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इस बार मिट्टी के दीपकों से रोशन होगी दिवाली
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रफ़रोजाबाद ! कुम्हार द्वारा बनाए गए मिट्टी के दीपक धूप में सूखते हुए
- फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। इस बार दिवाली मिट्टी के दीपकों से रोशन होगी। चाइनीज झालरों के प्रति मोह कम होने और दीपकों की डिमांड बढ़ने से मिट्टी के दीपक बनाने वालों में उत्साह है। पिछली साल की अपेक्षा इस बार डिमांड में तेजी से उछाल आया है। अब चार दिन का समय शेष रहने के कारण दीपक तैयार करने वाले लोगों ने आर्डर लेना बंद कर दिया है।
यूं तो सुहागनगरी का बाजार चाइनीज झालरों से पटा पड़ा है। हालांकि इस बार लोगों को झालरें नहीं लुभा रही हैं। इस बार लोगों को मिट्टी के विभिन्न डिजाइनों के दीपक लुभा रहे है। इस कारण पिछली साल की अपेक्षा इस बार मिट्टी के दीपकों की मांग में तेजी से उछाल आया है। चाक पर मिट्टी के दीपक तैयार करने वाले पन्नालाल ने बताया कि कोरोना काल में मिट्टी के दीपक की डिमांड तेजी से बढ़ी है। पिछली साल 35 रुपये के सौ दीपक थोक में बेचे थे। वहीं इस बार डिमांड बढ़ने के कारण 40 रुपये के सौ कर दिए है। इसके बाद भी डिमांड पूरी नहीं हो पा रही है।
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इस बार मिट्टी के दीपक का काफी पसंद किए जा रहे हैं। हालांकि पिछली बार से मिट्टी के दीपक पर भी महंगाई का असर पड़ा है। हालांकि दीपक लेने से कई फायदे हैं। एक तो कुम्हारों को रोजगार मिलता है, दूसरा देश का पैसा देश में रहता है। इसलिए इस बार स्वदेशी दीपकों से दिवाली मनाने की तैयारी है।
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धर्मवीर, ग्राहक
पिछली साल की अपेक्षा इस बार मिट्टी के दीपक की डिमांड अधिक है। मिट्टी का अभाव होने के कारण माल समय से तैयार नहीं हो पा रहा है। 30 से 35 रुपये में मिलने वाली मिट्टी की बोरी आज 50 रुपये में मिल रही है। पहले से लिए गए ऑर्डर पूरे किए जा रहे हैं। नए ऑर्डर लेना बंद कर दिए गए है।
अवधेश कुमार, कारीगर
मिट्टी के दीपकों की डिमांड कम होने के साथ परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा होने लगा था। कोरोना काल में डिमांड बढ़ने के साथ पुराना कारोबार पटरी पर लौटता नजर आ रहा है। हालांकि अब शरीर साथ नहीं देता है। इस कारण अधिक ऑर्डर नहीं लेते हैं। बच्चे चाक चलाना नहीं जानते।
पन्नालाल, कारीगर
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यूं तो सुहागनगरी का बाजार चाइनीज झालरों से पटा पड़ा है। हालांकि इस बार लोगों को झालरें नहीं लुभा रही हैं। इस बार लोगों को मिट्टी के विभिन्न डिजाइनों के दीपक लुभा रहे है। इस कारण पिछली साल की अपेक्षा इस बार मिट्टी के दीपकों की मांग में तेजी से उछाल आया है। चाक पर मिट्टी के दीपक तैयार करने वाले पन्नालाल ने बताया कि कोरोना काल में मिट्टी के दीपक की डिमांड तेजी से बढ़ी है। पिछली साल 35 रुपये के सौ दीपक थोक में बेचे थे। वहीं इस बार डिमांड बढ़ने के कारण 40 रुपये के सौ कर दिए है। इसके बाद भी डिमांड पूरी नहीं हो पा रही है।
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इस बार मिट्टी के दीपक का काफी पसंद किए जा रहे हैं। हालांकि पिछली बार से मिट्टी के दीपक पर भी महंगाई का असर पड़ा है। हालांकि दीपक लेने से कई फायदे हैं। एक तो कुम्हारों को रोजगार मिलता है, दूसरा देश का पैसा देश में रहता है। इसलिए इस बार स्वदेशी दीपकों से दिवाली मनाने की तैयारी है।
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धर्मवीर, ग्राहक
पिछली साल की अपेक्षा इस बार मिट्टी के दीपक की डिमांड अधिक है। मिट्टी का अभाव होने के कारण माल समय से तैयार नहीं हो पा रहा है। 30 से 35 रुपये में मिलने वाली मिट्टी की बोरी आज 50 रुपये में मिल रही है। पहले से लिए गए ऑर्डर पूरे किए जा रहे हैं। नए ऑर्डर लेना बंद कर दिए गए है।
अवधेश कुमार, कारीगर
मिट्टी के दीपकों की डिमांड कम होने के साथ परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा होने लगा था। कोरोना काल में डिमांड बढ़ने के साथ पुराना कारोबार पटरी पर लौटता नजर आ रहा है। हालांकि अब शरीर साथ नहीं देता है। इस कारण अधिक ऑर्डर नहीं लेते हैं। बच्चे चाक चलाना नहीं जानते।
पन्नालाल, कारीगर