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साइबर अपराधियों का नया पैंतरा: आगरा में 72 वर्षीय वृद्धा से ठगी, इस डर की वजह से गवां दिए 33 लाख रुपये

Sat, 14 Feb 2026 02:45 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Updated Sat, 14 Feb 2026 02:45 AM IST
सार

72 वर्षीय महिला को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज होने का डर दिखाकर साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट किया। उनसे दो बार में 33 लाख रुपये अपने खातों में डलवा लिए।

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Cyber Fraudsters Digitally Arrest 72-Year-Old Woman in Agra
एआई निर्मित फोटो

विस्तार

आगरा के खंदारी स्थित फ्रेंड्स पैराडाइज अपार्टमेंट में अकेली रहने वाली 72 वर्षीय महिला को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज होने का डर दिखाकर साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट किया। उनसे दो बार में 33 लाख रुपये अपने खातों में डलवा लिए। पीड़िता की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
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पीड़िता प्रमोद कुमारी सिंह के पति राघवेंद्र पाल सिंह दिवंगत हो चुके हैं। बेटा गुरुग्राम में मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करता है। वह अपार्टमेंट में अकेली रहती हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 8 दिसंबर को उनके पास एक नंबर से कॉल आई। काॅल करने वाली ने खुद को टेलीकॉम डिपार्टमेंट के नई दिल्ली हेडक्वार्टर की अधिकारी प्रिया शर्मा बताया।
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मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का आरोप लगाकर प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी दी। व्हाट्सएप पर मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायतों के फर्जी लेटर भेजे। वीडियो कॉल कर धमकाया और डिजिटल अरेस्ट करने की जानकारी दी। वह रोने लगीं तो आरोपी ने मदद का आश्वासन देकर बैंक बैलेंस के बारे में पूछा। पीड़िता ने 23 लाख रुपये बताए हुए खाते में आरटीजीएस के माध्यम से भेजे। 9 दिसंबर को दोबारा धमकाने पर 10 लाख और भेजे। आरोपी और रुपये मांग रहे थे। परेशान होकर उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत की। थाना प्रभारी का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज कर मोबाइल नंबर और खातों की जानकारी की जा रही है।
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इन बातों का रखें ध्यान
डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है और न ही रुपये ट्रांसफर करने के लिए कहती है। यदि कोई खुद को पुलिस, सीबीआई, टेलीकॉम विभाग या अन्य अधिकारी बताकर एफआईआर, मनी लॉन्ड्रिंग या गिरफ्तारी का डर दिखाए तो घबराएं नहीं। कॉल तुरंत काट दें। अनजान लिंक, दस्तावेज या स्क्रीन शेयरिंग से बचें। किसी भी दबाव में आकर रुपये ट्रांसफर न करें। बैंक विवरण, ओटीपी या निजी जानकारी साझा न करें। ठगी का संदेह होते ही 1930 हेल्पलाइन और साइबर क्राइम पोर्टल पर तुरंत शिकायत दर्ज करें।
 
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