पुलिस ने पीड़ित से शिनाख्त कराए बिना डकैती का कर दिया खुलासा, उठे ये सवाल
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आगरा में सेक्टर छह में रहने वाले सेवानिवृत्त मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक ओम प्रकाश भास्कर के पास कोर्ट का समन पहुंचा तो वह चौंक गए। जानकारी की तो पता चला कि उनके घर जो डकैती पड़ी थी, उसमें कोर्ट में गवाह के तौर पर बयान दर्ज कराना है। हैरानी इसलिए थी क्योंकि उन्हें मालूम ही नहीं था कि पुलिस ने डकैती का खुलासा कर दिया है।
पता भी कैसे चलता जब न तो उन्हें बदमाशों की शिनाख्त के लिए बुलाया गया। न ही बरामद माल की पहचान के लिए। और तो और चार्जशीट भी उनका बयान दर्ज किए बिना ही दाखिल कर दी गई। इससे बड़ा ताज्जुब तो यह जानकर हुआ कि पुलिस ने बरामदगी में चांदी के आठ सिक्के दिखाए जबकि डकैत 1.10 लाख रुपये नकद और लगभग 19 लाख के जेवरात लूट ले गए थे। 20 लाख की डकैती को पुलिस आठ सिक्कों पर कैसे खोल सकती है?
वह इस सवाल को लेकर थाना जगदीशपुरा पहुंचे तो हैरानी और भी बढ़ गई। पता चला कि पुलिस ने दो ही बदमाश पकड़े थे जबकि डकैती की घटना की जांच के दौरान नौ बदमाश शामिल होने की जानकारी मिली थी। पांच तो घर में ही घुसे थे। दो बाहर खड़े थे। दो गली के बाहर देख रहे थे कि कोई गली में तो नहीं जा रहा है।
इस बारे में थाने का रिकार्ड देखने पर पता चलता है कि पुलिस ने आवास विकास की एक लूट का खुलासा किया था। ओमप्रकाश भास्कर के घर पड़ी डकैती खुल नहीं पा रही थी। दावा किया गया कि लूट करने वाले गिरोह ने ही डाका डाला था।
बदमाशों ने एक घंटा तक की थी लूटपाट
जगदीशपुरा की आवास विकास कॉलोनी सेक्टर छह निवासी सेवानिवृत्त मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक ओम प्रकाश भास्कर और पत्नी सुमंगला भास्कर घर पर अकेले थे। उनके बेटे अनुपम भास्कर उस समय मैनपुरी में डिप्टी सीएमओ थे। वर्तमान में अलीगढ़ में एसीएमओ हैं। वह नौकरी पर गए थे। प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक छोटा बेटे अनुपम और दोनों बेटों की पत्नियां भी ड्यूटी पर गई थीं।
सुबह के पौने दस बजे घर में बदमाश घुसे। तमंचे और चाकू के बल पर बुजुर्ग दंपति को बंधक बनाया। आधा किलो सोने के जेवरात, हीरे का सेट, एक किलो चांदी के सिक्के और 1.10 लाख कैश लूट ले गए। घर में पांच बदमाश घुसे थे। दो बाहर खड़े थे। एक घंटा तक लूटपाट की थी। पुलिस ने जांच के दौरान बदमाशों के नंबर ट्रेस किए। सर्विलांस पर लेकर लोकेशन ट्रेस की तो पता चला कि कुल बदमाश नौ थे। चार घर के बाहर थे। पुलिस ने आठ मार्च, 2015 को चार्जशीट लगा दी।
असली अपराधी पकड़े थे पर माल लेकर छोड़ दिए
ओपी भास्कर मूल रूप से जलेसर के रहने वाले हैं। उन्हें जलेसर के ही एक गांव के प्रधान ने बाद में बताया कि डकैती की घटना के कुछ दिन बाद पुलिस गांव से नौ बदमाशों को ले गई थी। उनसे 25 लाख का माल बरामद किया गया था। कुछ माल और किसी वारदात का होगा। बदमाशों को थाने पर रखा गया लेकिन बाद में सभी को छोड़ दिया गया। माल पुलिस ने ही रख लिया था।
ओपी भास्कर बताते हैं कि उनके घर पड़ी डकैती के एक साल बाद जयपाल सिंह इंजीनियर के यहां डकैती पड़ी। यह ठीक वैसे ही तरीके से डाली गई, जैसे उनके घर डाली गई थी। इसका खुलासा पुलिस ने आज तक नहीं किया है।
चश्मदीद का ये है बयान
2. बीस लाख का माल ले गए थे बदमाश, 1.10 लाख कैश था, 19 लाख के जेवरात थे।
3. दिनदहाड़े डकैती डालने वाला गैंग था, आसपास और भी वारदात कीं।
4. ओम प्रकाश भास्कर और उनकी पत्नी कोे बंधक बनाकर डाली गई थी डकैती।
पुलिस की कार्रवाई पर ये सवाल
1. पुलिस ने पांच बदमाश बताए, गिरफ्तार सिर्फ दो ही किए गए।
2. बरामदगी के नाम पर चांदी के आठ सिक्के ही दिखाए गए। ये भी पीड़ित को नहीं मिल पाए हैं।
3. पुलिस ने आवास विकास की एक लूट खोली थी, उसी में डकैती भी जोड़कर बता दी।
4. पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में जमा कर दी लेकिन पीड़ितों को इसकी भी जानकारी नहीं दी।
- कोर्ट से समन आने पर मुझे पता चला कि पुलिस ने डकैती खोली थी, मैं संतुष्ट नहीं हूं, अधिकारियों से मिलकर नए सिरे से जांच कराने की मांग करूंगा।
ओपी भास्कर, पीड़ित