेशानी भी बन जाती है। -डॉ. अरुण श्रीवास्तव, सीएमओ


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