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चमकी: अब तो ताज पराया लगता है
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Mon, 26 Oct 2015 02:07 AM IST
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चांदनी रात में ताजमहल को देखना अलग ही अनुभव है। संगमरमर में तराशे गए बेपनाह हुस्न की वो चमक पर्यटकों को दिखाने के लिए बेशक रविवार से रात्रिदर्शन (नाइट व्यू) शुरू हुआ लेकिन 33 साल पहले इसी दीदार के रंग अलग थे। जब चांद की सीधी रोशनी पड़ती तो पच्चीकारी के कीमती पत्थर हीरों की तरह से जगमगा उठते।
तब यही खूबसूरती को निहारने लाखों लोग पहुंचते। ‘ये चमकी, वो चमकी’ के शोर से पूरी रात गुलजार रहती। चमकी मेले में करीबी ताजमहल को अपना बना देती थी। आतंकी धमकी के बाद मेला क्या बंद हुआ आगरा की सदियों पुरानी विरासत गुम हो गई। अब दीदार की अनुमति तो है, लेकिन संगीनों के साए में वह मस्ती, वह मोहब्बत कहां। ताज पराया लगता है।
ताजमहल- 1982
शरद पूर्णिमा पर ताजमहल में चमकी का मेला लगता तो पूरे शहर के होटल सैलानियों से भर जाते। तीन दिन के मेले में शरद पूर्णिमा के दिन ताज जो सूर्योदय पर खुलता तो फिर अगली सुबह 4 बजे बंद होता था।
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इससे एक दिन पहले व एक दिन बाद रात 2 बजे तक लोग चमकी का आनंद लेते। एएसआई के पूर्व अधिकारी डा. आरके दीक्षित के मुताबिक एक महीने पहले से ही चमकी मेले की तैयारियां शुरू हो जातीं।
मुख्य मकबरे से यमुना किनारे की ओर संगमरमर की रेलिंग हटाकर अस्थाई सीढ़ियां बनाई जाती थीं। लाखों की भीड़ उमड़ती जिसे लेबर गेट से निकाला जाता। ताज के फोरकोर्ट के बागीचों में अस्थाई दुकानें लगतीं थीं।
बाहर दशहरा घाट रोड पर मिठाइयों व अन्य सामानों की दुकानें भी रात भर खुली रहतीं।
ताजमहल: अब-2015
स्थानीय पर्यटन उद्यमियों की पहल पर प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाकर 28 नवंबर 2004 को पूर्णिमा पर ताजमहल खोलने का आदेश कराया। अब शरद पूर्णिमा से दो दिन पहले और दो दिन बाद केकुल पांच रातों में सिर्फ दो हजार लोगों को ताज का दीदार कराने की अनुमति है।
रात 8:30 बजे से 12:30 बजे के बीच 50-50 पर्यटकों के अधिकतम 8 ग्रुप दीदारे-ताज करते हैं। महंगे टिकट पर, सीआईएसएफ के जवानों के हथियारों साए में केवल 30 मिनट के लिए। वह भी 330 मीटर दूरी से, रेड सैंड स्टोन प्लेटफार्म से। इतनी दूर से ताज का वह रूप नहीं दिखता, जिसका जिक्र बुजुर्ग करते हैं।
यह सही है, शरद पूर्णिमा की चांदनी में ताज की खूबसूरती वैसी ही है, पर न चमकी मेला होता है, न वैसी उतावली भीड़।
सात ग्रुपों में 312 ने किया दीदार
ताजमहल का रात्रि दर्शन रविवार को शुरू हुआ। सात ग्रुपों में रात 12 बजे तक 312 पर्यटकों ने चांदनी में नहाए बेपनाह हुस्न का दीदार किया। पर्यटकों में 201 भारतीय, 65 विदेशी और 46 बच्चे भी शामिल थे।
नाइटव्यू के टिकट की महंगाई होटलों ने भुनाई। ताजगंज और फतेहाबाद रोड के होटलों ने अपनी छतों से ताज दर्शन कराने को स्पेशल डिनर की व्यवस्था की। पंचतारा होटलों ने भी विदेशी मेहमानों के लिए ऐसे ही इंतजाम किए।
