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मोहन ‘भागवत’ सुनने को शिक्षक बने शिष्य
अमर उजाला आगरा
Updated Sun, 21 Aug 2016 12:17 AM IST
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माोहन भ्ाागवत
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को शिक्षक की भूमिका निभाई। वहीं, ब्रजप्रांत के विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, तकनीकी-प्रौद्योगिकी व प्रबंधकीय शिक्षण संस्थाओं के लगभग एक हजार शिक्षक शिष्य की भूमिका में थे। संघ प्रमुख ने शिक्षकों के सवालों का न सिर्फ विस्तृत और उदाहरणों के माध्यम से जवाब दिया बल्कि उनका ज्ञानवर्धन भी किया।
शिक्षा पर चिंतन के लिए आयोजित सम्मेलन में भागवत के उद्बोधन से पहले विभिन्न विद्यालयों के 20 शिक्षकों ने अपने सवाल रखे। इसमें वर्तमान शिक्षा पद्धति और इसमें बदलाव की जरूरत तथा संघ की इसमें भूमिका से जुड़े सवाल थे। इसके बाद स्ववित्तपोषित विद्यालयों में वेतन विसंगतियों और शिक्षकों के उत्पीड़न को लेकर थे। विद्यालयों में छात्रों के लिए शिक्षा से जुड़े संसाधनों के अभाव को भी उठाया। कहा कि बहुत से स्ववित्तपोषित विद्यालयों में प्रयोगात्मक परीक्षा तक की व्यवस्था नहीं है, इसके बावजूद यहां के छात्र 98 फीसदी तक अंक पाते हैं। मोहन भागवत ने ऐसे लगभग 20 सवालों का जवाब अपने उद्बोधन के साथ दिया। कहा, वर्तमान शिक्षण पद्धति ठीक होनी चाहिए। देश की शिक्षा व्यवस्था सौ प्रतिशत ठीक है, ऐसा न हम मानते हैं और न ही शिक्षा नीति बनाने वाले सहमत हैं। वह व्यवस्था का पुनर्निरीक्षण चाहते हैं। समाजवाद, पूंजीवादी व्यवस्था को सभी ने देखा लेकिन देश में कोई परिवर्तन नहीं आया। संघ प्रमुख ने कहा व्यवस्था अपने आप नहीं चलती, उसे मनुष्य चलाते हैं। महत्व इस बात का है कि चलाने वाला व्यक्ति कैसा है। अंत में उन्होंने कहा कि शिक्षक इस प्रकार का प्रयत्न करें, देश शोषण मुक्त व समरस समाज की सृष्टि करने वाला बने। इजराइल की प्रगति का उदाहरण देते हुए कहा कि इस देश पर पांच बार विदेशी विद्रोहियों ने आक्रमण किया लेकिन, मातृभूमि की रक्षा का संकल्प लिए वहां के निवासियों ने ना केवल विद्रोहियों को परास्त किया बल्कि पांचों युद्ध में विजय प्राप्त करने के साथ ही देश की सीमा का विस्तार भी किया। उन्होंने कहा कि इजराइल निवासियों की दृढ़ इच्छाशक्ति ने रेगिस्तान वाले देश को आनंदवन बना दिया। उन्होंने जापान की प्रगति का भी उदाहरण दिया। प्रांत संघचालक जगदीश, जीएलए विश्वविद्यालय के कुलपति डा. दुर्ग सिंह चौहान, क्षेत्र संघचालक दर्शनलाल मौजूद थे। इससे पूर्व क्षेत्रीय प्रचारक आलोक ने संघ के क्रिया कलापों प्रकाश डाला। कहा कि विश्व के 90 देशों में आरएसएस विद्यमान है।
शिक्षा मंत्री को पत्र लिखें
सम्मेलन में शिक्षकों ने शिक्षा की दशा और दिशा पर कम, व्यक्तिगत समस्याएं ज्यादा उठाईं। इस पर संघ प्रमुख ने चुटकी लेते हुए कहा कि शिक्षक शायद यह सोच रहे हैं संघ के मुखिया होने नाते मैं उनकी समस्या का समाधान करा दूंगा लेकिन ऐसा नहीं है। स्वयंसेवक स्वतंत्र कार्य करते हैं। संघ का कार्य सिर्फ व्यक्ति निर्माण करना है। हालांकि उनके द्वारा तैयार किए गए लोग अधिकांश जगहों पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर इशारा करते हुए कहा कि वहां भी एक डंडा घुमाने वाला बैठा है। ऐसे और भी बहुत से लोग हैं। केंद्र और कई राज्यों में स्वयंसेवक हैं। मोहन भागवत ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वह अपनी शिकायतें शिक्षा मंत्री को भेजें। वह उनसे शिकायतों को संज्ञान में लेने का आग्रह कर लेंगे।
