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Agra News: युवक को गोली मारकर उतारा था माैत के घाट, कोर्ट से तीन सगे भाइयों को मिली आजीवन कारावास की सजा
Mon, 22 Dec 2025 11:17 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Mon, 22 Dec 2025 11:17 PM IST
सार
रंजिश में युवक को गोली मारकर माैत के घाट उतारा गया था। करीब 24 साल बाद कोर्ट ने दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों में तीन सगे भाई हैं।
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अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई (सांकेतिक)
- फोटो : ANI
विस्तार
रंजिश के चलते युवक की गोली मारकर हत्या करने के आरोप में अदालत ने थाना फतेहाबाद क्षेत्र के गांव पलिया निवासी करुआ उर्फ राधेश्याम, अरुण कुमार और उमेश कुमार तीनों भाइयों को दोषी माना। एडीजे 6 ने आजीवन कारावास के साथ 1.20 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुना दी।
थाना फतेहाबाद में दर्ज केस के अनुसार गांव पलिया निवासी राज बहादुर ने तहरीर दी थी। आरोप लगाया था कि गांव के निवासी आरोपी करुआ उर्फ राधेश्याम, अरुण कुमार और उमेश कुमार से जमीन को लेकर पुरानी रंजिश चली आ रही थी। 23 अप्रैल 2001 को आरोपियों ने परिजन संग मिलकर उनके बेटे को घेर लिया। उसे गाली-गलौज देने लगे।
विरोध पर लाठी डंडों से पीटा। शोर सुनकर स्थानीय लोग बचाने आए तो आरोपियों ने बेटे को गोली मार दी। इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने 1 अगस्त 2001 को आरोपी करुआ को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
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आरोपी मुरारी, अशोक और विजय में आत्म समर्पण किया। अदालत ने साक्ष्यों के आधार तीनों भाइयों को दोषी माना। मुकदमे के विचारण के दौरान आरोपी मुरारी और अशोक की मौत हो गई। विजय को संदेह के लाभ में बरी कर दिया।
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थाना फतेहाबाद में दर्ज केस के अनुसार गांव पलिया निवासी राज बहादुर ने तहरीर दी थी। आरोप लगाया था कि गांव के निवासी आरोपी करुआ उर्फ राधेश्याम, अरुण कुमार और उमेश कुमार से जमीन को लेकर पुरानी रंजिश चली आ रही थी। 23 अप्रैल 2001 को आरोपियों ने परिजन संग मिलकर उनके बेटे को घेर लिया। उसे गाली-गलौज देने लगे।
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विरोध पर लाठी डंडों से पीटा। शोर सुनकर स्थानीय लोग बचाने आए तो आरोपियों ने बेटे को गोली मार दी। इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने 1 अगस्त 2001 को आरोपी करुआ को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
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आरोपी मुरारी, अशोक और विजय में आत्म समर्पण किया। अदालत ने साक्ष्यों के आधार तीनों भाइयों को दोषी माना। मुकदमे के विचारण के दौरान आरोपी मुरारी और अशोक की मौत हो गई। विजय को संदेह के लाभ में बरी कर दिया।