चमकी मेले के लिए दूर-दूर से लोग आते थे। पूरे एमजी रोड (तब ठंडी सड़क) पर रात भर लोगों का तांता लगा रहता था। चमकी देखने के लिए पर्यटकों के रूकने से होटल फुल रहते। सुरक्षा बंदोबस्त के बूते अगर यह मेला फिर शुरू हो सके तो पर्यटन का अर्थशास्त्र ही बदल जाएगा।
राजीव तिवारी, अध्यक्ष फेडरेशन आफ ट्रेवल एसोसिएशन
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तब यही खूबसूरती को निहारने लाखों लोग पहुंचते। ‘ये चमकी, वो चमकी’ के शोर से पूरी रात गुलजार रहती। चमकी मेले में करीबी ताजमहल को अपना बना देती थी। आतंकी धमकी के बाद मेला क्या बंद हुआ आगरा की सदियों पुरानी विरासत गुम हो गई। अब दीदार की अनुमति तो है, लेकिन संगीनों के साए में वह मस्ती, वह मोहब्बत कहां। ताज पराया लगता है।
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ताजमहल- 1982
शरद पूर्णिमा पर ताजमहल में चमकी का मेला लगता तो पूरे शहर के होटल सैलानियों से भर जाते। तीन दिन के मेले में शरद पूर्णिमा के दिन ताज जो सूर्योदय पर खुलता तो फिर अगली सुबह 4 बजे बंद होता था।
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इससे एक दिन पहले व एक दिन बाद रात 2 बजे तक लोग चमकी का आनंद लेते। एएसआई के पूर्व अधिकारी डा. आरके दीक्षित के मुताबिक एक महीने पहले से ही चमकी मेले की तैयारियां शुरू हो जातीं।
मुख्य मकबरे से यमुना किनारे की ओर संगमरमर की रेलिंग हटाकर अस्थाई सीढ़ियां बनाई जाती थीं। लाखों की भीड़ उमड़ती जिसे लेबर गेट से निकाला जाता। ताज के फोरकोर्ट के बागीचों में अस्थाई दुकानें लगतीं थीं।
बाहर दशहरा घाट रोड पर मिठाइयों व अन्य सामानों की दुकानें भी रात भर खुली रहतीं।
ताजमहल: अब-2015
स्थानीय पर्यटन उद्यमियों की पहल पर प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाकर 28 नवंबर 2004 को पूर्णिमा पर ताजमहल खोलने का आदेश कराया। अब शरद पूर्णिमा से दो दिन पहले और दो दिन बाद केकुल पांच रातों में सिर्फ दो हजार लोगों को ताज का दीदार कराने की अनुमति है।
रात 8:30 बजे से 12:30 बजे के बीच 50-50 पर्यटकों के अधिकतम 8 ग्रुप दीदारे-ताज करते हैं। महंगे टिकट पर, सीआईएसएफ के जवानों के हथियारों साए में केवल 30 मिनट के लिए। वह भी 330 मीटर दूरी से, रेड सैंड स्टोन प्लेटफार्म से। इतनी दूर से ताज का वह रूप नहीं दिखता, जिसका जिक्र बुजुर्ग करते हैं।
यह सही है, शरद पूर्णिमा की चांदनी में ताज की खूबसूरती वैसी ही है, पर न चमकी मेला होता है, न वैसी उतावली भीड़।
सात ग्रुपों में 312 ने किया दीदार
ताजमहल का रात्रि दर्शन रविवार को शुरू हुआ। सात ग्रुपों में रात 12 बजे तक 312 पर्यटकों ने चांदनी में नहाए बेपनाह हुस्न का दीदार किया। पर्यटकों में 201 भारतीय, 65 विदेशी और 46 बच्चे भी शामिल थे।
नाइटव्यू के टिकट की महंगाई होटलों ने भुनाई। ताजगंज और फतेहाबाद रोड के होटलों ने अपनी छतों से ताज दर्शन कराने को स्पेशल डिनर की व्यवस्था की। पंचतारा होटलों ने भी विदेशी मेहमानों के लिए ऐसे ही इंतजाम किए।
चमकी मेले के लिए दूर-दूर से लोग आते थे। पूरे एमजी रोड (तब ठंडी सड़क) पर रात भर लोगों का तांता लगा रहता था। चमकी देखने के लिए पर्यटकों के रूकने से होटल फुल रहते। सुरक्षा बंदोबस्त के बूते अगर यह मेला फिर शुरू हो सके तो पर्यटन का अर्थशास्त्र ही बदल जाएगा।
राजीव तिवारी, अध्यक्ष फेडरेशन आफ ट्रेवल एसोसिएशन