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शिक्षा पर चिंतन के लिए आयोजित सम्मेलन में भागवत के उद्बोधन से पहले विभिन्न विद्यालयों के 20 शिक्षकों ने अपने सवाल रखे। इसमें वर्तमान शिक्षा पद्धति और इसमें बदलाव की जरूरत तथा संघ की इसमें भूमिका से जुड़े सवाल थे। इसके बाद स्ववित्तपोषित विद्यालयों में वेतन विसंगतियों और शिक्षकों के उत्पीड़न को लेकर थे। विद्यालयों में छात्रों के लिए शिक्षा से जुड़े संसाधनों के अभाव को भी उठाया। कहा कि बहुत से स्ववित्तपोषित विद्यालयों में प्रयोगात्मक परीक्षा तक की व्यवस्था नहीं है, इसके बावजूद यहां के छात्र 98 फीसदी तक अंक पाते हैं। मोहन भागवत ने ऐसे लगभग 20 सवालों का जवाब अपने उद्बोधन के साथ दिया। कहा, वर्तमान शिक्षण पद्धति ठीक होनी चाहिए। देश की शिक्षा व्यवस्था सौ प्रतिशत ठीक है, ऐसा न हम मानते हैं और न ही शिक्षा नीति बनाने वाले सहमत हैं। वह व्यवस्था का पुनर्निरीक्षण चाहते हैं। समाजवाद, पूंजीवादी व्यवस्था को सभी ने देखा लेकिन देश में कोई परिवर्तन नहीं आया। संघ प्रमुख ने कहा व्यवस्था अपने आप नहीं चलती, उसे मनुष्य चलाते हैं। महत्व इस बात का है कि चलाने वाला व्यक्ति कैसा है। अंत में उन्होंने कहा कि शिक्षक इस प्रकार का प्रयत्न करें, देश शोषण मुक्त व समरस समाज की सृष्टि करने वाला बने। इजराइल की प्रगति का उदाहरण देते हुए कहा कि इस देश पर पांच बार विदेशी विद्रोहियों ने आक्रमण किया लेकिन, मातृभूमि की रक्षा का संकल्प लिए वहां के निवासियों ने ना केवल विद्रोहियों को परास्त किया बल्कि पांचों युद्ध में विजय प्राप्त करने के साथ ही देश की सीमा का विस्तार भी किया। उन्होंने कहा कि इजराइल निवासियों की दृढ़ इच्छाशक्ति ने रेगिस्तान वाले देश को आनंदवन बना दिया। उन्होंने जापान की प्रगति का भी उदाहरण दिया। प्रांत संघचालक जगदीश, जीएलए विश्वविद्यालय के कुलपति डा. दुर्ग सिंह चौहान, क्षेत्र संघचालक दर्शनलाल मौजूद थे। इससे पूर्व क्षेत्रीय प्रचारक आलोक ने संघ के क्रिया कलापों प्रकाश डाला। कहा कि विश्व के 90 देशों में आरएसएस विद्यमान है।
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शिक्षा मंत्री को पत्र लिखें
सम्मेलन में शिक्षकों ने शिक्षा की दशा और दिशा पर कम, व्यक्तिगत समस्याएं ज्यादा उठाईं। इस पर संघ प्रमुख ने चुटकी लेते हुए कहा कि शिक्षक शायद यह सोच रहे हैं संघ के मुखिया होने नाते मैं उनकी समस्या का समाधान करा दूंगा लेकिन ऐसा नहीं है। स्वयंसेवक स्वतंत्र कार्य करते हैं। संघ का कार्य सिर्फ व्यक्ति निर्माण करना है। हालांकि उनके द्वारा तैयार किए गए लोग अधिकांश जगहों पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर इशारा करते हुए कहा कि वहां भी एक डंडा घुमाने वाला बैठा है। ऐसे और भी बहुत से लोग हैं। केंद्र और कई राज्यों में स्वयंसेवक हैं। मोहन भागवत ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वह अपनी शिकायतें शिक्षा मंत्री को भेजें। वह उनसे शिकायतों को संज्ञान में लेने का आग्रह कर लेंगे।
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