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Agra News: समय से दी ऑनलाइन ठगी की सूचना, 90 हजार रुपये वापस
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आगरा। लिंक क्लिक करने पर हुई 94 हजार की साइबर ठगी में सरकारी कर्मचारी पंकज गोयल की जागरूकता काम आई। उन्होंने गोल्डन आवर में साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर काॅल कर खाते से लेन-देन को होल्ड करा दिया। इससे रकम साइबर ठगों के पास नहीं जा सकी। अब एक महीने बाद पुलिस ने उनकी रकम वापस करा दी है।
डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह के मुताबिक, पीड़ित पंकज गोयल का बेटा 8 मई को फेसबुक चला रहा था। तभी उन्होंने सिलिंडर का वजन मापने वाली मशीन देखी। इसकी कीमत तकरीबन 500 रुपये थी। उन्हें वो पसंद आ गई। उन्होंने खरीदने के लिए क्लिक किया। इस पर एक ई-वाॅलेट खुल गया। इसमें एक लिंक दिया था। इसे क्लिक करने पर उनके फोनपे से 94 हजार रुपये कट गए। इस बारे में बेटे ने पिता को बताया।
पंकज गोयल ने साइबर ठगी होने पर तत्परता दिखाई। उन्होंने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर काॅल कर दिया। खातों और लेन-देन की जानकारी दी। इस पर साइबर सेल की टीम जांच में जुट गई। खाते से रकम लेने के बाद विभिन्न कंपनियों को ऑर्डर किए गए थे। पुलिस ने बैंक और ई-कामर्स कंपनी से संपर्क किया। इसके बाद रकम को होल्ड करा दिया। अब साइबर ठगों ने जो रकम ट्रांसफर की थी, उसमें से पीड़ित को 90 हजार रुपये वापस मिल गए। इस पर पंकज गोयल ने पुलिस को धन्यवाद दिया।
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- ये है गोल्डर आवर
डीसीपी ने बताया कि जिस तरह से हादसे में घायल व्यक्ति को एक घंटे के गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाने पर जान बच सकती है। उसी तरह साइबर ठगी होने पर एक घंटे के अंदर सूचना देने पर लोगों को रकम वापस मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है।
- किसी भी कंपनी, बैंक के कस्टमर केयर नंबर की पुष्टि केवल उनकी आधिकारिक वेबसाइट से ही करें।
- अज्ञात काॅल पर कभी भी अपनी बैंकिंग, डेबिट, क्रेडिट कार्ड और ओटीपी की जानकारी साझा न करें।
- किसी भी अज्ञात लिंक या एपीके फाइल पर बिना सत्यापन क्लिक न करें।
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डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह के मुताबिक, पीड़ित पंकज गोयल का बेटा 8 मई को फेसबुक चला रहा था। तभी उन्होंने सिलिंडर का वजन मापने वाली मशीन देखी। इसकी कीमत तकरीबन 500 रुपये थी। उन्हें वो पसंद आ गई। उन्होंने खरीदने के लिए क्लिक किया। इस पर एक ई-वाॅलेट खुल गया। इसमें एक लिंक दिया था। इसे क्लिक करने पर उनके फोनपे से 94 हजार रुपये कट गए। इस बारे में बेटे ने पिता को बताया।
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पंकज गोयल ने साइबर ठगी होने पर तत्परता दिखाई। उन्होंने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर काॅल कर दिया। खातों और लेन-देन की जानकारी दी। इस पर साइबर सेल की टीम जांच में जुट गई। खाते से रकम लेने के बाद विभिन्न कंपनियों को ऑर्डर किए गए थे। पुलिस ने बैंक और ई-कामर्स कंपनी से संपर्क किया। इसके बाद रकम को होल्ड करा दिया। अब साइबर ठगों ने जो रकम ट्रांसफर की थी, उसमें से पीड़ित को 90 हजार रुपये वापस मिल गए। इस पर पंकज गोयल ने पुलिस को धन्यवाद दिया।
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- ये है गोल्डर आवर
डीसीपी ने बताया कि जिस तरह से हादसे में घायल व्यक्ति को एक घंटे के गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाने पर जान बच सकती है। उसी तरह साइबर ठगी होने पर एक घंटे के अंदर सूचना देने पर लोगों को रकम वापस मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है।
- किसी भी कंपनी, बैंक के कस्टमर केयर नंबर की पुष्टि केवल उनकी आधिकारिक वेबसाइट से ही करें।
- अज्ञात काॅल पर कभी भी अपनी बैंकिंग, डेबिट, क्रेडिट कार्ड और ओटीपी की जानकारी साझा न करें।
- किसी भी अज्ञात लिंक या एपीके फाइल पर बिना सत्यापन क्लिक न करें।